हवा में नहीं उड़ाया जा सकता है साक्षी महाराज का 2024 के बाद चुनाव न होने का बयान

मुद्दा , , रविवार , 24-03-2019


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चरण सिंह

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के 2019 में चुनाव जीतने के बाद 50 साल तक पार्टी के सत्ता में रहने के बयान के बाद यूपी के उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने उनसे भी आगे बढ़कर बयान दे दिया। उनका कहना है कि पहली बार हिन्दू जागा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुनामी चल रही है। 2024 के बाद देश में चुनाव नहीं होगा। आज की तारीख में भले ही इसे विपक्ष चुनावी मुद्दा बना रहा हो। मामले को गंभीरता से न लिया जा रहा हो पर देश में जिस तरह से संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। संवैधानिक संस्थाओं को बंधुआ बनाया जा रहा है। उसके आधार पर कहा जा सकता है कि देश में कुछ भी हो सकता है। वैसे भी आरएसएस इस दिशा में लम्बे समय से प्रयासरत है। अनायास नहीं आरएसएस हिन्दू राष्ट्र का राग अलापता रहता है। 

बात आजादी की लड़ाई से शुरू करते हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आरएसएस अंग्रेजों की पैरवी कर रहा था। आरएसएस के नायक विनायक दामोदार सावरकर ने क्रांतिकारियों के बारे में महारानी विक्टोरिया को एक पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने उन सभी को भटका हुआ करार दिया था जो अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ थे। 

दरअसल आरएसएस अंग्रेजों के साथ एक रणनीति के तहत लगा हुआ था। आरएसएस का मानना रहा है कि  मुगलों के शासन से हिन्दुओं को अंग्रेजों ने छुटकारा दिलाया है। यह बात संघ मानसिकता के लोग आज भी कहते सुने जा सकते हैं। यही वजह थी कि आखिरी बादशाह बहादुर शाह जफ़र की अगुआई में हुए 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को आरएसएस मुगलों का फिर से सत्ता प्राप्ति का प्रयास मानता है। इस तरह से आरएसएस न केवल आजादी की लड़ाई से अलग होकर हिन्दू राष्ट्र बनाने की भविष्य की योजना में लगा हुआ था बल्कि कई मौकों पर वह आजादी की लड़ाई का खुलकर विरोध करता हुआ दिखा। ये घटना खुद ही इसे बताने के लिए काफी है कि आरएसएस न केवल इस आजादी को खारिज करता है बल्कि लोकतंत्र में भी उसका कोई विश्वास नहीं है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विश्व भ्रमण के दौरान विभिन्न देशों में भारतीय मूल के हिन्दुओं के साथ कार्यक्रम का आयोजन तथा जगह-जगह उनको संबोधित किया जाना हिंदू राष्ट्र के निर्माण के लिए दुनिया के पैमाने पर जनमत तैयार करने के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। 

देश में संविधान को खत्म करने का शोर ऐसे ही नहीं हो रहा है। यह एक सामान्य आदमी भी समझ सकता है कि बिना संविधान ख़त्म किये हिन्दू राष्ट्र का निर्माण नहीं हो सकता है। और जब हिन्दू राष्ट्र होगा तो लोकतंत्र का कोई सवाल ही नहीं बनता है। और जब लोकतंत्र नहीं होगा तो फिर कौन सा चुनाव? कौन सा विपक्ष? हिन्दू राष्ट्र में प्रधानमंत्री थोड़े ही होगा। राजा होगा। जैसे कि नेपाल में हुआ करता था। यदि आरएसएस अपने इस षड्यंत्र में सफल हो गया तो यह राजा आरएसएस की ओर से होगा। 

चुनाव को खत्म करने के लिए आरएसएस चीन का उदाहरण देकर अपने घोर विरोधी वामपंथियों को चुप कराने का प्रयास कर सकता है। वैसे जैसे देश का एक बड़ा तबका  भावनात्मक मुद्दों के सामने मोदी सरकार की हर विफलता को नकार दे रहा है। ऐसे में देश में चुनाव खत्म करने के षड्यंत्र की बात को नकारा नहीं जा सकता है। भाजपा का 2026 तक पाक को भारत का हिस्सा बताना भी इसी षड्यंत्र का हिस्सा लग रहा है। देश में जिस तरह से गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का महिमंडन किया जा रहा है। इसे हिन्दू युवाओं को धर्मनिरपेक्ष जमात के खिलाफ तैयारी के हिस्से के तौर पर देखा जा सकता है। 

देश में संविधान की रक्षा के लिए बनाये गए तंत्र न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका के साथ मीडिया के सरकार के सामने आत्मसमर्पण की मुद्रा में आने से इस तरह की बातों को बल मिलता है। भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर विपक्षी दलों की सरकार द्वारा घेरेबंदी इसी को पुख्ता करने की दिशा में एक कदम है। 

दरअसल आरएसएस यह षड्यंत्र चीन को सामने रखकर रच रहा है। यह सर्वविदित है कि चीन में आम चुनाव की जगह कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर चुनाव द्वारा अपने यहां सत्ता का गठन किया जाता है। जिसमें वहां सेंट्रल कमेटी, पोलित ब्यूरो के साथ ही देश की सरकार का पूरा तंत्र चुना जाता है। 

हालांकि वोटिंग के लिए हाथ और कार्ड उठाकर समर्थन जताया या नकारा जाता है पर जमीनी हकीकत यह है कि बैठक में पार्टी के मुखिया द्वारा पहले से तय उम्मीदवारों के नामों पर ठप्पा लगा दिया जाता है।  हालांकि चीन में यह पूरी प्रक्रिया उतनी ही जटिल है जितनी कि वहां की बहुत सारी चीजें। 

पार्टी के बड़े नेता अपने ख़ास उम्मीदवारों को आगे बढ़ाते हैं।  ये नेता सरकार और पार्टी के विभिन्न पदों पर काम करते हुए अपनी योग्यता में इज़ाफ़ा करते हैं।

चीन में नेतृत्व का चुनाव बड़े गोपनीय ढंग से होता है। अगर पार्टी में किन्हीं नामों का विरोध हुआ है या कुछ नेता बैठक में गैरहाज़िर रहे हैं तो ये ख़बरें कभी बाहर नहीं आई हैं। 

इसी तर्ज पर आरएसएस और उससे निकली भाजपा और दूसरे अन्य संगठन देश पर कब्जा करना चाहते हैं। इस लिहाज से वे अपने आदर्श के तौर पर चीन को देखता है। जैसे शी जिनपिंग फिर से राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अब जीवन पर्यन्त राष्ट्रपति बने रह सकते हैं। ऐसे ही आरएसएस किसी व्यक्ति विशेष को आगे कर इस तरह की व्यवस्था कर सकता है। 

(चरण सिंह पत्रकार हैं और नोएडा में रहते हैं।)








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