कुतर्क रोज़गार स्कीम : न्यू इंडिया हवाबाज़ी भर्ती में आपका स्वागत है

आड़ा-तिरछा , व्यंग्य, शनिवार , 09-09-2017


satire-new-india

वीना

कच्छा गैंग के कम कुशल कारीगरों के लिए ‘‘कुर्तक रोज़गार’’ स्कीम का हिस्सा बनिये। ‘‘न्यू इंडिया’’ हवाबाज़ी भर्ती में स्वागत है।

कम इन।

राम राम गुरु जी!

आज के ज़माने में राम राम? गुरु जी? न्यू इंडिया के न्यू जवान हो गुड मॉर्निंग बोलो।

गुरु जी मैं न्यू गुरुग्राम का ओल्ड शिष्य हूं जी। गुरु को अंगूठा दक्षिणा देने वाला।

ला, मुझे दे अपना अंगूठा, काट?

ही...ही...ही...सर जी काट दूंगा नौकरी दे दो बस।

गुड, वैरी गुड।

सांकेतिक तस्वीर। साभार : गूगल

फिलहाल अपना अंगूठा बचाकर रखो। अभी फेसबुक, ट्वीटर, व्हाट्सएप पर दूसरों के अंगूठे काटकर लाने से काम चल जाएगा।

जी गुरुजी!

सिर, हाथ-पैर, नाक, जो भी हम कहें काटना पड़ेगा। समझे?

बिजली की फुर्ती से गुरुजी!

कंप्यूटर चलाना आता है?

हां जी, एकबार मेरे ही टैक्टर पे चल के गया था गांव। मुखिया जी ने मंगाया था। आप जिस पे कहो उसपे रखकर चला दूंगा!

वाह! शाबास छोरे। तेरे जैसे अकलमंद ही चाहिये हमें। पाठक जी इसे उंगली से कंप्यूटर चलाना सिखा दो। हिंदी में कहां, किसका क्या काटना हैं बात दो।

हिंदी पढ़नी-लिखनी तो जानता है ना बे?

बेजती मत करो गुरु जी! छठी फेल हूं। अंगूठा छाप ना हूं जी।

गाली-वाली?

डिगरी धारी गालीबाज के नाम से मसहूर है जी थारा भाई, नमूना दिखाऊं?

शाबास! नमूना छोड़, फाइनल एग्जाम दे भीतर जाके।

नेक्स्ट...

सांकेतिक तस्वीर।

हेलो सर! माई सेल्फ जैक। फेसबुक, ट्वीटर, पे सारा दिन चैट करता हूं। चुटकियों में अकाउंट सब हैक करता हूं यो!

सिट डाउन न्यू इंडिया। टैल मी,  इन रामायण,  सीता किसका बाप था?

नो आईडिया सर। मैं इनमें से किसी से नहीं मिला।

वैरी गुड! ज्ञानियों को तौबा करवा देगा तू। गो इनसाइड।

नेक्स्ट...

प्रणाम भईया!

आइये बहन जी। क्या करती हैं आप?

भईया जी मैं हिंदू संस्कृति-सभ्यता की टीचर हूं। लड़कियों को सती, सीता-सावित्री के गुण सिखाती हूं। उन्हें ऑनर किलिंग से बचाती हूं। भाई से संपत्ति में हिस्सा मांगना गलत है और पति से बलात्कार करवाना सही है बताती हूं।

अहो भाग्य हमारे! जो आप जैसी प्रतिभाशाली हस्ती यहां पधारी।

कंप्यूटर चलाना जानती हैं आप।

जी भईया जी।

बहन जी आज-कल की बिगड़ैल लड़कियों को सुधारने के लिए हमारे यहां थोड़ी कड़ी भाषा का इस्तेमाल भी करना होता है। क्या आप...

चिंतित न हों भईया जी। मैंने आज़ादी का राग अलापने वाली बहुत सी रंडी-छिनालों को सीधा किया है आश्रम में।

अति उत्तम! आप तो गुणों की खान हैं। सनातन गैंग मैं आपका स्वागत है।

थैक्यूं भईया जी!

नेक्स्ट...

प्रणाम मान्यवर!

प्रणाम! ये मायावी नज़ाकत कहां से सीखी आपने?

मान्यवर, कच्छा गैंग!

ओह! वाह! क्या-क्या सीखा वहां?

कुतर्क और झूठ की सारी हदें पार कर दो। एक ही गुरुमंत्र है मान्यवर।

कोई हाल-फिलहाल का कारनामा बताओ। नए रंगरूट भी कुछ सीख लेंगे।

जी मान्यवर, आजकल की सिरफिरी औरतें श्री राम पर बहुत सवाल उठाती हैं। एक फेसबुक पर चिचिया रही थी। धोबी के कहने पर सीता को घर से निकाल दिया। अगर कोई भगवान भी पत्नी के साथ अन्याय करता है तो उसे बख्शना नहीं चाहिये।

फिर...फिर तुमने क्या जवाब दिया!

जो हमें सिखाया गया था वही -‘‘मैं जिन राम की बात कर रहा हूं उन्होंने ताड़का जैसी को मुक्त किया था।’’

इस पर वो बोली -‘‘मतलब उसी ज़माने से आदिवासियों की ज़मीने हथियाने का धंधा चल रहा है।’’

‘‘मैं उस राम की बात कर रहा हूं जहां राजा साधारण धोबी की बात सुनता था।’’

वो बोली- ‘‘और अपनी गर्भवती बीवी को घर से निकालकर सबको सीख दे गया कि औरत की कोई औकात नहीं महारानी हो या नौकरानी।’’

मैंने सफाई दी- ‘‘राम ने सीता को नहीं निकाला था। उन्हें खुद से दूर किया था। कंडोम को प्यार की निशानी मानने वाले लोग प्यार में त्याग को क्या मानेंगे?’’

उसने फिर सवाल किया- ‘‘और इस त्याग की ज़रूरत क्या थी?’’

इस सवाल का मुझे कोई जवाब नहीं रटवाया गया था इसलिए मैंने उसका सवाल गोल कर श्री राम की दूसरी खूबी गिनवा दी।

‘‘मैं उस राम की बात कर रहा हूं जो सामाजिक सफाई के लिए आया था।’’

वो फिर भी चुप न हुई- ‘‘इसीलिए राम ने अपने चमचे मूर्ख  ब्राह्मणों से ज़्यादा ज्ञानी, निहत्थे शूद्र शंबूक की हत्या कर दी।’’

हर बात पे टकर-टकर -‘‘मैं उस राम की बात कर रहा हूं जिनकी मर्यादा की वजह से हिंदूवाद विश्व प्रसिद्ध है।’’

अरे अबकी तो कमाल कर दिया उसने बोली- ‘‘हां, वो तो है। तुम्हारे रामलला के नक्शेकदम पर एक और लला अपनी बीवी को घरेलू हिंसा में झोंक देश की नाक कटवाता फिरता है दुनिया भर में।’’

मैंने कहा ‘‘हमारी भाभी जी को कोई तकलीफ नहीं। उम्मीद करता हूं आपके पति आपके साथ ज़रूर होंगे।’’

बड़ी ढीठ थी, अड़ी रही - ‘‘भाभी जी को क्यों छोड़ा? वो बोलो।’’

वैसे मान्यवर, भईया ने भाभी जी को क्यों छोड़ा था? और छोड़ दिया तो फिर दुबारा पकड़ा क्यों?

अबे ओ भूतनी के, भईया पे सवाल उठाता है!

माफी मान्यवर।

तेरी तो खुद की ही लेनी-देनी हो गई।

मान्यवर, मैंने उसे चेतावनी दी- ‘‘मैं आपसे वादा करता हूं सनातन फिर से आएगा।’’

फिर?

पूछने लगी मैं ब्रह्मा के कौन से अंग से पैदा हुआ हूं। कौन से नंबर का हिंदू हूं।

तुमने क्या जवाब दिया?

मान्यवर आजकल आर्यों को बाहर का और द्रविड़ों को इस मिट्टी का असली वारिस साबित करने की जो साजिश चल रही है मैंने बड़ी चालाकी से उस पर वार किया।

कैसे?

मैंने उससे कहा -‘‘शक, हूण, कुषाण, आर्य, बेबीलोनियन हम इन सबके मिक्स्चर हैं। द्रविड़ और आर्य एग्ज़िस्ट ही नहीं करता।’’

आर्य मतलब, सर्वश्रेष्ठ पथ पर चलने वाले। किसी धर्म पर नहीं। और मुझे गर्व है प्योर आर्य होने पर।

अबे मिक्सचर! खुद ही खुद की क्यो उतार रहा था बार-बार?

वो भी बोली- ‘‘मिक्स्चर भी प्योर होता है आज ही पता चला!’’

बेटा फिरकी ले गई तेरी ही...ही...ही...

मान्यवर, मेरा खून खौल रहा है। तभी सही था जब कुट-कुटा कर घर में पड़ी रहती थीं। बाहर निकलने, पढ़ने-लिखने क्या लगी, हमारी ही ज़बान पकड़ने लगी निर्लज्ज!  ठीक किया, उस गौरी लंकेश को उड़ा दिया। इन सब चंडियों, छिनालों का सफाया कर देना चाहिये।

अभी कच्चे हो बच्चा। कच्छा कुतर्क की नाक कटवा रहे हो। फेसबुक, ट्वीटर से बाहर मत निकलना। महारथी कुतर्कबाज भी सावधान हैं आजकल। अपने पिटने के दिनों की शुरुआत हो चुकी है।

(वीना युवा पत्रकार और फिल्मकार हैं। आप आजकल दिल्ली में रहती हैं।)










Leave your comment