त्रिपुरा में बीजेपी की अलग भारत माता

बदलाव , , सोमवार , 04-12-2017


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अखिलेश अखिल

सुदूर पूर्ववर्ती राज्य त्रिपुरा में बहुत कुछ होता दिख रहा है। उत्तर भारत की राजनीति जहां पीएम मोदी, राहुल गांधी, लालू प्रसाद, नीतीश कुमार, अखिलेश यादव और मायावती से लेकर ममता के इर्दगिर्द घूमती नजर आती है वहीँ त्रिपुरा की वाम राजनीति को जड़ से उखाड़ फेकने के लिए बीजेपी बड़े ही सधे  क़दमों से आगे बढ़ रही है। बीजेपी की कोशिश हर हाल में त्रिपुरा की सत्ता पर काबिज होने की है और लगभग दो दशक से सत्ता पर काबिज वाम राजनीति को जमींदोज करने  की है। 

इसी रणनीति के तहत सबसे पहले बीजेपी वहां के लोगों में भारत माता को नए चित्रों के जरिये प्रस्तुत कर रही है। अब तक भारत माता  को साड़ी पहने, मुकुट लगाए, हाथों में तिरंगा झंडा पकड़े ही आपने देखा होगा।  लेकिन चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा भारत माता का रूप बदलने की तैयारी में जुट गयी  है। यह बदलाव किसी और वजह से नहीं बल्कि वोटरों को भावनात्मक रूप से आकर्षित करने के मकसद से किया जा रहा है। कह सकते हैं कि बीजेपी त्रिपुरा की जनता के सामने भारत माता की अलग तस्वीर पेश करेगी और देश के अन्य भागों के लिए अलग। 

त्रिपुरा में अगले साल की शुरुआत यानी फरवरी में चुनाव होने हैं। 60 सदस्यीय विधान सभा के 2013 में हुए पिछले चुनाव में वाम मोर्चा को 49 सीटें मिली थीं। जबकि कांग्रेस के हाथ 10 सीटें आयी थीं। और बीजेपी का खाता तक नहीं खुला था। 2013 में वाममोर्चा की यह पांचवीं जीत थी। इस बीच कांग्रेस की  हालत कमजोर हुई है और बीजेपी उसे मौके का फायदा उठाना चाह रही है।  माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में कांग्रेस के कई विधायक और नेता भी बीजेपी के साथ जाने की तैयारी कर रहे हैं।  ऐसे में बीजेपी को लग रहा है कि वह अगले चुनाव में वामपंथ को यहां सत्ते से उखाड़ फेकेंगी। 

एक अंग्रेजी दैनिक  के मुताबिक बीजेपी नॉर्थ-ईस्ट के सभी आदिवासी समुदायों के लिए भारत माता के रूप को बदलने की तैयारी में है। त्रिपुरा के बीजेपी प्रभारी सुनील देवधर का कहना है, ‘इस क्षेत्र का आदिवासी समुदाय सालों से खुद को देश से अलग-थलग महसूस करता आया है, इसलिए इस सोच को खत्म करने के लिए ये कदम उठाया गया है। यहां की जनता भी भारत का हिस्सा है और भारत माता उनके लिए भी हैं। हर आदिवासी समुदाय की अपनी संस्कृति और अपनी पोशाक होती है, हम उन सभी का आदर करते हैं।’ त्रिपुरा की कुल जनसंख्या का 77.8 फीसदी हिस्सा चार प्रमुख आदिवासी समुदायों का है। देबबर्मा, त्रिपुरी / त्रिपुरा, रियांग और चाकमा ये चार आदिवासी समुदाय राज्य के प्रमुख समुदायों में गिने जाते हैं। इन चारों समुदायों को भारत माता के नए चित्रण में पेश की कोशिश की गई है। 

आपको बता दें कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही सहिष्णुता, असहिष्णुता, राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर बहस तेज हो गई थी। इसके बाद नंबर आया इतिहास बदलने का। राजस्थान की भाजपा नीत वसुंधरा सरकार ने इतिहास की किताब में काफी फेरबदल किया। इसके बाद राष्ट्रवाद, गाय, गंगा और मंदिर की राजनीति की आड़ में बीजेपी भारतीयों की भावनाओं को उकसाती रही है। हिंदुत्व के इन प्रतीक चिन्हों का देश को कितना लाभ हुआ है या फिर इसमें क्या लाभ छुपा है इस पर बहस करने की बजाये समाज की भावनाओं को जगाकर राजनीतिक स्वार्थ साधने की कोशिश जारी है। 

(अखिलेश अखिल वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)






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