किताब पर प्रतिबंध : चली है रस्म कि कोई न सर उठा के चले

विवाद , ‘आदिवासी विल नॉट डांस’, सोमवार , 14-08-2017


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जनचौक स्टाफ

झारखंड सरकार ने संथाली महिलाओं के अश्लील चित्रण का आरोप लगाते हुए हंसदा सोवेन्द्र शेखर की किताब आदिवासी विल नॉट डांसपर बैन लगा दिया है। मध्यप्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) और जनवादी लेखक संघ (जलेस) ने एक संयुक्त बयान जारी सरकार के इस कदम की निंदा करते हुए इसे असंवैधानिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है और किताब से तत्काल प्रतिबंध हटाने की मांग की है।

‘आदिवासी विल नॉट डांस’ के लेखक हंसदा सोवेन्द्र शेखर। साभार

प्रलेस, जलेस का बयान

दोनों लेखक संगठनों, प्रलेस अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा और जलेस अध्यक्ष राजेश जोशी की ओर से जारी किया गया संयुक्त बयान इस प्रकार है:- 

 

"निसार मैं तेरी गलियों के ऐ वतन 

चली है रस्म कि कोई न सर उठा के चले"

झारखंड सरकार ने अंग्रेजी के कथाकार हंसदा सोवेन्द्र शेखर के कहानी संग्रह " आदिवासी विल नॉट डांस " को अपने एक आदेश से प्रतिबंधित कर दिया है। 
तानाशाही की अपनी सनक में किसी भी सरकारी तंत्र के माध्यम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को छीनने की ऐसी कोई भी कोशिश असंवैधानिक है। और इसीलिए यह निंदनीय और असहनीय भी है। 
अपने राजनैतिक तुष्टिकरण के लिए हमारे देश की सरकारें पहले भी ऐसे कदम उठाती रही हैं। तमिलनाडु में ठीक ऐसा ही उदाहरण अभी पिछले ही दिनों में घटित हुआ है। लेकिन हर बार इसी देश की न्यायपालिका ने ऐसे प्रतिबंधों को उलट भी दिया है। हमें विश्वास है कि लेखकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में हमारी न्यायपालिका हमेशा खड़ी रहेगी। 
लेकिन यह बात बेहद कष्टकर है कि हमारे देश में न्यायपालिका के सुस्थापित निर्णयों के बावजूद  लेखकों को अब आये दिन अपनी सुपरिभाषित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए न्यायिक संघर्ष भी करना पड़ रहा है। 
हम झारखंड सरकार के द्वारा किसी भी किताब को अपने राजनैतिक हितसाधन के लिए प्रतिबंधित किये जाने की घोर निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि वह प्रतिबंध के इस आदेश को तत्काल निरस्त करे । हम, इस  महादेश की सभी भाषाओं के सभी लेखक, अपनी अभिव्यक्ति की  स्वतंत्रता को बरकरार रखने के लिए हर तरह के जायज प्रतिरोध और संघर्ष का उद्घोष करते हुए फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की इन पंक्तियों को पूरी आस्था के साथ दोहराते हैं :-

 

"यूं ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़
न उनकी रस्म नई है, न अपनी रीत नई
यूं ही हमेशा खिलाये हैं हमने आग के फूल
न उनकी हार नई है, न अपनी जीत नई" 

 

क्यों लगाया प्रतिबंध? 

झारखंड सरकार को डॉ. हंसदा की किताब आदिवासी विल नॉट डांसकी एक कहानी पर आपत्ति है जिसमें एक ऐसी संथाल महिला की कहानी है जिसे अपना शरीर बेचना पड़ता है। आपको बता दें कि जिस किताब को बैन किया गया है उसके लिए लेखक को 2015 का साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार मिल चुका है।

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास के ट्विट का स्क्रीन शॉट।

ये मुद्दा शुक्रवार, 11 अगस्त को राज्य की विधानसभा में उठा और शाम तक मुख्यमंत्री रघुबर दास ने इसकी सभी प्रतियों को जब्त करने और लेखक पर कार्रवाई करने का आदेश दे दिया।










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