आखिर दाऊद के खासम-खास जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल की क्यों कर रहे हैं पीएम मोदी मदद!

मुद्दा , , रविवार , 18-11-2018


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गिरीश मालवीय

सुना है मोदी जी जेट एयरवेज को टाटा समूह के हाथों बिकवाने के लिए एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की जेट समूह की कई सौ करोड़ की देनदारी को माफ करवा रहे हैं और जेट एयरवेज को दिए गए सरकारी बैंकों के लोन पर भी बड़ी राहत टाटा ग्रुप को दिलवा रहे हैं।

एक बार फिर उसी जेट एयरलाइंस को बचाने की कोशिश मोदी सरकार कर रही है जिसके मालिक नरेश गोयल के साथ दाऊद इब्राहिम के गहरे रिश्ते रहे हैं।

इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट जोसी जोसेफ ने अपनी किताब "ए फीस्ट ऑफ वल्चर्स' में एक दिलचस्प किस्सा बयान किया है उसको यहां पढ़ना दिलचस्प रहेगा।

'इंटेलिजेंस ब्यूरो चीफ केपी सिंह और उनके वरिष्ठ साथी संयुक्त संचालक अर्जुन घोष 2002 की गर्मियों के दिन में नॉर्थ ब्लॉक में बेसमेंट में वाहन का इंतजार कर रहे थे। वहीं संसद में दोनों सदनों के सदस्य एक पत्र को लेकर उग्र हो रहे थे। यह वही पत्र था जिसे कुछ महीने पहले घोष ने लिखा था।

यह एक सिंगल पेज का नोट था जो गृह मंत्रालय की ज्वाइंट सेक्रेटरी संगीता गैरोला के नाम था, जिसमें इस बात की पुष्टि की गयी थी कि नरेश गोयल की अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील से पैसों के लेन-देन व विभिन्न मुद्दों पर लगातार बातें होती हैं। यहां पर गोयल के निवेश व अंडरवर्ल्ड समूहों को लेकर भी गहरा संदेह था। इन समूहों का नेतृत्व छोटा दाऊद व शकील कर रहे थे।'

घोष आरोप लगाते हैं कि जेट एयरवेज में बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों के शेखों ने संदिग्ध निवेश कर रखा है। नरेश गोयल व शेखों में दो दशकों से ज्यादा समय तक करीबी व्यापारिक संबंध रहे। ऐसा न केवल बार-बार प्रत्यक्ष निवेश पाने के लिए हुआ बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग कर तस्करी, जबरन वसूली और अवैध कामों का पैसा भारतीय व्यापार में रिसाइकल करने के लिए भी किया गया।

12 दिसंबर 2001 का यह पत्र हंगामे की वजह बना। संसद में सभी पार्टियों ने सच्चाई बताने की मांग की। राजू परमार ने राज्यसभा में गृहमंत्री से मामले में जवाब मांगा। तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी दो वरिष्ठ आईबी अफसरों का इंतजार कर रहे थे। बीजेपी के साथ-साथ आडवाणी ने हमेशा इस मुद्दे पर कठोर रुख अपनाया। उस मीटिंग में मौजूद एक अधिकारी के अनुसार आडवाणी ने गोयल और अंडरवर्ल्ड से जुड़े सबूतों के बारे में दोनों अफसरों की बातें सुनीं।

आईबी अफसरों ने उनसे बताया कि हाल ही के कुछ महीनों में गोयल ने कम से कम तीन बार दाऊद और शकील से फोन पर बातचीत की थी। इसके अलावा भी और कुछ सबूत आईबी के पास मौजूद हैं। अफसरों ने बताया कि मीटिंग ने आडवाणी को हिलाकर रख दिया था। वो इस मुद्दे पर बहुत ही स्पष्ट थे। तब मैंने सोचा था कि इस मामले के दौरान जेट एयरवेज बंद हो जाएगी। एक दशक बाद 2014 में जब मैं उस अधिकारी से मिला तब जेट एयरवेज एक समृद्ध अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन्स बन गई थी। गोयल राजनेताओं और सिविल सर्वेंट का चहेता बन चुका था।'

जेट एयरवेज पर इस वक्त 9430 करोड़ रुपए का कर्ज है!,..........क्या कोई बताएगा कि जेट एयरवेज को मोदी सरकार क्यों बचा रही है?

क्यों मोदी जी इसे बचाने में पर्सनल इंटरेस्ट ले रहे हैं? क्या जेट एयरवेज कोई सरकारी कम्पनी है? और सरकारी संपत्ति एयर इंडिया की तो संपत्ति तक टुकड़े-टुकड़े करके बेचने की योजना है लेकिन जेट का एक साथ ही पूरा सौदा करने का टाटा पर दबाव बनाया जा रहा है आखिर क्यों?

क्या इसका कारण यह है कि जेट के मालिक नरेश गोयल को मोदी सरकार ने 2015 में पीएनबी से एक बड़ा लोन दिलवाया है? नरेश गोयल ने जेट में अपनी 51 फीसदी की पूरी शेयरहोल्डिंग को पंजाब नेशनल बैंक के पास 2015 में गिरवी रख दी थी जिसकी कीमत उस वक्त 2600 करोड़ रुपये आंकी गयी थी और उस वक्त गोयल द्वारा शेयरों को गिरवी रखे जाने के निर्णय की वजह की जानकारी नहीं दी गई थी। 

और एक तथ्य जान लीजिए 2016 से ही नरेश गोयल दुबई ओर लंदन में आलीशान जीवन बिता रहे हैं यानी उन्हें माल्या की तरह देश छोड़कर भागने की कोई जरूरत नहीं है वह पहले से ही बाहर हैं।

एविएशन सेक्टर के एक्सपर्ट पिछले महीने ही बता थे कि जेट को 3500 करोड़ रुपए की तत्काल जरूरत है। इसके अलावा 2800 करोड़ रुपए के कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग भी करवानी होगी। बैंक उसे पैसा देना नहीं चाहते। स्टेट बैंक पहले ही उसे 2000 करोड़ रुपए का लोन दे चुका है। एसबीआई ने इस जून तिमाही के नतीजों को जारी करने के बाद कहा था कि जेट एयरवेज को हमने कर्ज दिया हुआ है।

यानी वही बात है कि पहले अपने चहेते उद्योगपति को बेहिसाब कर्ज दो और उसके बाद उसका सेटलमेंट कराते रहो और बाई द वे आपने जो दिवालिया कानून बनाया था जो साल भर में रिजल्ट दे देता है। उसके पास यह मामला क्यों नहीं भेज देते।

सीधी और सच्ची बात तो यह है कि अगले 6 महीने में ही मोदी जी को आम चुनाव का सामना करना है। नरेश गोयल को वह एक ओर नीरव मोदी और विजय माल्या बनने नहीं देना चाहते हैं।

(गिरीश मालवीय आर्थिक मामलों के जानकार हैं और आजकल इंदौर में रहते हैं।)

 








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