बंगाल की जमीन पर बीजेपी की निगाह

राजनीति , , बुधवार , 10-01-2018


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अखिलेश अखिल

बंगाल में बीजेपी फुफकार रही है। क्लास, मार्क्स और अल्पसंख्यकों के जटिल रिश्तों वाले इस सूबे की राजनीति दूसरे राज्यों से बिल्कुल अलहदा है। कभी देश के बाकी हिस्सों से 100 साल आगे सोचने वाला सूबा आज अजीबोगरीब कशमकश में जी रहा है। समाज और राजनीति समेत हर स्तर पर यहां परिवर्तन देखा जा सकता है। यहां कभी कांग्रेस और मार्क्सवादियों के बीच लड़ाई हुआ करती थी। समय ने करवट बदला और मार्क्सवादी और टीएमसी आमने-सामने हो गए। और एक मौका ऐसा आया जब टीएमसी ने मार्क्सवादियों को धूल चटा दिया। इस कड़ी में कांग्रेस पूरी लड़ाई के मैदान से ही अलग हो गयी। और मौजूदा समय में सूबे में उसका वजूद एक टिमटिमाते दीपक से ज्यादा नहीं है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि टीएमसी ने कांग्रेस का स्थान ले लिया है। ममता के नेतृत्व में टीएमसी खूब फल-फूल रही है और सत्ता पर काबिज भी है।

इधर अश्वमेधी घोड़े पर सवार मोदी कोई सूबा छोड़ना नहीं चाहते। और अपने परंपरागत राजनीतिक दुश्मन वामपंथ से बदला लेने का इससे भला दूसरा मौका और कौन हो सकता है? लिहाजा बीजेपी ने बंगाल में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। क्योंकि उसे सूबे में बड़ा स्पेस दिख रहा है।  पिछले कुछ सालों में बीजेपी ने वहां अपनी पैठ बनायी है। उसका संगठन भी बना है और कार्यकर्ताओं का अच्छा खासा हुजूम भी तैयार हुआ है। जगह-जगह वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ है। बीजेपी को लग रहा है कि वह बंगाल में कोई चमत्कार कर सकती है। और जोर लगाने पर वो ममता को सत्ता से बेदखल भी कर सकती है। हालांकि ये अभी दूर की कौड़ी है। इस मामले में भरोसे के साथ कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि राजनीति की अपनी गति होती है। 

बीजेपी को लगता है कि ममता बनर्जी से बंगाल के हिन्दू नाराज हैं क्योंकि टीएमसी अल्पसंख्यकों को ज्यादा तरजीह दे रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि टीएमसी की राजनीति को आगे बढ़ाने में बंगाल के मुसलमानों की बड़ी भूमिका रही है और ममता बनर्जी भी कुछ मामले में मुसलमानों के प्रति ज्यादा संवेदनशील दिखी हैं। हालांकि बीजेपी की असली नजर ममता सरकार में हुए घपलों और घोटालों पर है। पिछले कुछ सालों में ममता के कई बड़े नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और उनमें से कई दागी नेता बीजेपी में भी शामिल हुए हैं। बीजेपी उन्हीं दागी नेताओं के साथ मिलकर ममता की राजनीति को रोकना चाहती है लेकिन राजनीति की बेहतर समझ रखने वाली ममता अब उन्हीं दागी नेताओं को टारगेट करके बीजेपी को घेरने में लगी हैं।  खेल अब यहीं तक का नहीं रहा। ममता अब हिन्दू वोटरों के प्रति भी पहले से ज्यादा सॉफ्ट हुयी हैं और बड़ी संख्या में क्लास वाले हिन्दू भी ममता के साथ जुड़ रहे हैं। 

 ममता शायद बीजेपी की आहट पहचानने लगी थीं और उसके पीछे के कारणों का भी उन्हें पता चल गया। यही वजह है कि उन्होंने भी अब अपनी रणनीति को बदलने की कोशिश शुरू कर दी है। और बीजेपी की बढ़त को कैसे चेक कर दिया जाए उसके लिए हर संभव प्रयास में जुट गयी हैं। तृणमूल कांग्रेस के बीरभूम जिले के अध्यक्ष अनुब्रता मंडल ने सोमवार को हिंदू पुजारियों को सम्मानित करने के लिए एक समारोह का आयोजन किया। यह आयोजन बीजेपी के उस बयान का जबाव माना जा रहा है, जिसमें वह कथित तौर पर टीएमसी को मुस्लिमों का पक्ष लेने वाली पार्टी बताती रही है। बीरभूम के टीएमसी कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि मंडल जिले और उसके आसपास के करीब 12 हजार पुजारियों को एक मंच पर साथ लेकर आए। बीरभूम जिले में बीजेपी का वोट शेयर बढ़ रहा है। 2014 के आम चुनावों में पार्टी उम्मीदवार जॉय बनर्जी को पिछले पांच वर्षों के 4.62 प्रतिशत की तुलना में 18.47 प्रतिशत वोट मिले थे। टीएमसी की इस पहल पर बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस साल होने वाले पंचायत चुनावों से पहले मंडल समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

जबकि मंडल ने कहा कि इस समारोह का बीजेपी को हालिया चुनावों में मिले फायदे से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने समारोह में कहा कि अगर उन्हें कभी हिंदुत्व का पाठ पढ़ना होगा तो वो इन पुजारियों से पढ़ेंगे। इस समारोह का ऐलान 18 दिसंबर को किया गया था। इसी दिन गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित हुए थे। उसके बाद पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने दो हिंदू मंदिरों का रुख किया था।

बता दें कि पश्चिम बंगाल के ग्रामीण और शहरी इलाकों में बीजेपी अपनी पहुंच और प्रभुत्व लगातार बढ़ाती जा रही है। हाल में हुए सबांग उपचुनाव में बीजेपी ने चौकाते हुए 37 हजार 476 वोट हासिल किये, जबकि 2016 में पार्टी को यहां पर महज 5610 वोट ही मिले थे। हालांकि यह सीट टीएमसी ने जीती और पार्टी को 1,06,179 वोट हासिल हुए। दक्षिण कांठी में भी बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा रहा था। गौर करने वाली बात यह है कि इन इलाकों में बीजेपी का संगठन नाम मात्र का है। बावजूद इसके बीजेपी का उभार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदल रही बयार को दर्शाता है। अब देखना ये होगा कि बीजेपी की राजनीति कहाँ तक आगे बढ़ पाती है और ममता उसकी बढ़त को कैसे रोक पाती हैं। 

(अखिलेश अखिल वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)






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