पीएमओ के सीधे निर्देशन में चल रहा है “आज तक”!

पड़ताल , नई दिल्ली, सोमवार , 19-02-2018


aajtak-pmo-hr-arunpuri-kali-award-journalism-fakenews

जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। देश का ब्रांडेड और नंबर एक चैनल कहे जाने वाले ‘आज तक’ में पिछले हफ्ते घटी दो घटनाओं ने लोगों को सकते में डाल दिया। पहली थी एक मौलाना की पैरोडी एकाउंट पर चैनल की एंकर अंजना ओम कश्यप का आधे घंटे का कार्यक्रम करना। और दूसरी एक निजी ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट जिसमें मीडिया में गलत तरीके से फैलाई जा रही घृणा और नफरत की निंदा की गयी थी के आधार पर ग्रुप में राजनीतिक संपादक के पद पर कार्यरत अंगशुकांता की बर्खास्तगी।

इन दोनों ही घटनाओं पर ढेर सारी प्रतिक्रियाएं आयीं। लेकिन मीडिया समूह की तरफ से न तो उस कार्यक्रम को लेकर कोई खेद जताया गया। और न ही अंगशुकांता को निकाले जाने पर किसी तरह का कोई पुनर्विचार हुआ। 

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि “तो अब मौलानाओं को बदनाम करने के लिए आज तक की प्रसिद्ध एंकर अंजना ओम कश्यप को पैरोडी (नकली) एकाउंट का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसा तब होता है जब आप इस तरह की खबर का प्रचार मुसलमानों को बदनाम करने लिए करते हैं। अब ये ‘इंडिया टुडे’ का बिल्कुल साफ पैटर्न हो गया है। ये भी ‘टाइम्स नाऊ’ के रास्ते पर चल पड़ा है।”

इसी मसले पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीधे ग्रुप के मालिक अरुण पुरी पर सवाल उठा दिया। उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा कि “लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि अरुण पुरी इसकी इजाजत क्यों दे रहे हैं? क्या वो बीजेपी के बहुत दबाव में हैं या फिर उन्होंने उसके साथ गठजोड़ कर लिया है?”

दरअसल सभी का सवाल यही है। और वो इसलिए भी है क्योंकि लोग ‘आज तक’ से इतने निचले स्तर पर जाने की उम्मीद नहीं कर रहे थे। उसके पीछे एक प्रमुख वजह खुद अरुण पुरी हैं। जिनका सार्वजनिक मंचों से लेकर सोशल मीडिया तक  तमाम सवालों पर एक तार्किक, तथ्यपरक और सेकुलर स्टैंड रहा है। लेकिन उनके चैनल में ही जब ‘जीन्यूज़’ और ‘टाइम्स नाऊ’ मार्का हरकतें होने लगीं तब लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। लोग ये नहीं समझ पा रहे हैं कि वहां ऐसा क्यों हो रहा है जहां अरुण पुरी खुद मालिक हैं। राजदीप सरदेसाई और पुण्य प्रसून वाजपेयी जैसे वरिष्ठ पत्रकार हैं जो तमाम सवालों पर मौजूदा सत्ता को भी घेरने से परहेज नहीं करते। साथ ही राहुल कंवल जैसे लोग हैं जो सार्वजनिक तौर पर अभी भी पत्रकारिता के गिरते स्तर पर चिंता जताने की हिम्मत कर रहे हैं। और उसके अंग्रेजी चैनल ‘इंडिया टुडे’ के एक्जीक्यूटिव एडिटर होने के नाते मुख्य भूमिका में हैं।

ऐसे में सवाल गहरा हो जाता है। लेकिन उसका उत्तर भी अब मिलने लगा है। पत्रकार और एंकर रोहित सरदाना के ‘जीन्यूज़’ से ‘आज तक’ जाने के साथ ही तस्वीर साफ होने लगी थी। बाद की तमाम घटनाओं ने उसे और पुख्ता कर दिया। अगर एक लाइन में कहें कि ‘आज तक’ को सीधे पीएमओ चला रहा है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। दरअसल ‘आज तक’ में मैनेजमेंट के स्तर पर दो सबसे अहम बदलाव हुए हैं। जिनकी तरफ लोगों की अभी तक निगाह नहीं गयी है। और अगर गई भी है तो लोग उसे उसके पूरे परिप्रेक्ष्य में नहीं देख पा रहे हैं।

सरकार का दबाव एक पक्ष है। ये तभी काम कर सकता है जब उसके भीतर उसको फालो करने वाले लोग हों। अब उसकी व्यवस्था हो गयी है। आज तक की एचआर हेड के पद पर इस समय पूर्वा मिश्रा काम कर रही हैं जो पीएमओ में प्रधान सचिव पद पर कार्यरत नृपेंद्र मिश्रा की बेटी हैं। इसके अलावा अब बताया जा रहा है कि मालिकान की तरफ से चैनल की कमान भी अरुण पुरी की बेटी कली पुरी संभाल रही हैं। और अरुण पुरी की भूमिका शो-पीस से ज्यादा नहीं रह गयी है। ऐसा बिल्कुल हो सकता है कि मौके की जरूरत को देखते हुए अरुण पुरी जानबूझ कर अपना हाथ पीछे खींच लिए हों। और परिवार के भीतर चैनल के ‘हित’ के लिहाज से भी इसे बेहतर समझा गया हो। 

इस बात को एक दूसरे उदाहरण से समझा जा सकता है। अभी दो दिन पहले चैनल को ईएनबीए अवार्ड मिले हैं उसकी मॉक अवॉर्ड सेरेमनी इंडिया टुडे मीडियाप्लेक्स परिसर में की गई। जिसमें उन्हीं पुरस्कारों को एक बार फिर से अरुण पुरी ने सबको बांटा। इस मौके पर कुछ ऐसी घटनाएं घटीं जिनसे चैनल के भीतर की नई हकीकत को समझने में मदद मिल सकती है। मौके पर मौजूद एक शख्स के मुताबिक इंडिया टुडे के एक्जीक्यूटिव एडिटर राहुल कंवल ने फेक न्यूज़ समेत चैनल के गिरते स्तर और पत्रकारिता से समझौता करने का सवाल उठाया। इस पर अरुण पुरी ने भी अपने भाषण में राहुल के कहे पर सहमति जताई। लेकिन जब कली पुरी की बारी आयी तो उन्होंने सीधे तो कुछ नहीं कहा। लेकिन ये कहकर कि अगले साल ‘आज तक’ की तर्ज पर वो अंग्रेजी चैनल ‘इंडिया टुडे’ के लिए भी बेस्ट चैनल का अवार्ड चाहती हैं। इशारे में ही बता दिया कि जर्नलिज्म के गिरते स्तर पर बातें मत करो अवार्ड लाओ।  

न्यूजरूम का माहौल भी लगातार बदल रहा है। वहां पूर्वा मिश्रा और कली पुरी की जोड़ी की मौजूदगी हर जगह महसूस की जा सकती है। इन दोनों के एक साथ काम करने का ही नतीजा है कि न्यूज़रूम के भीतर कुछ ऐसी घटनाएं देखने को मिलीं जिनसे आमतौर पर मीडिया परहेज करता है। मसलन बीजेपी की यूपी में जीत पर न्यूज़रूम के भीतर मिठाई बंटने का दृश्य देखा गया था जिसमें राजदीप सरदेसाई को कोई कर्मचारी मिठाई देने आता है। और फिर उसके साथ ही पूरा फ्लोर जश्न के मौहाल में डूब जाता है। सबसे खास बात ये है कि इसके खिलाफ भीतर से किसी तरह की कोई आवाज भी नहीं उठी। 

एक और घटना चैनल के 'राष्ट्रवादी' बनने और दिखने की तरफ इशारा करती है। वो है पूर्वा मिश्रा का एंकरों को तिरंगा पहनकर एंकरिंग करने का फैसला। हालांकि ये बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका। लेकिन इससे चैनल की दिशा का अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है।

अंगशुकांता को इसलिए बर्खास्त किया गया क्योंकि उन्होंने सोशल मीडिया पर जाकर सवाल उठाया था। जबकि चैनल द्वारा सोशल मीडिया संबंधी नीति का पालन करते हुए उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल में बाकायदा डिस्क्लेमर डाला था। जिसमें उन्होंने लिखा था कि ये उनके व्यक्गित विचार हैं। (हालांकि बर्खास्त होने के बाद अब उसे हटा लिया है।) लेकिन रोहित सरदाना से लेकर अंजना ओम कश्यप तक और अभिजीत मजूमदार से लेकर गौरव सावंत तक रोजाना भड़काऊ और जहर फैलाने वाले सांप्रदायिक ट्वीट और मैसेज करते रहते हैं। खास बात ये है कि इन लोगों ने कोई डिस्क्लेमर भी नहीं डाला है। फिर भी उनके खिलाफ कार्रवाई की बात तो दूर उन्हें आज तक कोई चेतावनी भी नहीं दी गयी। ऐसे में अगर उसे चैनल की पॉलिसी का हिस्सा समझ लिया जाए तो कोई गलत बात नहीं होगी। 

अंगशुकांता प्रकरण में भी ट्वीट के बाद सीधे पूर्वा मिश्रा ने ही उनसे बात की और बर्खास्तगी का फैसला सुनाया। लेकिन आज तक उन्होंने ऊपर के किसी भी शख्स को कम से कम उसके विचार के लिए कभी भी ऐसी जहमत नहीं उठायी।

इसके अलावा एक प्रकरण और हुआ था जिसमें पद्मावत के मुद्दे पर एंकर सईद अंसारी फेसबुक लाइव कर रहे थे। और उसमें स्पोर्ट्स डेस्क से जुड़ा चैनल का ही एक प्रोड्यूसर हिस्सा ले रहा था। पूरे शो के दौरान स्पोर्ट्स डेस्क का प्रोड्यूसर अपनी ही मेन डेस्क की कार्यशैली और उसके कंटेट की आलोचना करता रहा। लेकिन एचआर न तो इसे अनुशासनहीनता माना और न ही उसके खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई की।

ऐसे में अंगशुकांता के खिलाफ कार्रवाई पूरे समूह में काम करने वालों के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं है। इशारा बिल्कुल साफ है। चैनल को वही पसंद है जो सरकार को पसंद है। हालांकि इसमें चैनल का भले ‘लाभ’ हो लेकिन जिस पत्रकारिता की जमीन पर वो पैदा हुआ, पला और बढ़ा उसकी कब्र खुदनी तय है। 










Leave your comment