यौन हिंसा और नरेंद्र मोदी की ख़ामोशी

फुटपाथ , , बुधवार , 17-10-2018


akbar-modi-sexual-harassment-silence-journalist

अजय सिंह

एक बात अच्छी तरह साफ़ हो गयी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली उनकी राष्ट्रीय गठबंधन सरकार महिलाओं पर यौन हिंसा के मामले में पूरी तरह असंवेदनशील और ग़ैर-जिम्मेदार है। यौन हिंसा के गंभीर आरोपों से घिरे अपने विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर के बचाव में नरेंद्र मोदी जिस तरह से खड़े नज़र आ रहे हैं, उससे यह संदेश दूर तक चला गया है। महिलाएं इस नतीज़े पर पहुंचती दिखायी दे रही हैं कि दफ़्तरों में हमारे साथ होने वाली यौन छेड़छाड़ और अभद्र व हिंसक व्यवहार के प्रति, और हमारी सुरक्षा व गरिमा के सवाल पर, नरेंद्र मोदी की चुप्पी का मतलब ऐसी अपराधपूर्ण करतूतों को उनका समर्थन है। कई बार, और खास मौक़े पर, सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति की चुप्पी अपराध में उसकी हिस्सेदारी व समर्थन को व्यक्त करती है। ऐसी चुप्पियां, ऐसी ख़ामोशियां नरेंद्र मोदी अक्सर अख़्तियार करते रहे हैं। अगर महिलाएं यह समझती हैं कि नरेंद्र मोदी ने हमें धोखा दिया है, हमें निराश किया है, तो ग़लत नहीं।

महिलाओं पर यौन हिंसा का सवाल सिर्फ़ महिलाओं का नहीं, व्यापक लोकतांत्रिक व नागरिक समाज का सवाल है। हमारे समाज, संस्कृति व राजनीति का रेशा-रेशा महिला-द्वेषी मानसिकता के ज़हर से सराबोर है और मौक़ा मिलते ही यह मानसिकता यौन हिंसा व उत्पीड़न का रूप ले लेती है। यही नज़रिया आगे बढ़ कर मुसलमानों, दलितों, ईसाइयों, आदिवासियों व ग़रीब-वंचित तबकों पर हिंसा के लिए खाद-पानी जुटाता है। ऐसी मानसिकता व हिंसा को नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार व कई राज्यों की भाजपा सरकारें लगातार बढ़ावा व शह दे रही हैं।

इस साल के शुरू से ही कई राज्यों की भाजपा सरकारें यौन हिंसा के अपराधियों के बचाव में न सिर्फ़ सामने आयी हैं, बल्कि यौन अपराधियों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन-जुलूस भी निकालती रही हैं। लोगों को कठुआ (जम्मू-कश्मीर), उन्नाव (उत्तर प्रदेश), मुज़फ़्फ़रपुर (बिहार) व देवरिया (उत्तर प्रदेश) की घटनाएं याद होंगी। महिलाओं पर यौन हिंसा के इन सभी मामलों में नरेंद्र मोदी ख़तरनाक ढंग से ख़ामोश रहे हैं।

ऐसे में अगर एमजे अकबर के समर्थन में नरेंद्र मोदी खड़े हैं, तो ताज्जुब की कोई बात नहीं। यौन हिंसा के कई गंभीर आरोपों से घिरे एमजे अकबर को अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने या उनसे इस्तीफ़ा लेने की बजाय नरेंद्र मोदी उन्हें मानहानि का मुक़दमा लड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसके लिए सरकारी ख़ज़ाने का मुंह खोल दिया गया है।

एमजे अकबर ने अपने ऊपर यौन हिंसा का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकारों पर दिल्ली की एक अदालत में मानहानि का मुक़दमा दायर किया है। इसके लिए उन्होंने एक बड़ी कानूनी कंपनी या फ़र्म को भाड़े पर लिया है। इस कंपनी ने अकबर का मुक़दमा लड़ने के लिए 97 वकीलों की सूची अदालत को सौंपी है। जरा सोचियेः अकबर का मुकदमा लड़ने के लिए भारत सरकार ने 97 वकीलों की फ़ौज खड़ी कर दी है! यह महिला पत्रकारों को डराने-धमकाने और उन्हें ख़ामोश कर देने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है।

पिछले एक-डेढ़ हफ़्ते में अपने देश में प्रेस, फ़िल्म और मनोरंजन उद्योग से जुड़ी महिलाओं ने अपने साथ हुई यौन हिंसा की घटनाओं के ब्यौरे जारी किये हैं। यह मी टू (मैं भी यौन हिंसा का शिकार) अभियान का हिस्सा है। इस अभियान के निशान पर कई पुरुष हस्तियां व शख़्सियतें आयी हैं और वे पुरुष हम्माम में नंगे खड़े दिखायी दे रहे हैं। इस अभियान ने परदे में छुपे सच को उजागर कर दिया कि प्रेस, फ़िल्म और मनोरंजन उद्योग में महिला-द्वेषी मानसिकता और पितृसत्ता बहुत गहराई तक जड़ जमाये हुए है। 

और यौन हिंसा को स्वाभाविक व स्वीकार्य मान लिया गया है। प्रभामंडल बिखर चुका है और नंगी सच्चाइयां हमारे सामने हैं।

मी टू अभियान ने जिन पुरुष हस्तियों को बेनक़ाब किया है, उनके शीर्ष पर एमजे अकबर हैं। अकबर का मामला 1990 के दशक और बाद का है, जब अकबर अच्छे ख़ासे प्रभावशाली व ताक़तवर पत्रकार-संपादक हुआ करते थे। तब उनके साथ, अलग अलग दौर में, काम कर चुकी क़रीब 20 महिला पत्रकारों ने अब आरोप लगाया है कि उस दौरान अकबर ने हमारे साथ यौन हिंसा की थी।

इस मसले पर अकबर का साथ देकर नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने बता दिया है कि वह कहां खड़ी है। इन महिलाओं के जज्बे को सलाम, जिन्होंने साहस के साथ, सारे ख़तरे उठाते हुए, यह कड़वी सच्चाई उजागर की! यह मी टू अभियान 2015-16 के पुरस्कार वापसी अभियान की तरह लोकतांत्रिक व प्रगतिशील आंदोलन है।

(अजय सिंह कवि और राजनीतिक विश्लेषक हैं और आजकल लखनऊ में रहते हैं।)








Tagakbar modi sexualharassment silence journalist

Leave your comment











Raj Valmiki :: - 10-25-2018
Ajay Sir Midi air unkee sarkaar naa mahilaayon ke Praksh me hai aur naa Daliton, aadivasiyon aur musalmaano ke paksh me. Ek achchhe lekh ke liye aapko bahut bahut badhaaee! Raj Valmiki