आदिवासियों के घरों में घुसकर लूट, हत्या और बलात्कार कर रहे हैं जवान

छत्तीसगढ़ का सच! , , बुधवार , 06-12-2017


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हिमांशु कुमार

जोसेफ कोर्नाड ने आदिवासियों के ऊपर गोरों के भयानक अत्याचार के बारे में एक विश्व प्रसिद्ध उपन्यास लिखा है

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ की सरकार के खिलाफ अपने फैसले में इस उपन्यास का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि छत्तीसगढ़ की सरकार ने अन्धकार और क्रूरता का जो हमला आदिवासियों के ऊपर किया है उसने हमें इस उपन्यास की याद दिला दी है

लेकिन छत्तीसगढ़ की सरकार को सुप्रीम कोर्ट का कोई डर ही नहीं है

भाजपा सरकार ने पूंजीपतियों के लिए आदिवासियों की ज़मीनें छीनने के लिए आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार करवा कर आदिवासियों को डराने

आदिवासी बच्चों और युवकों की हत्याएं करवाने

और निर्दोष आदिवासियों को जेलों में ठूंस कर आदिवासियों के दिमागों में सरकारी खौफ बैठाने की हरकत जारी रखी हुई है

पिछले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के ऊपर ज़ुल्मों की बाढ़ ही आ गई है

गाँव-गाँव से आदिवासियों को पकड़-पकड़ कर जेलों में ठूंसा जा रहा है

पुलिस और अर्ध सैन्य बलों के सिपाही आदिवासियों के घरों में घुस कर आदिवासियों का पैसा छीन रहे हैं

सिपाही जब गाँव पर हमला करते हैं तो ये लोग आदिवासियों के बकरे मुर्गे और बत्तखें खा जाते हैं

लक्खापाल से सिपाहियों ने आदिवासियों के घरों से 90 हज़ार रूपये लूटे

कोत्तापल्ली गाँव से आदिवासियों के घरों में इसी शुक्रवार को आदिवासियों के घरों में बचा कर रखे हुए 56 हज़ार रूपये सिपाही लूट कर ले गये

इस गाँव से सिपाहियों ने तीन निर्दोष आदिवासियों को पकड़ कर जेल में डाल दिया

आदिवासियों को पुलिस द्वारा धमकी दी गई कि अगर पैसा लूटने वाली बात किसी को बताई तो तुम्हारे बच्चों को मार डाला जाएगा

निर्दोष आदिवासियों को जेलों में ठूंसा जा रहा है

हर आदिवासी को जेल में डालने के साथ पुलिस अधिकारी को ईनाम मिलता है

केंद्र से राज्य को और पैसा ज़्यादा दिया जाता है

राज्य सरकार दावा करती है कि हमने इतने नक्सली पकड़ लिए हैं

पूंजीपतियों को जल्द ही ज़मीन मिलने का दिलासा देकर वसूली करी जाती है

मुख्यमंत्री का बेटा पनामा के बैंक में पैसा जमा करके आता है

इस खेल में हज़ारों आदिवासी परिवारों की ज़िन्दगी बर्बाद कर दी गई है

पिछले कुछ महीनों में कुछ गांवों से उठाये गये निर्दोष आदिवासियों की संख्या लिख रहा हूँ

इन लोगों के पास आधार कार्ड है, ज़मीन के पट्टे हैं, घर हैं, बच्चे हैं

ये लोग सीधे सादे परिवार वाले लोग हैं

उठाये गये आदिवासियों की संख्या  

गोम्गुड़ा 15,

ताड़मेटला 8,

करीगुन्डम 7,

एलमागोंडा 25,

चिंतागुफा 15,

मंडीमरका 9,

बुरकापाल 37,

रावगुडा 3

तिम्मापुरम 2

मोरपल्ली 9

तोंगगुडा 5

केरलातोंग 1

कोत्तापल्ली 2

गोगुंडा 5

कुमडतोंग 4

दडेली 3

दुलेड़ 4

तोकनपल्ली 3

लक्खापाल 6

कोनमगुडा 3

रेवालीपारा 2

तमरगुडा 5

सारी दुनिया में पैंसठ देशों ने अपने आदिवासियों के संसाधनों पर कब्ज़ा करके अपने महल खड़े किये हैं

भारत में यह लूटपाट हमारी आँखों के सामने किया जा रहा है

सुप्रीम कोर्ट को ठेंगे पर रख दिया गया है

आवाज़ उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेलों में डाल दिया गया है या राज्य छोड़ कर जाने के लिए मजबूर कर दिया गया है

यह एक चुनौती पूर्ण समय ज़रूर है

लेकिन हम अभी थके नहीं हैं ना डरे हुए हैं

हम लड़ेंगे इस सब के खिलाफ 

(हिमांशु कुमार गांधीवादी कार्यकर्ता हैं और आजकल हिमाचल प्रदेश में रह रहे हैं।)






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Ummeed :: - 12-07-2017
Bahoot Hi Galat Ho Raha Hai Desh m Hame Jagrook Hone Ki Jaroorat Hai