सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भला बीजेपी को कैसा श्रेय?

बेबाक , नजरिया, बुधवार , 23-08-2017


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हिमांशु कुमार

ट्रिपल तलाक़ पर फैसला नहीं आया है,

इंस्टेंट तलाक़ पर फैसला है,

यानी अभी भी मुसलमान मर्द तीन महीने में तलाक़ दे सकते हैं,

और औरतें भी खुला ले सकती हैं,

ये आदमी और औरत की बराबरी का हक़ है कि अग़र शादी का रिश्ता निभाने में कोई मुश्किल हो तो घुट-घुट कर मरने की बजाय तलाक़ या खुला ले लिया जाना ठीक है,

मुसलमानों के इस अधिकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने कोई फैसला नहीं दिया है,

एक ही बार में तीन बार तलाक़ बोल कर बीबी को छोड़ देने के बारे में फैसला आया है,

एक ही साथ तीन बार तलाक बोल कर पत्नी को छोड़ देना इस्लाम में भी नहीं लिखा है,

इसके खिलाफ सन 2002 में भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है,

दुनिया के बीस मुस्लिम देशों में एक ही साथ तीन तलाक़ बोल कर पत्नी को छोड़ देना गैर कानूनी माना गया है,

पाकिस्तान में भी इस पर पाबंदी है,

इसलिए आज का सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुसलमानों को कोई बड़ा झटका देने वाला नहीं है,

अलबत्ता सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर भाजपा के नेता और भक्त जिस तरह से पागल होकर नाच रहे हैं उस पर मुझे कुछ कहना है,

यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला है इसलिए इसमें भाजपा सरकार को कोई श्रेय देने का कोई कानूनी तर्क ही नहीं है,

भाजपाई बेवजह नाच रहे हैं,

इस फैसले के आधार पर ऐसी हवा बनाई जा रही है मानो अब यह तय ही हो गया है कि मुसलमान खराब और हिन्दू बहुत बढ़िया होते हैं,

इस तरह की हवा बनाए जाने का भाजपा को कोई अधिकार ही नहीं है,

जिन हिन्दुओं में सती प्रथा हो,

जहां दहेज़ के लिए बहुओं को जलाया जाता हो,

जहाँ बेटियों को पेट में मार डाला जाता हो,

उस धर्म के लोग औरतों को अधिकार देने के मामले में खुद को मुसलमानों से बेहतर समझें,

इससे बड़ी बेवकूफी क्या हो सकती है ?

पागलपन्थी बंद करो अपने भीतर बुराइयां खोजो,

उसी में तुम्हारा फायदा है,

याद रखो,

बुरा जो देखन मैं चला बुरा ना मिलया कोय 
जो दिल खोजा आपना मुझ से बुरा ना कोय

(लेखक प्रसिद्ध गांधीवादी कार्यकर्ता हैं और आजकल हिमाचल प्रदेश में रह रहे हैं।)

                                                                                  (फेसबुक से साभार)










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