सत्ता का डर छोड़कर संघर्ष में उतरने की जरूरत: जस्टिस पाटिल

नई किताब , , सोमवार , 15-04-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। जज लोया को अभी न्याय नहीं मिला है। आज आपका मुंह यह कह कर बंद करने की कोशिश की जाती है कि न्यायपालिका के निर्णयों की आलोचना नहीं कर सकते हैं, लेकिन आप जज की नहीं फैसले की आलोचना कर सकते हैं। ये कोई नई बात नहीं है सत्ता हमेशा से डराती रही है और डराती रहेगी। इसलिए सत्ता का डर छोड़ कर संघर्ष में उतरो। ये विचार बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बीजी कोलसे पाटिल के हैं। वह दिल्ली प्रेस क्लब में “सत्ता की सूली” पुस्तक के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। “सत्ता की सूली” को वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र मिश्र, प्रदीप सिंह और उपेंद्र चौधरी ने लिखा है। पुस्तक में जज लोया के साथ ही उन संदिग्ध मौतों की भी चर्चा की गयी है, जिसके कारण जज लोया की नागपुर में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत होती है।जस्टिस पाटिल ने कहा कि लोग अपने को अमेरिका और इग्लैंड रिटर्न कहते हैं मैं अपने को जेल रिटर्न कहता हूं। सरकार बहुत करेगी 15 दिन जेल में डाल देगी। इससे ज्यादा कुछ नहीं होगा। इसलिए जनता के हित में संघर्ष करते रहिए, कभी न कभी सफलता मिलेगी। 

इस पूरे प्रकरण में पीड़ित और गवाह नागपुर से आये एडवोकेट सतीश यूके ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट में जज लोया की मौत से जुड़े रिकॉर्ड को एक-एक करके जमा कराया जा रहा था। तभी मुझे संदेह हुआ। और हमने जज लोया की मौत से जुड़े ढेर सारे दस्तावेजों को बचा लिया। क्योंकि मुझे पता था कि इस केस का क्या हस्र होने वाला है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि जज लोया मामले से जुड़े होने के कारण महाराष्ट्र सरकार ने उनको बहुत परेशान किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस के भाई ने धमकी दी, प्रशासन ने परेशान किया। उन पर जानलेवा हमले हुए। उन्होंने कहा कि जज लोया को अभी न्याय नहीं मिला है।

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने इस अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह किताब उन तमाम कड़ियों को जोड़ती है जिसमें एक हत्या के बाद दूसरी हत्या और एक मौत के बाद दूसरी मौत होती चली जाती है।

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने कहा कि आज मीडिया में फॉलोअप स्टोरी नहीं हो रही है। जज लोया से जुड़ी स्टोरी को जब कारवां पत्रिका ने प्रकाशित किया तो पूरे देश में हलचल मचा। उसके बाद एक बड़े अखबार ने इस स्टोरी को दबाने के लिए स्टोरी की। 

पूर्व आईपीएस विकास नारायण राय ने क्रिमिनल प्रोसीजर में कमियों और राज्य के नजरिए में कमी को केन्द्र में रख कर बताने की कोशिश की कि कैसे अपराधी छूट जाते हैं। इस मामले में उन्होंने पूरी प्रणाली पर फिर से विचार करने की जरूरत पर बल दिया।

सीपीआई-एमएल की पोलित ब्यूरो सदस्य कविता कृष्णन ने लोया मामले की शुरूआत का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे जब आप किसी पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाते हैं तो सत्ता से जुड़े लोग आपकी आवाज को दबाने के लिए आपको बदनाम करने लगते हैं। 

विमोचन कार्यक्रम में कई वरिष्ठ पत्रकार मौजूद थे। इनमें कमर आगा, आनंद स्वरूप वर्मा, प्रशांत टंडन, कुर्बान अली, पंकज विष्ट, राजेश कुमार, पंकज श्रीवास्तव, रामशिरोमणि शुक्ल कहानीकार और पत्रकार राम जन्म पाठक शामिल थे। साथ ही समाज के दूसरे हिस्सों के लोग भी मौजूद थे। इसमें राजेंद्र प्रथोली, पुरुषोत्तम शर्मा, गिरिजा पाठक, भूपेंद्र सिंह रावत, अंबरीश कुमार, दीपक कुमार सिंह चौहान आदि शामिल थे। इसके अलावा कार्यक्रम में बड़ी तादाद में छात्रों ने भी शिरकत की। कार्यक्रम का संचालन जनचौक से संबद्ध और न्यूज क्लिक में कार्यरत पत्रकार मुकुल सरल ने किया।    








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