साबू-बाबू की सिफारिश- हिंदू राष्ट्र में लुटेरों को देशभक्त माना जाए

आड़ा-तिरछा , व्यंग्य, शनिवार , 23-09-2017


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वीना

लंगोटिया यार साबू और बाबू हमेशा के लिए भाईगीरी छोड़कर, इज्जत के धंधे में आना चाहते हैं। आजकल कॉमेडी फिल्म का धंधा अच्छा चल रहा है। सो दोनों बेचैन हैं किसी ऐसे आईडिया के लिए जो एकदम हट के हो। 

इन दिनों साबू और बाबू खोजी पत्रकार राना अय्यूब की 2002 के गुजरात दंगो की पोल खोलने वाली चर्चित किताब ‘‘गुजरात फ़ाइल्स,  लीपापोती का परदाफ़ाश’’ पढ़ रहे हैं।

गुजरात फाइल्स का हिंदी संस्करण।

जैसे ही दोनों पेज नंबर 154 पर पहुंचे तो जो वहां लिखा था दोनों ने एक साथ ऊंची आवाज़ में पढ़ा- अब दंगों में ज़्यादातर कौन लोग हिस्सा लेते हैं। गरीब लोग... यहां तो सारे अमीर लोग सड़कों पर थे। कुछ लोगों ने कॉल करके कहा, सर, शॉपर्स स्टाप में,  मर्सिडीज़ में लोग आकर लूट रहे हैं।

साबू-बाबू ने कुछ देर खामोश रहकर एक-दूसरे को देखा और ज़ोर से चिल्लाए - मिल गया, मिल गया, वर्ल्ड की बेस्ट कॉमेडी फिल्म बनाने का आईडिया, अपुन को मिल गया!

2002 गुजरात दंगों के दौरान डीजीपी रहे के. चक्रवर्ती ने एक स्टिंग के दौरान राना को बताया था कि दंगों में अमीर हिंदू लोग अपनी मर्सिडीज़ गाड़ियों में आकर, मॉल में मुसलमानों की दुकानों को लूट रहे थे। अब यही सच्चाई साबू-बाबू की कॉमेडी फिल्म का प्लॉट बनने वाली है।

मैं बोल रेला है बाबू, अपन ऐसा झक्कास पिक्चर बनाएगा ना कि देस-विदेस का अख्खा गुजराती और मोदी भक्त हिंदू अपन की फिल्म को सुपरहिट बना डालेगा। मोदी को अपन को वो क्या बोलते हैं कुछ भूषण-वूषण टाइप का अवार्ड,  देना इच पड़ेगा।  

वैसे बाबू गुजरात फाइल्स पढ़ के मेरा कलेजा हिलरेला।  इतना कमीनास्वार्थीअपन कभी भी नई था यार। जितना ये छोटा भाई-मोटा भाई की जोड़ी है रे! फिर भी दोनों अख्खा देश पे राज करेले बाप!!

बरोबर बोलता है तू साबू। सत्य घटना पर आधारित साबू-बाबू की कॉमेडी!”  काला तो सफेद बनेगा ही, छप्पर फाड़ के सफेद बी आएगा रे। बोले तो साबू-बाबू रातों-रात भाई से इज्ज्तदार प्रोड्यूसर- डायरेक्टर।

हास्य-व्यंग्य। फोटो : जनचौक

साबू, बोल बाबू। परेश रावल,  अनुपम खेर और अक्षय कुमार को मेन कॉमेडियन के रोल में लेगा अपन। और मेहमान कलाकार हेमामालिनी,  अमिताभ बच्चन और वो अपना सिंघम क्या नाम है उसका...हां अजय देवगन को लाएगा।

यस्स माई डियर बाबू! साबू ने बाबू को आंख मारी और बोला -‘‘क्या है कि ये सब एक्टर भी मस्त हैं और मोदी का भक्त भी मस्त हैं। एक दम करेक्ट जारेला है तू।’’

लेकिन यार ये तो बड़ा महंगा मिलेगा। और मिलेगा कि नहीं मिलेगा ये भी नहीं पता

अपन पे इसका भी जुगाड़ है रे।

क्या डुप्लीकेट?”

हां, बिल्कुल रीयल माफिक डुप्लीकेट, जो देखे धोखा खा जाए।

जैसे, चुनाव में देश खा गया!”

प्रतीकात्मक तस्वीर साभार : गूगल

हांब्रदर अब रीयल भी कहां रीयल रहा। वो क्या बोलते हैं- हां, मुखौटा, सब मुखौटा ही तो है।

मैं क्या बोलरेला है बाबू, एक आईटम सॉन्ग भी मांगता है। सोनू निगम, अभिजीत और लता ताई की आवाज़ में। अपुन के हीरो लोग सामान लूटते हुए एक-दूसरे से अपनी पंसद की चीज़ों की छीना-झपटी करते हुए नाचेंगे-गाएंगे।

सॉन्ग बोले तो कुछ ऐसा हो सकता है - हम हैं देशभक्त... लूटो-लूटो, लूटो...बाबर के वंशजों को...गजनी के वंशजों को लूटो...लूटो...लूटो...हम है देशभक्त...

वा साबू! क्या मस्त लिरिक बनाया बे!

सॉन्ग का बीच-बीच में अपने स्टार गेस्ट एंट्री मारेगा। सफेद चादर ओढ़े हुए अपन का बिग से थोड़ा स्माल बी रैप गाएगा- देशद्रोहियों का सामान लुट रहा है गुजरात में,  आओ देशभक्तों, तुम भी झपट लो जो हाथ लगे इस मॉल में।

प्रतीकात्मक तस्वीर साभार : गूगल

अगन देवगन रस्सी से लटकर बोन-चाईना का एक सैट हाथ में लिए नीचे उतरते हुए रैप गाएगा - बोलता हूं जुबा केसरी, लूट रहा हूं बोन-चाईना की शाही क्रॉकरी। मुसलमानों की कमर तोड़ने की है तैयारी, क्योंकि जुबा केसरी है हमारी...’’

मां माल-नी अपने कथक स्टाइल में-‘‘ इंसानियत का पाठ भूल जाओ, मोदी जी के गुण सब गाओ। शॉपर्स स्टाप से खाली हाथ न जाओ..!’’

और आखि़र में देश भक्ति का ये धांसू सीन -  मॉल में खाने की दुकान में एक टेबल पर रखी केक की टोकरी में से टेबल के नीचे से एक नन्हा-मुन्ना हाथ आता है और टोकरी से एक केक उठाता है। तभी बम-बम खेर उसका हाथ झट से पकड़ लेता है और केक छीन कर बच्चे को टेबल के नीचे से बाहर खींचता है। क्या कर रहा है बे? बम-बम खेर बच्चे को डपट कर बोलता है।

बच्चा डरते, कांपते-रोते हुए बोलता है – अंकल बहुत भूख लगी है, कल से कुछ नहीं खाया।’’ खेर - ‘‘तेरी अम्मी कहां हैं?  ’’बच्चा ज़ोर-ज़ोर से रोते हुए बोलता है -‘‘एक अंकल ने मेरी अम्मी को तलवार से काट दिया अंकल,  अब्बा पता नहीं कहां है। मैंने कल से कुछ नहीं खाया।’’ कहते-कहते बच्चा रोने लगता है।

बम-बम खेर चिढ़कर - ‘‘अबे चुप, देशद्रोही की औलाद। और फिर अपने कॉमेडी में रोने के अंदाज़ में  बोलता है - ‘‘तुम्हारे गजनी, बाबर पूवर्ज हमारे सोने की चिड़िया देश को लूट कर खा गए। आज तुम्हारे कुछ केक पेस्ट्री हमारे हाथ लगे हैं तो उसे भी तू डकार जाना चाहता है। नहीं...मैं ऐसा नहीं होने दूंगा।’’

पास खड़े हवलदार को बुलाता है - ‘‘हवलदार, इस छोटे कारतूस को ले जाकर फुस्स कर दो।’’ और ये सब जर्मन केक,  पेस्ट्री, चॉकलेट मेरी मर्सिडीज़ में रखवा दो। घर पर बेटा खाने के बाद मीठे के इंतज़ार में पागल हो रहा है। खेर टांग उठा के उछलते-कूदते  एक पेस्ट्री खाता हुआ गाता है - कटुओं की दुकान से लूटी हुई पेस्ट्री... वैरी-वैरी टेस्टी... आऊ...

और फिर फिल्म का आखि़री सीन! सब भाग-भागकर मुसलमानों की दुकान का क़ीमती सामान अपने कब्ज़े में करने में मस्त हैं कि तभी रेडियो पर तन-मन की बात शुरू होती है। सभी लुटेरे सामान नीचे रख, सावधान मुद्रा में खड़े हो जाते हैं। और फिर, भगवा फेड आउट के बाद दी एंड की जगह हम लिखेंगे – हिंदू राष्ट्र में अल्पसंख्यकों की संपत्ति लूटने वाले हिंदुओं को लुटेरा नहीं देशभक्त माना जाए। न मानने वाला देशद्रोही करार दिया जाएगा। ‘‘बंदे मातरम....हमें नहीं आती शरम...’’ 

(लेखिका वीना युवा पत्रकार और फिल्मकार हैं।)










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