गाय आतंकवाद, मॉब लिंचिंग और बुलंदशहर

फुटपाथ , , रविवार , 09-12-2018


cow-bulandshahar-terrorist-mob-lynching-yogi-rss

अजय सिंह

गाय, आतंकवाद ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले में 3 दिसंबर 2018 को एक पुलिस अधिकारी की जान ले ली। यह साफ़-साफ़ मॉब लिंचिंग (किसी व्यक्ति को संगठित भीड़ द्वारा पूर्व-नियोजित तरीक़े से पीट-पीटकर मार डालना) थी। गाय और आतंकवाद ने ख़ासकर उत्तर प्रदेश में जिस तरह मॉब लिंचिंग की संस्कृति पिछले एक-डेढ़ साल में विकसित की है, यह उसका घिनौना नमूना है। इसने राजसत्ता-समर्थित संस्थाबद्ध रूप ले लिया है और इसे बचाने या छिपाने की हर संभव कोशिश की जाती है। इसीलिए राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने 7 दिसंबर 2018 को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि पुलिस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह की हत्या मॉब लिंचिंग नहीं, दुर्घटना है। जाहिर है, मॉब लिंचिंग या गाय आतंकवाद कहते ही भाजपा-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व उनसे जुड़े बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता युवा मोर्चा आदि संगठनों की करतूतें सामने आने लगेंगी।

बुलंदशहर ज़िले में पुलिस अधिकारी की बर्बर हत्या ने राज्य की भाजपा सरकार व मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इस सरकार के एक कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर खुलेआम कह चुके हैं कि यह हत्या भाजपा-आरएसस ने करायी है ताकि 2019 के लोकसभा चुनाव में हिंदू वोट के बल पर भाजपा फिर जीत सके। उनके इस बयान पर भाजपा व विश्व हिंदू परिषद के कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि राजभर को राज्य मंत्रिमंडल से बर्ख़ास्त कर दिया जाना चाहिए।

यह सिर्फ़ संयोग नहीं है कि हत्या की इस घटना के तीन दिन के अंदर बहराइच से भाजपा की लोकसभा सदस्य सावित्रीबाई फुले ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया, यह कहते हुए कि भाजपा की नीतियां विभाजनकारी हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता एसआर दारापुरी और रिहाई मंच के अध्यक्ष  मोहम्मद शोएब व महासचिव राजीव यादव ने लखनऊ में 7 दिसंबर 2018 को बुलंदशहर की घटना का ब्यौरा जारी करते हुए, और बाक़ायदा नाम लेते हुए, बताया कि भाजपा-आरएसएस व उनसे जुड़े संगठनों—विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल व भारतीय जनता युवा मोर्चा—के लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया।

बुलंदशहर की घटना बताती है कि गाय बचाने के नाम पर आतंक फैलाने और हत्या करने वालों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, क्योंकि उन्हें सरकार की शह और सहायता मिली हुई है। उन्हें पता है कि हम कुछ भी कर लें, हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा, क्योंकि सरकार तो हमारी अपनी है, वह हमारे साथ खड़ी रहेगी। चाहे हम पुलिस अधिकारी की ही हत्या क्यों न कर दें! इस घटना के मुख्य बिंदु से ध्यान हटाने की कोशिश जिस तरह आदित्यनाथ सरकार कर रही है, वह चिंताजनक है। बुलंदशहर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ अख़बार से 5 दिसंबर 2018 को कहा, ‘इस समय हमारे लिए सबसे अहम काम है यह पता लगाना कि गायों को किसने मारा...इस समय गायों की लाशें मुख्य मुद्दा है...हत्या और दंगा तो बाद की बात है।’ यानी पुलिस अधिकारी की हत्या आदित्यनाथ सरकार के लिए ख़ास चिंता की बात नहीं, ख़ास चिंता की बात है गाय की हत्या! इसलिए मुसलमान को पकड़ो!

पुलिस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह मुसलमान या दलित नहीं, सवर्ण हिंदू थे। गाय आतंकवादियों के हाथों उनकी हत्या बताती है कि इस आतंक का दायरा अब सवर्ण हिंदुओं की तरफ़ भी बढ़ रहा है। ख़ासकर उन हिंदुओं की तरफ़, जो सेकुलर हैं, प्रगतिशील-उदारवादी हैं, और मुसलमानों से यारी-दोस्ती रखते हैं। सुबोध कुमार सिंह के ख़िलाफ़ भाजपाइयों-हिंदुत्ववदियों ने दुष्प्रचार अभियान चलाया था कि वह मुसलमानों से बहुत ज़्यादा यारी-दोस्ती रखते हैं और हिंदुओं को तंग करते हैं। इस अभियान ने ही उनकी हत्या करायी, और यह पूर्व-नियोजित था। गाय आतंकवाद  ने राजसत्ता पर—पुलिस पर—खुलेआम हमला कर बता दिया है कि उसके लिए कोई सीमा नहीं है।

(अजय सिंह कवि और राजनीतिक विश्लेषक हैं आप आजकल लखनऊ में रहते हैं।)










Leave your comment











Raj Valmiki :: - 12-10-2018
हिन्दुत्व की raajneeti hai yah