दौड़िए नीतीश जी, भागलपुर के बगडेर बगीचा के पेड़ लटकू आपके इंतज़ार में हैं

आड़ा-तिरछा , व्यंग्य, शनिवार , 05-08-2017


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वीना

हैरानी हुई ये ख़बर पढ़ कर कि बिहार के भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड के बगडेर बगीचे में लगभग 100 परिवार पेड़ के ऊपर घोंसला बना कर रहने को मजबूर हैं। और किसी को पता तक नहीं। डिजिटल टेक्नॉलाजी के इस युग में बताइये ये कोई बात हुई। पेड़ पर चढ़कर भी कनेक्शन सही जगह नहीं मिल रहा। नीतीश जी ये कैसी नेटवर्किंग है आपके राज्य में? आप तो जीरो टॉलरेंस वाले आदमी हैं भई। आपके राज्य में पिछले एक साल से बाढ़ के मारे लोग पेड़ों पर लटके हैं। और आपको भनक तक नहीं। थोड़ा टाइट कीजिए मोदी जी की डिजिटल और सीबीआई नेटवर्किंग को।

ये भी क्या बात हुई कि तेजस्वी की जासूसी करके सुशील मोदी को सिर पर बिठा कर भाग लिए। थोड़ी खोजबीन तो उस जनता के हक़ में भी बनती है जिसके नाम पर अपनी जान बचाने के लिए आपने मिनी भ्रष्टाचारी राजग को लात मारकर एनडीए के बिग भ्रष्टाचारियों को ईमानदारी की माला पहना दी।

हास्य-व्यंग्य। फोटो : जनचौक

आजकल आपकी फिर से दोस्ती मोदी जी से हो गई है। और मोदी जी की पुरानी दोस्ती मुकेश अंबानी से है ही। तो क्यों नहीं भागलपुर के पेड़ पे लटके उल्लू बने वोटरों को कोई दूसरा इंतजाम होने तक मुकेश अंबानी के मुंबई के 27 मंजिला आलीशान एंटीलियामें शिफ्ट करा देते। ऐसे मुसीबत के मौकों पर ही तो असली दोस्तों की पहचान होती है। और दोस्ती-वोस्ती भी जाने दीजिये अगर भागलपुर के इन 100 परिवारों ने कुछ दिन दुनिया के सबसे महंगे,  नंबर वन महल एंटीलिया के मजे लूट लिए तो पूरा बिहार आपकी और मोदी जी की गोदी में। लालू नाम की बला को फिर कौन घास डालेगा।

100 परिवार होते कितने हैं। अंबानी के इलाके नुमा घर के किसी कौने में आवारा कुत्ते-बिल्लयों की तरह पड़े रहेंगे। जिन हालात में आपने उनकी परवरिश की है, अंबानी के महल में घुसने भर देने के लिए वे ताउम्र आपका शुक्रराना अदा करेंगे। 

जहां तक मुकेश अंबानी की हां का सवाल है तो उसमें ज़्यादा दिक्कत नहीं होगी। उन्हें चमड़ी से दमड़ी बनाने का चस्का है। सुना है मुकेश अंबानी के घर में 600 नौकर काम करते हैं। सबसे कम तनख्वाह लाख से ऊपर से शुरू होती है। और ज़्यादा तो करोड़ों तक जाती है। इंटरव्यू लेकर नौकर रखे जाते हैं। भागलपुर वासी तो बिहार की न्यूनतम मजदूरी पर भी चमड़ी बिछा देंगे। और क्या पता बिहार का सर गर्व से ऊंचा करने वाला कोई सेवादार हीरा-पन्ना निकले और इंटरव्यू भी पार कर जाए। कितना सीना चौड़ा होगा अंबानी के सामने आपका। कुछ भी हो लालू जी ने बिहारी बोली को पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया है, दुनिया के मेहमान बिहारी नौकर की सेवाओं का मज़ा लेने अंबानी के घर ज़रूर पधारेंगे। और इसका फायदा आप, अंबानी और मोदी तीनों को मिलेगा।

हमेशा साथ रहने वाले नौकरों को इसलिए महंगा खरीदा जाता है कि वो नाराज़ हुए तो जान-माल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जिन्हें दस-पांच दिन में भगाना हो उन्हें तो कुछ देने की भी ज़रूरत नहीं। पालतू जानवरों का बचा खाना भी उनके लिए फाइव स्टार के मजे लेकर आएगा। ना भागलपुर को शिकायत न अंबानी साहब को।

जहां तक नीता अंबानी की मंजूरी का सवाल है तो वो तो पक्की है। सुना है बेटे को पांच रुपये जेब खर्च देकर उन्होंने पैसे की कीमत समझाई है। इस मौके का भी वे भरपूर फायदा उठाएंगी हमें पूरा यकीन है। जिन बच्चों के गाड़ी-जेवर-कपड़ों पर वो करोड़ों खर्च करती है उन्हें आसानी से भागलपुर उल्लुओं को दिखाकर बता पाएंगी कि देखो ये हैं वो लोग जिनकी चमड़ी-दमड़ी, ज़मीन-जायदाद, बैंक-बैलेंस नोच-बेचकर कर हम तुम्हारे लिए करोड़ों-अरबों झपटते हैं। इन्हें नज़दीक से जान समझ लो ताकि तुम भी इन्हें और इनकी पीढ़ियों को लूटने,  झोपड़ियों में रहने और पेड़ों पर लटकने के लिए राज़ी करने में महारत हासिल कर सको। जिस दिन ये इंकार करना सीख गए उसी दिन हमारा ऐशो-आराम इनका। जो बात सीखते-समझते, नुकसान करते 10 साल लगते वो 10 दिन में बिना हींग-फिटकरी के खर्चे के सीख जाएंगे बच्चे। बनिया बुद्धि के लिए इससे बढ़कर भला कुछ हो सकता है। 

तो नीतीश जी अब देर मत करिये। तुरंत भागिये मोदी जी से अंबानी के गले पड़ने की सिफारिश लेकर। कहीं ऐसा न हो कोई और इन भागलपुर पेड़ लटकुओं को कब्ज़े में लेकर आपसे पहले अपना उल्लू सीधा कर ले। और आप कमल की कीचड़ में नाक रगड़ते रह जाएं। दौड़िए नीतीश जी भागलपुर के बगडेर बगीचा के पेड़ लटकू आपके इंतज़ार में हैं।

(वीना, स्वतंत्र पत्रकार एवं फिल्ममेकर हैं और दिल्ली में रहती हैं।)










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