नये अमरीकी चुनाव नतीजे: जनता ने कर दिया राष्ट्रपति ट्रंप की मनमानी पर लगाम का इंतजाम

देश-दुनिया , , शुक्रवार , 09-11-2018


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शेष नारायण सिंह

अमरीका में तो खेल हो गया डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अमरीकी संसद के निचले सदन में अल्पमत में गयी पिछले दो वर्षों में अमरीकी राष्ट्रपति की नौटंकी से परेशान लोग गुस्से में थे और उसी गुस्से को विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने हवा दी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मनमानी का युग ख़त्म हो गया अमरीकी सेनेट में हालांकि रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत बना रहेगा लेकिन अब राष्ट्रपति अपने अहमकाना फैसले नहीं लागू कर पायेंगें निचले सदन की हैसियत राष्ट्रपति पर लगाम लगाने की ही होती है इस बार जो लोग प्रतिनधि सभा में पंहुचे हैं, उनकी पृष्ठभूमि ऐसी है जो सही अर्थों में अमरीकी समाज की विविधता की अगुवाई करते हैं

जीतने वालों में महिलायें हैं, अल्पसंख्यक हैं, राजनीतिक नौसिखिये हैं और वे सभी ऐसे लोग हैं जो मीडिया की चहल-पहल से दूर नौजवानों में ट्रंप के प्रति बढ़ रहे गुस्से को हवा दे रहे थे। नतीजा हुआ कि प्रतिनिधि सभा में तो लिबरल ताकतें जीत सकीं जिसका इस्तेमाल ट्रंप की तानाशाही प्रवृत्तियों को रोकने के लिए किया जाएगा लेकिन अभी अमरीकी समाज में वह ज़हर ख़त्म नहीं हुआ है जिसको डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने चुनाव में बिखेरा था। ट्रंप के प्रति अमरीकी समाज के एक बड़े हिस्से में लगभग नफरत का भाव है लेकिन तथाकथित अमरीकी गौरव के चक्कर में कम पढ़े लिखे अमरीकियों की एक बहुत बड़ी आबादी अभी भी उनको वही सम्मान देती है जो किसी भी बददिमाग राष्ट्रपति को मिलता है। शायद इसी वजह से कई ऐसे लोग चुनाव हार गए जिनकी जीत में अमरीका की उदारवादी जनता की रूचि थी। डेमोक्रेटिक माइनारिटी नेता नैन्सी पेलोसी ने ट्रंप की कुछ इलाकों में लोकप्रियता के मद्दे-नज़र ही जीत के साथ-साथ यह ऐलान कर दिया कि ट्रंप पर महाभियोग चलाने की कोई योजना नहीं है।

अमरीका में सभी मानते हैं कि ट्रंप को काबू करने के लिए ज़रूरी था कि संसद में उनकी मनमानी वाले फैसलों को रोका जाये और अब उम्मीद की जानी चाहिए कि अमरीकी अवाम को एक खुली, पारदर्शी और जवाबदेह सरकार मिलेगी और ट्रंपपंथी से निजात मिलेगी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत का यह सन्देश है कि अमरीकी जनता यह चाहती है कि जो दो साल ट्रंप के बचे हैं उसमें उनकी जिद्दी सोच पर आधारित नीतियों पर रोक लगाई जा सके अभी राबर्ट स्वान मलर की जांच चल ही रही है जिसके लपेट में डोनाल्ड ट्रंप के आने की पूरी आशंका है उनकी जांच का विषय बहुत ही गंभीर है जिसमें आरोप है कि रूस की सरकार ने अमरीकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में दखलंदाजी की थी और ट्रंप की विरोधी उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को हराने के लिये काम किया था बॉब मलर कोई लल्लू पंजू इंसान नहीं हैं वे अमरीका की सबसे बड़ी जांच एजेंसी, एफबीआई के बारह साल तक निदेशक रह चुके हैं

प्रिंसटन विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं और डिप्टी अटार्नी जनरल रह चुके हैं। वे जो जांच कर रहे हैं उससे ट्रंप के प्रभावित होने की पक्की संभावना है। ट्रंप की घबराहट नतीजों के बाद हुई उनकी प्रेस कान्फरेंस में साफ़ देखी जा सकती थी। वे पत्रकारों से भिड़ गए और कहा कि वे चाहें तो राबर्ट मलर को बर्खास्त कर सकते हैं लेकिन अभी करेंगे नहीं। हालांकि उन्होंने यह साफ़ कर दिया कि वे रूस की दखलंदाजी वाली जांच को सफल नहीं होने देंगें। नतीजे आने के तुरंत बाद राष्ट्रपति के रूप में जो पहला काम डोनाल्ड ट्रंप ने किया वह यह कि उन्होंने अटार्नी जनरल जेफ़ सेशंस को हटा दिया और दावा किया कि अगर डेमोक्रेट बहुमत वाली अमरीकी संसद, कांग्रेस उनके खिलाफ कोई जांच शुरू करेगी तो उसका मुकाबला करेंगें। जेफ़ सेशंस को हटाने का कारण समझ में नहीं आया।

वे राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थक माने जाते हैं, उन्होंने रूस की दखल वाली जांच से खुद को अलग कर लिया था लेकिन नतीजे आते ही व्हाइट हाउस के चीफ आफ स्टाफ, जॉन केली ने उनको फोन करके उनका इस्तीफा मांग लिया डेमोक्रेटिक पार्टी की सदन में नेता, नैन्सी पेलोसी ने आरोप लगाया कि जेफ़ सेशंस का हटाया जाना इस बात का संकेत है कि ट्रंप रूसी दखल वाली जाँच को नाकाम करने के लिए कटिबद्ध हैं राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि सीनेट और गवर्नर पद के चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवारों की जीत में उनका ही योगदान सबसे ज़्यादा है पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने बताया कि अगर डेमोक्रेटिक पार्टी ने जांच करने की कोशिश की तो वाशिंटन में युद्ध जैसे हालात बन जायेंगें

हालांकि सचाई यह है कि सदन की समितियों की अध्यक्षता अब डेमोकेटिक पार्टी वाले ही करेंगे इन कमेटियों को ही राष्ट्रपति महोदय की कथित टैक्स चोरी की जांच करनी है इसके अलावा रूस की दखल वाली जाँच भी अब डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों की निगरानी में ही होगी अभी इसकी जांच राबर्ट मलर कर रहे हैं लेकिन राष्ट्रपति ने उनके बॉस के बॉस जेफ़ सेशंस को हटाकर यह संकेत दे दिया है कि वे जाँच को अपने खिलाफ किसी भी हालत में नहीं जाने देंगे उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वे डेमोक्रेट नेताओं से मिलकर काम करने को तैयार हैं लेकिन उनके खिलाफ जांच होने से सद्भाव की भावना को ठेस लगेगी अब अमरीकी राजनीति में सत्ता पर ट्रंप का एकाधिकार नहीं है और वे अपने को सर्वाधिकार संपन्न मानने के लिए अभिशप्त हैं ऐसी हालत में इस बात की पूरी संभावना है कि ट्रंप के कार्यकाल के अगले दो साल बहुत ही संघर्ष के दौर से गुजरने वाले हैं

इन नतीजों के बाद अब ट्रंप की मनमानी पर तो ब्रेक लग ही जायेगी। अभी जो मेक्सिको की सीमा पर वे बहुत बड़ी रक़म खर्च करके दीवाल बनाने की बात कर रहे हैं, वह तो रुक ही जायगी। इसके अलावा वे अजीबो-गरीब शर्तों पर जापान और यूरोपीय यूनियन से व्यापारिक समझौते करने की जो योजना बना रहे हैं वह भी अब संभव नहीं लगता। कांग्रेस के निचले सदन की संभावित अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने बताया कि यह नतीजे, डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी के बारे में उतना नहीं हैं जितना संविधान की रक्षा के लिए हैं। उनका आरोप है कि ट्रंप लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान नहीं करते। एक उदाहरण काफी होगा। उन्होंने अपनी रिपब्लिकन पार्टी की एक नेता का मखौल उड़ाया और कहा कि सीनेटर बारबरा वर्जीनिया से इसलिए हार गयीं क्योंकि उन्होंने ट्रंप की नीतियों का विरोध किया था। उन्होंने डींग मारी कि उनका विरोध करने वाले उनकी पार्टी के लोग ही हार गए।

ट्रंप की मनमानी का शिकार अमरीकी अर्तव्यवस्था भी हो रही थी। जब चुनाव नतीजों के बाद निचले सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी के बहुमत की खबर आयी तो शेयर बाज़ार ने उसका स्वागत किया। डाव जोन्स और एस एंड पी, दोनों ही इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत का उछाल बुधवार को ही दर्ज हो गया। अब अमरीकी शेयर बाज़ार को भरोसा है कि ट्रंप के सनकीपन के फैसलों पर विधिवत नियंत्रण स्थापित हो जाएगा। जानकार बता रहे हैं सदन में विपक्ष के बहुमत के बाद सत्ता का विकेंद्रीकरण हो गया है। आम तौर पर जब सत्ता एक ही जगह केन्द्रित नहीं रहती तो शेयर बाज़ार में माहौल अच्छा रहता है।

अमरीकी राजनीति में इस बदलाव का विदेश नीति पर भी असर पडेगा। अब सबको मालूम है कि डोनाल्ड ट्रंप की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ ख़ास दोस्ती है आरोप तो यहां तक लग चुके हैं कि डोनाल्ड ट्रंप अपने प्रापर्टी डीलरी के धंधे के दौरान, सोवियत यूनियन की जासूसी संस्था केजीबी के लिये काम करते थे। कुछ अखबारों में छपा था कि जब डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति के रूप में रूस गए थे और रूसी राष्ट्रपति से मिले थे तो दो राष्ट्रपतियों के बीच औपचारिक मुलाक़ात तो हो ही रही थी, पुराने साथियों के बीच भी मुलाक़ात थी क्योंकि अखबार के मुताबिक़ जब पुतिन केजीबी में काम करते थे तो अमरीकी असेट, डोनाल्ड ट्रंप के वे ही हैंडलर हुआ करते थे।

ज़ाहिर है कि वे रूस के साथ नरमी का दृष्टिकोण रखते हैं अमरीकी विदेशनीति पर नज़र रखने वाले उम्मीद कर रहे हैं कि रूस के साथ संबंधों में अमरीकी हितों को सर्वोपरि रखा जाएगा अब सऊदी अरब और उत्तर कोरिया के साथ भी शुद्ध राजनय के हिसाब से बातचीत की जायेगी विदेशनीति में ट्रंप का रवैया निहायत ही बचकाना रहा है मसलन उन्होंने बिना किसी कारण या औचित्य के पारंपरिक साथी कनाडा को नाराज़ कर दिया उनकी एक अजीब बात यह भी रही है कि जो देश अमरीकी हितों के मुकाबिल खड़े हैं उनसे भी दोस्ती के चक्कर में रहते हैं यहां तक कि अमरीका के घोर विरोधियों से भी हाथ मिलाने के लिए लालायित रहते हैं

इन मध्यावधि चुनावों में सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति मज़बूत हुयी है रिपबल्किन टिकट से कुछ गवर्नर भी ज़्यादा चुने गए हैं लेकिन अमरीकी राजनीति में राष्ट्रपति की मनमानी पर लगाम लगाने का काम निचला सदन ही करता है अमरीकी राजनीति का मिजाज़ ऐसा है कि अगर कोई समझदार आदमी राष्ट्रपति बन जाए तो सीनेट या प्रतिनधि सभा को साथ लेकर चलने में बहुत दिक्क़त नहीं आती बराक ओबामा ने अपनी विपक्षी पार्टी के बहुमत के बावजूद अपनी नीतियों को लागू किया ही लेकिन उनकी खासियत यह थी कि वे सब को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे जबकि राष्ट्रपति ट्रंप को मनमानी की आदत है और इस चुनाव के नतीजे डोनाल्ड ट्रंप की मनमानी से परेशान दुनिया के लिए ताज़ी हवा का एक झोंका साबित होंगे

 

(शेष नारायण सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये लेख उनके फेसबुक टाइमलाइन से साभार लिया गया है।) 










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