तीन तलाक मसले पर मुस्लिम संगठनों ने उठाया बीजेपी की मंशा पर सवाल

धर्म-समाज , अहमदाबाद, बुधवार , 03-01-2018


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक के फैसले को मुसलमानों ने कुबूल किया था और पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट की भावनाओं का सम्मान करते हुए इसे लागू करने का वायदा भी किया था। अदालती फैसले को मुस्लिम महिलाओं के हक में माना गया था। परन्तु बीजेपी सरकार ने जिस उत्साह से बिल को लोक सभा में पेश किया बिल उसके उलट निकला। भारतीय महिला आन्दोलन से जुड़ी महिलाएं जो सख्त कानून की वकालत कर रही थीं सरकार के इस बिल से सहमत नहीं हैं। उन्हें लगता है यह बिल मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में न होकर बीजेपी और एमआईएम जैसी पार्टियों के लिए एक बड़ा राजनैतिक हथियार साबित हो रहा है। सेक्युलर पार्टियाँ भी इस बिल को न तो निगल पा रही हैं न ही उगल पा रही हैं। कुछ लोग इसे घर तोड़ने और मुस्लिम महिलाओं को सड़क पर लाने वाले बिल के तौर पर देख रहे हैं। असदुद्दीन ओवैसी ने बिल का विरोध करते हुए मुस्लिम महिअलाओं के लिए सरकार से 7% आरक्षण की मांग भी कर डाली है। एक बड़ा तबका इस बिल के द्वारा लोकसभा चुनाव से पहले ध्रुवीकरण का षड्यंत्र देख रहा है।

लोकसभा से तिलाकुल बिदत ( ट्रिपल तलाक ) पास हो जाने के बाद पूरे देश के मुसलमानों के सामने ही नहीं बल्कि सभी सेक्युलर राजनैतिक दलों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है एक तरफ मुसलमानों में ट्रिपल तलाक कानून को लेकर गुस्सा है तो सेक्युलर राजनैतिक दलों के सामने ये असमंजस है कि मुसलमानों का भरोसा बनाए रखने के साथ कैसे इस फांस से निकला जाए। ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी शाहबानो के केस पर आये फैसले के बाद कानून बनाने को गलती मान रही हो और उस गलती को सुधारते हुए ट्रिपल तलाक पर आए कानून को लोकसभा में समर्थन कर दिया है। कांग्रेस सहित अन्य सेक्युलर दलों ने इस बिल को समर्थन देकर अपनी छवि बदलने की कोशिश की है तो असदुद्दीन ओवैसी द्वारा विरोध किये जाने के बाद अन्य मुस्लिम नेताओं पर मुस्लिम समाज के बजाय पार्टी के वफादार होने का इल्जाम लग रहा है। इस बिल और मुस्लिम महिला हित को समझने के लिए पैगम्बरे इस्लाम के ज़माने की तलाक़ पद्धति, इमाम शाफई और इमाम अबू हनीफा की शिक्षा को समझना पड़ेगा। इमाम शाफई को मानने वाले एक बार में तीन तलाक को बिदत (इस्लाम में मिलावट) मानते हैं इनके मानने वाले अरब देशों में अधिक हैं।

भारत में अहले हदीश मसलक इन्हीं को मानता है। जबकि इमाम अबू हनीफा अर्थात हनफ़ी मसलक एक बार तीन तलाक को सही ठहराता है। भारत में इसी मसलक को मानने वाले अधिक हैं। बरेलवी और देवबंदी दोनों ही हनफ़ी मसलक को मानते हैं। जिस कारण से भारत और पाकिस्तान में हमेशा से तीन तलाक को समर्थन मिलता रहा है। मुसलमानों का कहना है सरकार बिना किसी मुस्लिम स्कॉलर या जानकार से मशवरा किये बिल लाई है जो मात्र राजनैतिक ध्रुवीकरण के उद्देश्य से लाया गया है। इस बिल में मुस्लिम महिलाओं के हित का भी ख्याल नहीं रखा गया है सरकार का तरीका सीधे-सीधे शरीअत में दखल है इसी कारण से मुसलमानों का बड़ा तबका बिल के विरोध में खड़ा दिख रहा है।

ट्रिपल तलाक बिल को लेकर पूरे देश के मुसलमान गुस्से में हैं लोकसभा में मात्र असदुद्दीन ओवैसी द्वारा बहस और विरोध किये जाने पर मुस्लिम नौजवानों में अन्य मुस्लिम नेताओं के खिलाफ गुस्सा देखा जा रहा है। लोकसभा से बिल पास होने के बाद अहमदाबाद के रखियाल में “हमारी आवाज़ हमारा अधिकार” नाम से कुछ नौजवानों ने सम्मलेन रखा जिसमें राज्य भर से मुस्लिम नौजवानों ने हिस्सा लिया। राज्य के अलग-अलग जिलों से आये लोगों ने मोदी सरकार पर मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल और मुसलमानों की आवाज़ को दबाने का आरोप लगाया। सभी ने एक आवाज़ में ट्रिपल तलाक कानून का विरोध करते हुए कांग्रेस तथा अन्य सेक्युलर दलों द्वारा बिल के समर्थन की निंदा की और ट्रिपल तलाक बिल राज्य सभा में न पास हो इसकी भी अपील की। प्रोग्राम के आयोजक सुफियान राजपूत और महताब कुरैशी ने बिल न रोके जाने तक आन्दोलन जारी रखने की चेतावनी दी। जमाते इस्लामी हिन्द के सेक्रेटरी वासिफ हुसैन ने बिल को मजाक बताते हुए कहा जिसके लिये कानून बनाया जा रहा है उनसे ही नहीं पूछा गया। जबकि पर्सनल लॉ बोर्ड इसी काम के लिए बनाया गया है। मोदी सरकार ने न तो बोर्ड न ही किसी मुस्लिम संग्ठन को भरोसा में लिया गया है। इस कानून से घर टूटेंगे कानून का दुरूपयोग होगा। इंसाफ टीम के कलीम सिद्दीकी ने इसे इस्लाम को बदनाम करने की एक साजिश बताते हुए कहा कि सेक्युलर जमातें शरीअत की रक्षा करने का लड्डू देकर वोट तो ले लेती हैं। परन्तु शरीअत की हिफाजत के समय लोकसभा में मौलाना असरारुल हक़ को भी इस बिल पर न बोलने का निर्देश दे देती हैं। और लोकसभा में तीन तलाक बिल को समर्थन भी दे देती हैं।
रविवार को आल इंडिया मिल्ली काउंसिल, गुजरात यूनिट ने भी एक मीटिंग कर इस बिल निन्दा की है। इस मौके पर पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और वरिष्ठ वकील ताहिर हाकिम ने बताया कि इस बिल को लेकर बहुत से झूठ और भ्रम फैलाये जा रहे हैं। उन्होंने हदीस के हवाले से बताया कि पैगम्बर मोहम्मद के ज़माने से लेकर अबू बकर सिद्दीक रजी. और उम्र फारूक रजी. के ज़माने (प्रारंभिक 2 वर्ष) तक एक बार में तीन तलाक को एक ही माना जाता था। लेकिन उन्होंने सज़ा के तौर पर एक साथ तीन तलाक बोलने पर तलाक हो जायेगा कर दिया था। हनफ़ी मसलक जिसको भारत और पाकिस्तान में अधिक मानने वाले हैं साफई मसलक में तीन बार कहे गए तलाक को एक ही माना जाता है।

इसीलिए सऊदी अरब सहित कई देशों में एक बार में तलाक को अवैध माना जाता है। पाकिस्तान में तलाक के लिए आरबिटरेरी काउंसिल को नोटिस दिया जाता है लेकिन पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने इसे मेनडेटरी नहीं बल्कि डायरेक्टरी कहा है। वहां एक बार में तीन तलाक कहने पर तलाक हो जाता है। ट्यूनेशिया और तुर्की में तलाक कोर्ट के माध्यम से होता है जो बिल लोकसभा से पास हुआ है ऐसा कानून किसी देश में नहीं है। एक बार में तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट ने इनवैलिड करार दे दिया है जिसका अर्थ है तलाक हुआ ही नहीं। तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अस्तित्व में ही नहीं है। दूसरी तरफ कानून में उसी की सजा तीन साल क़ैद कर दी है जो लीगल लॉजिक से परे है। नया कानून नॉन बेलेबल और संज्ञेय अपराध है जिसका दुरूपयोग होने की पूरी आशंका है। ताहिर हकीम ने आगे बताया कि सेक्शन 21, 22 में भत्ते का प्रावधान है। जब पति जेल चला जायेगा तो भत्ता कैसे देगा। मिल्ली काउंसिल के प्रदेश प्रमुख मुफ़्ती रिजवान तरपुरी ने कहा मिल्ली काउंसिल आल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ खड़ी है। जिस प्रकार से कानून लाया गया है उससे लगता है सरकार मुस्लिम उलेमाओं को कमतर दिखाने की कोशिश कर रही है। कानून लाने से पहले धार्मिक संगठन ही नहीं सेक्युलर संगठनों को भी भरोसे में नहीं लिया गया। मिल्ली काउंसिल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कांग्रेस द्वारा बिल के समर्थन की निंदा करते हुए कांग्रेस बीजेपी को वैचारिक तौर पर एक बताया उन्होंने इन दोनों दलों भाईयों का मिलाप बताया।

मुसलमानों को भी आशा नहीं थी कि कांग्रेस जैसी पार्टी भी इस बिल को समर्थन दे देगी। जिस कारण कांग्रेस को लेकर मुसलमानों में अविश्वास पैदा हो रहा है। राज्य सभा में बीजेपी को बहुमत नहीं है। बिल को पास करने के लिए बीजेपी को विपक्ष के समर्थन की आवश्यकता पड़ेगी। लोकसभा में मात्र असदुद्दीन ओवैसी तथा एक अन्य द्वारा बिल के विरोध में वोट देने के बाद मुसलमान चौकन्ने दिख रहे हैं। देश भर से विपक्षी दलों पर दबाव बनाया जा रहा है। अहमदाबाद के कई मुस्लिम संगठनों ने गुजरात प्रदेश प्रमुख भरत सोलंकी से मिलकर उनसे गुहार लगायी है कि राज्य सभा में बिल पास न हो इसके लिए कांग्रेस अन्य सेक्युलर दलों के साथ मिलकर प्रयत्न करे। जमाते इस्लामी हिंद के सचिव वासिफ हुसैन ने आवेदन पढ़ कर सुनाया जमीअत उलेमा हिन्द की जानिब से मुफ़्ती अब्दुल कय्यूम और जमाते इस्लामी की तरफ से शकील राजपूत ने राज्यसभा में बिल का विरोधकर मुसलमानों का भरोसा बनाये रखने की अपील की। प्रतिनिधिमंडल में 30 से अधिक महिलाएं भी शामिल थीं।
अधिकतर राजनैतिक दलों ने सरकार को सुझाव दिया है कि सरकार पीड़ित महिला और उसके बच्चे का भी ध्यान रखते हुए भत्ते का प्रावधान लाये। लेकिन सरकार भत्ता देने या सरकारी कोई मदद देने के बजाय पति को जेल से ही भत्ता देने का प्रावधान लाकर बीजेपी सरकार ने अपनी नियत साफ़ कर दी है। पूरे बिल पर पुनर्विचार कर फिर से इस्लामिक स्कॉलर के साथ-साथ जेएनयू  और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के स्कालरों से चर्चा कर एक बेहतर बिल लाया जा सकता है। परन्तु बीजेपी की मंशा अलग होने के कारण बिल पर मात्र विवाद हो रहा है।










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A A HUSENI :: - 01-07-2018
Marriage in islam is contract like civil law and either or party has right to cancel it,by way of Quran ,,but intention and niyyat are very important, ,if niyyat is there no one can stop.

Musharraf Rajput :: - 01-03-2018
Bahut khoob