एफिडेटिवट में संपत्ति छुपाने का मामला पहुंचा चुनाव आयोग,कांग्रेस की शाह के खिलाफ कार्रवाई की मांग

राजनीति , नई दिल्ली, सोमवार , 13-08-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के चुनावी एफिडेविट में अपनी संपत्ति छुपाने के मामले को लेकर आज कांग्रेस ने आज चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया। पार्टी ने चुनाव आयोग से अमित शाह के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। गौरतलब है कि अमित शाह ने अपने बेटे को लोन दिलाने के लिए गुजरात में कोआपरेटिव बैंक के पास अपनी दो संपत्तियों को गिरवी रखा था। लेकिन उसकी जानकारी अपने राज्यसाभा के एफिडेविट में नहीं दी। 

इसी मसले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील कपिल सिबल, पार्टी प्रवक्ता एवं वकील अभिषेक मनु सिंघवी, जयराम रमेश और विवेक तनखा के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। चुनाव आयोग परिसर से बाहर आने के बाद सिबल ने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व कानून के तहत 2004 में बने नियम के हिसाब से चुनाव लड़ने वाले को अपनी संपत्ति की घोषणा करनी पड़ती है। इसके साथ ही अगर कोई देनदारी है तो उसको भी बताना पड़ता है। लेकिन अमित शाह ने अपनी दो प्रोपर्टीज को अपने बेटे के लिए कोआपरेटिव बैंक में मॉर्गेज की। लोन देने वाला बैंक गुजरात का सबसे बड़ा को-ऑपरेटिव बैंक है। और इस तरह से उनके बेटे ने मॉर्गेज करके 25 करोड़ का लोन लिया। लेकिन इस बात का अमित शाह ने अपने एफिडेविट में खुलासा नहीं किया। 

जबकि ये लायबिलिटी है। और ये देनदारी जय शाह के न देने पर व्यक्तिगत तौर पर अमित शाह के ऊपर आएगी। सिबल ने इलेक्शन कमीशन से कहा कि अमित शाह ने ये बात एफिडेविट में न देकर 2004 के रुल का उल्लंघन किया है। उन्होंने उस याचिका को राज्यसभा के चेयरमैन के पास भेजने की मांग की। ताकि वहां उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो सके। 

कपिल सिबल का कहना था कि चुनाव आयोग ने खुद अपने रुल बनाए हैं जिसमें उसने लिखा है कि कोई भी अगर अपनी सम्पत्ति घोषित नहीं करता है या अपनी लायबिलिटी नहीं बताता है तो उसके खिलाफ 125 ए (125 A) रिप्रजेंटेशन पीपुल्स एक्ट के अन्तर्गत क्रिमिनल कार्रवाई होनी चाहिए। लिहाजा कांग्रेस नेताओं का कहना था कि उन्होंने खुद इलेक्शन कमीशन से अमित शाह के खिलाफ 125 ए (125 A) के अन्तर्गत एक क्रिमिनल कंप्लेंट फाइल करने की मांग की। सिबल ने बताया कि इस मामले में किसी को छह महीने तक सजा हो सकती है। 

प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बाद चुनाव आयोग का कहना था वो इस पर गौर करेगा और जल्द से जल्द फैसला लेगा और जो भी उचित कार्रवाई होगी कानून के हिसाब से की जाएगी।

लायबिलिटी घोषित न करने जैसे मामले में चुनाव आयोग कहता है कि किसी को कोर्ट जाना चाहिए के सवाल पर कपिल सिबल ने कहा कि वो वहां का भी दरवाजा खटखटाएंगे। ये तो चुनाव आयोग का अपना रुल है और 125 ए (125 A) के अंतर्गत क्रिमिनल प्रोसिक्यूशन शुरू हो सकता है। इस काम को कोई और नहीं बल्कि चुनाव आयोग करेगा। ये कोर्ट भी ले जाया जा सकता है लेकिन अभी पार्टी इसे कोई राजनीतिक विवाद का मुद्दा नहीं बनाना चाहती है। 

इस मौके पर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ये बहुत गंभीर मामला है। इसे तीन या चार आधारों पर समझा जा सकता है।

पहला- सुप्रीम कोर्ट ने सीधे-सीधे कहा है कि संपत्तियों की घोषणा बहुत जरूरी है और उससे किसी भी कीमत पर नहीं बचा जा सकता है। दूसरा- यहां अमित शाह के बेटे के नाम 25 करोड़ का लोन है। ये छोटी रकम नहीं होती है। जिसके बदले में अमित शाह ने अपनी संपत्तियों को बैंक के यहां गरवी रखी है। ये अपने आप में एक लायबिलिटी हो जाती है। जिसकी सीधी जिम्मेदारी अमित शाह की बनती है। इसलिए उसकी घोषणा बहुत जरूरी है। लेकिन यहां घोषित नहीं की गयी है। 

तीसरी- इसके दो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। एक आपराधिक मामला बनता है। जिसमें उनको सजा हो सकती है और जेल जा सकते हैं। जो लोकप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधान 15 के तहत आता है। दूसरा राज्यसभा के चेयरमैन इसका संज्ञान ले सकते हैं। और उसके साथ ही उनकी सदस्यता से निलंबन या फिर बर्खास्तगी हो सकती है।

आखिरी- ये सब कुछ अमित शाह को उसी दिन घोषित करना चाहिए था जब उन्होंने नामांकन किया था। अब आज इसको पलटा नहीं जा सकता है। उन्होंने एफिडेविट में जो भी लिखा है उसकी सभी को जानकारी है। लिहाजा ये केस अब बिल्कुल साफ हो गया है जिसमें किसी तरह की बहस की जरूरत नहीं है। उन्होंने अपनी संपत्ति गिरवी रखी है लेकिन उसकी घोषणा नहीं की।  








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