हर घर से शंभु निकलेगा...

आड़ा-तिरछा , , बुधवार , 17-01-2018


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मदन कोथुनियां

राजस्थान के बिसाऊ, चैमू से लेकर राजसमंद तक, एक के बाद एक हिन्दू-मुस्लिम करने की भरपूर कोशिश की थी, लेकिन राजस्थान के सजग नागरिकों, लोकतंत्र के प्रहरियों ने केसरिया गमछे व दोमुंहे झंडे वालों को करारा जवाब दिया था। जब राजसमंद से एक वहशी दरिंदे की करतूत सामने आई तो यह बहुत ही खतरनाक हालात थे। उससे भी बड़ा डरावना मंजर यह था कि उसके समर्थन में हिंदुत्व की भांग पिए हुए बच्चे तो बच्चे बूढ़े भी सड़कों पर निकल पड़े और नारा लगा रहे थे कि ‘‘हर घर से शंभु निकलेगा!’’

जिन लोगों ने राजसमंद न्यायालय में से तिरंगा उखाड़कर शंभु के समर्थन में भगवा ध्वज पहराया था उन लोगों से कहना चाहता हूं कि तुम भी शंभु ही हो बस, फर्क इतना ही है कि शंभु का राज खुल गया और तुम्हारा खुलना बाकी है। 

जो लोग सोशल मीडिया में शंभु के समर्थन में नारे लगा रहे थे उनको कहना चाहता हूं कि अब मौका है आप अपने घरों से शंभु को निकालिए ताकि भगवे ध्वज तले तुम्हारा अपराध शायद कुछ दिनों के लिए हवा हवाई हो जाये। 

शंभूनाथ के दिमाग मे जहर भरकर निर्दोषों की हत्या भी एक अदृश्य ताकत करवाती है व अपना उल्लू सीधा करने के बाद शंभूनाथ का इलाज भी यह अदृश्य ताकत ही करती है। उपयोगिता का सिद्धांत इसी अदृश्य ताकत के लिए बनाया गया है जो अपनी कुर्सी व अपनी श्रेष्ठता बनाये रखने के लिए विभिन्न संगठनों के माध्यम से विभिन्न रूपों में गरीबों, किसान-मजदूरों का उपयोग करती है।

मैं अदृश्य इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि नफरत का जहर धकेलने वाले हमालियों को पता ही नहीं होता है कि माल कहां से आया व आगे इसके परिणाम क्या होंगे। बस हमाली बनकर ठेले जा रहे है।

आज प्रवीण तोगड़िया को रोते देख उसके जहरीले भाषण एक-एक करके मेरे कानों में गूंजने लगे। गुजरात के विकास में प्रवीण तोगड़िया का अंतिम योगदान 2002 में दिखा था, उसके बाद यह टेंडर अन्यत्र शिफ्ट हो गया था। फिर 12-13 साल बाद प्रवीण तोगड़िया को अपना समाज याद आता है।

इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि पटेल आंदोलन के समय प्रवीण तोगड़िया भी एक अदृश्य ताकत थे। सुनने में आ रहा है कि गुजरात चुनावों में तोगड़िया मूकदर्शक बनकर मजे ले रहा था। उपयोगिता का सिद्धांत उस पर भी लागू हो सकता है!देशभर में नफरत फैलाकर इन भगवाईयों की जड़ें मजबूत की थी, लेकिन जब इनके लिए दिक्कत बनने लगा होगा तो एक तीर से दो निशान साधने की कोशिश हुई होगी। गुजरात के तत्कालीन सीएम व प्रवीण तोगड़िया के बीच सबकुछ ठीकठाक नहीं था। 

संघ फासिज्म के बुनियादी सिद्धांत से ही चलता है। हिटलर को जब सत्ता मिली थी तो सबसे पहले सत्ता दिलाने में मददगार बने अपने लोगों को निपटाया था। तानाशाही की मूल प्रवृति यही होती है कि मतभेद होते ही या रोड़ा बनते ही तुरंत निपटा दिया जाए व उसका उपयोग भी अपने लिए कर लिया जाए।

ये लोग ही शंभु व तोगड़िया को तैयार करते है व उपयोग करके निपटा देते है। अदृश्य शंभु व तोगड़िया लाखों की तादाद में तैयार हो चुके है बस इनकी उपयोगिता बाकी रह गई है। शंभु प्रेमी गैंग को शुभकामना व अग्रिम बधाई कि आपका नारा फले-फूले और आपके हर घर से शंभु निकले ताकि अपनी बहनों की अस्मत लूटने के बाद अपना अपराध छुपाने के लिए दूसरों के हाथों में दो-मुंहा झंडा व गले मे केसरिया गमच्छा डालकर आपके इन संस्कारों को, आपकी नफरत की संस्कृति को अगली पीढ़ी को स्थानांतरित कर सके। हिंदुत्व के हीरो को मेरा भी सलाम कि कम से कम नंगई सड़कों पर तो आई। हमे भी पता तो चला कि तथाकथित हिंदुत्व के रखवाले संघ का असली हिंदुत्व है क्या। 

 










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