“भूतपूर्व हिंदू हृदय सम्राट!” बता कैसा लगता है अब...?

आड़ा-तिरछा , व्यंग्य, शनिवार , 20-01-2018


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वीना

“हिंदू हृदय सम्राट” प्रवीण तोगड़िया को मीडिया के सामने रोते-घबराते देखा तो यहूदी फिल्म के कुछ डायलॉग बरबस याद आने लगे। फिल्म आपको उस ज़माने में ले जाती है जहां महान रोमनों के साम्राज्य में यहूदी तुच्छ, नीच, कीड़े-मकौड़े समझे जाते हैं। फिल्म देखते-देखते लाचार यहूदी कब आज के भारत के अल्पसंख्यक मुसलमान और इंसाफ के लिए जान दांव पर लगाने वालों में बदल जाता है, और कब तानाशाह रोमन तोगड़िया, तड़ीपार एंड पार्टी में तब्दील हो जाता है पता ही नहीं चलता! 

‘‘तुम्हारे ही लिए पैदा हुए दुनिया के नज़ारे, चमकते आए तुम्हारी ही रौशनी से चांद और तारे, तुम्हारा ग़म है ग़म, औरों का ग़म ख़्वाब ओ कहानी है, तुम्हारा खून है खून हमारा खून पानी है।’’ 

फिल्म में ये डायलॉग एक यहूदी  (सोहराब मोदी) मज़हबी रोमन पेशवा से कह रहा है। मगर इस आवाज़ के साथ मेरी आंखों ने देखा कि 2002 के गुजरात दंगो में हिंदू उन्मादी भीड़ के हाथों टायरों के बीच जलता हुआ मुसलमान कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी तोगड़िया को आईना दिखा रहा है। 

मुज़फ़्फ़रनगर दंगों में अपनी आंखों के सामने तलवारों से हिंदू भीड़ के हाथों टुकड़े किए गए कमाऊ पूत को रोती मुसलमान मां तोगड़िया को ताना दे रही है। 

तोगड़िया की गौ माता के नाम बली चढ़े अखलाक की बेवा पूछ रही है भूतपूर्व हिंदू हृदय सम्राट से बता कैसा लगता है अब..? 

ठहाका लगाते जज बीएच लोया भी चुप न रह सके और बोले - ओ...हो.. हमारे मरने पर आनंद मनाते हो और अपनी मौत के ख़्याल से इतना भय कि गरजने से मिमियाने पर उतर आते हो..! 

यहूदी की बेटी को उबलते तेल के कढ़ाव में डलवाने वाला क्रूर रोमन तानाशाह जब अपनी बिछड़ी बेटी की खब़र पाने को यहूदी के सामने ‘‘ रहम करो रहम’’ गिड़गिड़ाता है तो उस रोमन की जगह तोगड़िया गिड़गिड़ाता नज़र आता है। और जवाब में जब यहूदी सीने के घावों पर हाथ रखते हुए कहता है कि – “जिसको दोहराऊं सबक ही ऐसा सिखलाया नहीं। क्यों खाऊं रहम जब तूने रहम खाया नहीं।”

तो लगा जैसे तोगड़िया के हाल पर जज लोया, अखलाक़, जुनैद, कलबुर्गी, गौरी लंकेश, पानसरे और हिंदू राष्ट्र के ढोंग की बली चढ़े हजारों इंसानों ने आसमान को चीर कर रख देने वाले ठहाके लगाए।

रोमन यहूदी को चुनौती देता है- “खौलता हुआ तेल तुम्हें अपने आगोश में लेने के लिए मचल रहा है। आवाज़ दो अपने खुदा को कि अब आकर तुम्हें इस तेल में पिघलने से बचाए।”

मुझे लगा कि जैसे राम मंदिर बनाने की रट लगाने वाले तोगड़िया को सत्ता का आका धमका रहा है। 

जवाब में फिल्म का यहूदी तो जिगर पर खेल गया। पर तोगड़िया बाबू डोल गए। और ताबड़तोड़ राम नाम के जाप में लग गए। 

व्यंंग्य स्तंभ।

तोगू बाबू ने मन की आंखों में आज के ज़माने की सबसे प्राचीन प्रचलित रामानंद सागर की रामायण के राम अरुण गोविल की चिरपरिचित मुस्कान वाली छवि बनाई। 

और देखे-सुने-सराहे राम अरुण गोविल को अपना फर्ज़ निभाने प्रकट होना पड़ा। भावविभोर तोगड़िया बोले - आह राम! मेरे प्रभु, आपने दर्शन दिए, मेरा जनम सफल हो गया। मैं अमर हो गया। अब कोई मेरा एनकाउंटर नहीं करवा सकता।  

जितना तोगू ने चाहा राम ने उतनी ही चिंता और हैरानी से पूछा - एनकाउंटर..! क्यों?

लाडले बालक की तरह भर्राए गले से तोगू बाबू ने शिकवा किया - मेरी जीवन भर की सेवा का ये सिला प्रभु? आखि़र मैंने क्या मांगा था? केवल आपका मंदिर निमार्ण। उसपर मेरे साथ ये सुलूक! क्यो प्रभु क्यों? मुझे जवाब चाहिये। 

प्रभु मैं आपको बता नहीं सकता कि.... तोगू अपनी धुन में बोले जा रहा है... बोले जा रहा है... राम ने उसे बीच में रोकते हुए कहा - ‘‘सुनो...सुनो तोगू जी, आपकी करुण पुकार पर मैं आ अवश्य गया हूं पर आप किसी भ्रम में न रहें।”

तोगू हैरान-परेशान- ‘‘इससे आपका क्या तात्पर्य प्रभु?

राम - एक बात बताओ तोगू...

तोगू - जी प्रभु पूछिये?

राम - क्या तुमने रामायण पढ़ी है?

तोगू - क्यों अपमान करते हैं भगवन। रामायण पढ़कर ही मैं बच्चे से बूढ़ा हुआ हूं। क्या आपको मेरी निष्ठा पर शक़ है प्रभु?

राम - वो बात नहीं। अच्छा बताओ मैंने बाली का वध किस प्रकार किया था?

तोगू - आपने पेड़ के पीछे छिपकर बाली पर तीर चलाया था। 

राम - एकदम सही। और ऐसा मैंने क्यों किया था?

तोगू - क्योंकि बाली को वरदान प्राप्त था कि जो भी उसके सामने जाएगा उसकी शक्ति बाली को प्राप्त हो जाएगी। 

राम - एकदम ठीक। क्या मैं बाली को सामने जाकर मार सकता था?

तोगू - अवश्य भगवन! वो तो आपकी लीला थी। लोगों को दिखाने के लिए। 

राम - ग़लत जवाब तोगू। मुझे यक़ीन है तुम्हारा पुराना मित्र और वर्तमान आका मोदू इसका एकदम सही जवाब देता। यही कारण है वो हंसता हैं। तुम रोते हो।

तोगू - मैं समझा नहीं भगवन...

राम - तोगू तुम्हारी पहली ग़लती तुम सत्ता हथियाने में नाकाम रहे। दूसरी, शासक के सीने पर चढ़कर अपनी हार की खुजली मिटाने लगे। ये सत्ता का खेल है। जिसके हाथ में सत्ता होती है। उससे प्रत्यक्ष नहीं भिड़ा जाता। 

रामायण रटने की जगह अगर समझते तो तुम्हारा ये हाल न होता। खैर! अब जब तुमने मूर्खता कर ही डाली है तो जाकर अपने सखा से सीखो कि कैसे छल-कपट से ताकतवर की छाती पर चढ़कर उसका कलेजा निकाला जाता है।

वैसे जहां तक मुझे लगता है ये तुम्हारे बस की बात नहीं। तुम चुपचाप जाकर अपनी ग़लती मानो, रहम की भीख मांगो और जान बचाओ। इस सलाह से इतर मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर पाने में असमर्थ हूं। अच्छा तो मैं जाता हूं। कल्याण भवः। और तोगू के राम अंतर्ध्यान हो गए। 

प्रभु...प्रभु...प्रभु...तोगू बाबू पुकारते रह गए। पर प्रभु ने एक न सुनी।

और आंखे खोल जब तोगू बाबू ने सत्ता के गलियारे में अपनी पद दलित अवस्था को समझा तो सखा सत्ता प्रमुख के सम्मुख नत मस्तक होकर बोले – भूल-चूक माफ! रहम मालिक रहम।

हा... हा... हा... हिंदू भाई को तुच्छ यहूदी मान उस मालिक-सखा-गुरुभाई ने क्रूर रोमन की तरह ज़ोर का ठहाका लगाया  और बोला-  “रहम... है ये वो लफ्ज जो शर्मिंदा-ए-मानी न हुआ।”

(वीना एक पत्रकार के साथ फिल्मकार भी हैं।)










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Harinder :: - 01-20-2018
Excellent