5 महिलाएं और एक आंदोलन जिन्होंने बदल दी तलाक़ की सूरत

विशेष , इंसाफ की लड़ाई, बुधवार , 23-08-2017


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जनचौक स्टाफ

आइए उन जुझारू महिलाओं से मिलते हैं जिन्होंने तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ अदालत में पूरी लड़ाई लड़ी। आपको मालूम ही है कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 22 अगस्त को मुस्लिम समाज में व्याप्त एक बार में तीन तलाक़ को अवैध करार देते हुए केंद्र सरकार को इसके लिए संसद में कानून बनाने का आदेश दिया है। इस लड़ाई को इस मकाम पर पहुंचाने में देश के अलग-अलग हिस्सों की 5 महिलाओं का बड़ा योगदान है। ये महिलाएं हैं सायरा बानो, आफ़रीन रहमान, अतिया साबरी, गुलशन परवीन और इशरत जहां। इनके साथ भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने भी तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी। आइए जानते हैं कौन हैं ये महिलाएं और इनके साथ क्या हुआ। 

सायरा बानो, काशीपुर। फोटो साभार

सायरा बानो
उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली सायरा बानो ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर तीन तलाक़ और हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। साथ ही, उनकी याचिका में मुस्लिमों में प्रचलित बहुविवाह प्रथा को भी गलत बताते हुए उसे खत्म करने की मांग की गई थी। अर्जी में सायरा ने कहा था कि तीन तलाक संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। सायरा बानो की 2001 में रिज़वान अहमद से शादी हुई थी। सायरा कुमायूं यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र में एमए है जबकि उनका पति रिज़वान कुल हाईस्कूल पास है। सायरा बताती हैं  कि कम दहेज के लिए शुरू से ही ताने मिलने लगे थे। पहला बच्चा लड़का हुआ तब तक तो ठीक रहा लेकिन दूसरी बार में बेटी होते ही पति का रवैया बदलने लगा। इसके बाद सात बार उसने सायरा का गर्भपात कराया। और फिर पिता को बुलाकर मायके भेज दिया। मायके में ही 10 अक्टूबर 2015 को उन्हें डाक से तलाकनामा मिला। सायरा के दोनों बच्चे एक बेटा और एक बेटी उनके साथ ही रहते हैं। दोनों स्कूल जाते हैं। सायरा कहती हैं कि बताइए दोनों का खर्चा कैसे उठाऊं। मुझे  लगता है कि मेरे मूल अधिकार का हनन हुआ है। सायरा के सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर करने के बाद ही चार अन्य महिलाएं आफ़रीन, अतिया, इशरत और परवीन सामने आईं और सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने भी अर्जी दाखिल की। 

आफ़रीन रहमान, जोधपुर। फोटो साभार

आफ़रीन रहमान

जोधपुर की 25 वर्षीय आफ़रीन रहमान ने भी तीन तलाक़ के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 2014 में उनकी शादी इंदौर में रहने वाले सैयद अशार अली वारसी के साथ जयपुर में हुई। उन्होंने बताया था कि उनके पति ने स्पीड पोस्ट के जरिए तलाक़ दिया है आफ़रीन का यह भी कहना था कि उनके पति समेत ससुराल पक्ष के अन्य लोगों ने मिलकर दहेज की मांग को लेकर उनके साथ मारपीट की और फिर घर से निकाल दिया। वह 2 अक्टूबर 2015 को अपनी मां के साथ जोधपुर जा रही थीं तभी दुर्घटना में उनकी मां की मौत हो गई। बाद में उनके भाई की मौत हो गई। इसी बीच उनके पति ने 27 जनवरी 2016 में स्पीड पोस्ट से उन्हें तलाक़नामा भेज दिया।

अतिया साबरी, सहारनपुर। फोटो साभार

अतिया साबरी

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की आतिया साबरी के पति ने कागज़ पर तीन तलाक़ लिखकर उनसे अपना रिश्ता तोड़ लिया था। उनकी शादी 2012 में हुई थी। उनकी दो बेटियां हैं। अतिया का कहना था कि लगातार दो बेटियां होने से नाराज उनके पति और ससुर उन्हें घर से निकालना चाहते थे। उन्हें दहेज के लिए भी परेशान किया जाता था। 

गुलशन परवीन, रामपुर। फोटो साभार

गुलशन परवीन

उत्तर प्रदेश के ही रामपुर में रहने वाली गुलशन परवीन को उनके पति ने 10 रुपये के स्टांप पेपर पर तलाक़नामा भेज दिया था। गुलशन की 2013 में शादी हुई थी और उनका दो साल का बेटा भी है। 

इशरत जहां, हावड़ा। फोटो साभार

इशरत जहां
पश्चिम बंगाल के हावड़ा की इशरत जहां ने अपनी याचिका में कहा था कि उनके पति ने दुबई से ही उन्हें फोन पर तलाक़ दे दिया। इशरत ने कोर्ट को बताया था कि उनका निकाह 2001 में हुआ था और उनके बच्चे भी हैं जिन्हें पति ने जबरन अपने पास रख लिया है। याचिका में बच्चों को वापस दिलाने और उन्हें पुलिस सुरक्षा दिलाने की भी मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि तीन तलाक़ गैरकानूनी है और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन है। 

भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन। फोटो साभार

भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन

इस मामले में एक याचिकाकर्ता भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (बीएमएमए) भी था। इस संगठन की स्थापना वर्ष 2007 में हुई थी। यह तब से मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है। समाजसेवी ज़किया सोमन और नूरजहां सफिया इसके सह-संस्थापक हैं।

 










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ABU BAKAR :: - 08-23-2017
Ultimate, thank you for brief introduction of these divorce victim women. We don't know, apart from these there will be many women who suffering from this punishable one go triple tlaaq.