अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी शर्मसार होने लगा है भारतीय मीडिया, गल्फ न्यूज़ ने उठाया मामला

मुद्दा , नई दिल्ली, बुधवार , 14-02-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। भारतीय मीडिया को अपने रवैये के चलते अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी शर्मसार होना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान कुछ न्यूज चैनलों द्वारा चलायी गयी कुछ वीडियो क्लिप झूठी साबित हुई हैं। और खाड़ी के देशों में सर्वाधिक पढ़े जाने वाला पेपर गल्फ न्यूज ने इस खबर को अपनी वेबसाइट पर प्रमुखता से छापा है। वेबसाइट के मुताबिक भारत में कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा चलायी गई एक वीडियो क्लिप में दावा किया गया है कि आबू धाबी के राजकुमार और यूएई सेना के डिप्टी सुप्रीम कमांडर शेख मोहम्मद बिन जायेद नाहयान ने एक हिंदू समूह की ओर से आयोजित एक समारोह में हिंदू शब्दों के साथ अभिवादन किया था। जबकि ये बात बिल्कुल झूठी थी। वेबसाइट का कहना है कि उसे भारत में सत्ता पक्ष को राजनीतिक लाभ दिलाने के मकसद से फैलाया गया था।

प्रधानमंत्री मोदी के यूएई दौरे के मौके पर भारत के अग्रणी चैनलों टाइम्स नाऊ और जी टीवी द्वारा ट्वीट किए गए वीडियो में दावा किया गया था कि आबू धाबी में मोरारी बापू के नेतृत्व में आयोजित एक हिंदू आध्यात्मिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शेख मोहम्मद बिन जायेद ने “जय सिया राम” कहा था। 

लेकिन खबर पूरी तरह से गलत थी। शेख मोहम्मद बिन जायेद ने इस तरह के किसी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। वीडियो में जिस शख्स को कार्यक्रम में शामिल होते दिखाया गया है वो यूएई में रहने वाले स्तंभकार सुल्तान सऊद अल कासमी थे।

लेकिन पोस्ट करने के कुछ ही घंटों में वीडियो वायरल हो गया। और एक फेक स्टोरी सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से चलने लगी। सैकड़ों लोगों ने इस फेक न्यूज को रिट्वीट किया। बहुत सारे लोगों ने कमेंट के जरिये अपनी राय भी दे डाली।

उदाहरण के लिए हैंडल @sona2905 नाम वाले एक यूजर ने कहा कि “अगर आप भू-राजनीति की समझ रखते हैं तो आप जानते हैं कि इसका क्या मतलब है और पीएम मोदी कहां खड़े हैं।”

एक दूसरे यूजर ने “ अबू धाबी के राजकुमार को उनके कीमती भाषण के लिए उन्हें दिल से बधाई दे डाली।” और कहा “सचमुच में बहुत बेहतर काम पीएम मोदी जी/भारत ने किया।” 

खबर को देखने वाले इस बात पर अचरज जाहिर कर रहे हैं कि भारत के राष्ट्रीय न्यूज चैनल शेख मोहम्मद बिन जायेद को भी नहीं पहचान पा रहे हैं। जबकि 2017 के भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के वो मुख्य अतिथि थे। इसके साथ ही उन्होंने 2016 में भारत की यात्रा की थी। इस खबर के सामने आने के बाद यूएई में कई परेशान करने वाले सवाल खड़े होने लगे।

पहला, ये इस बात को बिल्कुल स्पष्ट तौर पर दिखाता है कि भारत में मुख्यधारा का मीडिया प्रोपोगंडा और फेक न्यूज़ का शिकार हो जा रहा है। अब ये अपनी मर्जी से है या फिर किसी दबाव में कह पाना मुश्किल है।

इस तरह के विकृत आधे सच को फैलने से रोकने के लिए भारतीय मीडिया के पास कोई पर्याप्त बंदोबस्त नहीं है। इसके साथ ही बुनियादी तथ्यों की जांच में भी वो सक्षम नहीं हैं। जो किसी भी जिम्मेदार और जवाबदेह पत्रकारिता की रीढ़ है।

दूसरा, आनलाइन खोजने पर वायरल वीडियो अपने पूरे वास्तविक फार्म में मौजूद था।  

सभी खबरों को एक निश्चित समयावधि में अपलोड किया गया था। मोदी के यूएई में पहुंचने से ठीक पहले। और सभी में एक ही तरीके की शुरुआत थी।

उदाहरण के लिए टाइम्स नाऊ ने भारतीय समय के मुताबिक 10 फरवरी को शाम 3.45 बजे वीडियो ट्वीट किया। ये कहते हुए कि “जब अबू धाबी के राजकुमार को अपना विचार व्यक्त करने के लिए मंच पर बुलाया गया तो उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत “जय सिया राम” से की, जिससे पूरी भीड़ उन्मादी हो गयी।”

हालांकि सैकड़ों जागरूक ट्विटर यूजर्स ने चैनल को तुरंत इस गलती के लिए आगाह भी किया। लेकिन उसने उसी वीडियो को 11 फरवरी को 12.05 बजे एक बार फिर ट्वीट किया।

उसके बाद चैनल ने उसमें थोड़ा सुधार करते हुए इस नोट के साथ वीडियो जारी किया कि “आबू धाबी के शेख सुल्तान ने अपना भाषण “जय सिया राम” से शुरू किया”। इसमें जानबूझ कर आबू धाबी के लिंक को बनाए रखा गया। जिससे वास्तविक संदेश अपना वजूद न खो दे।

इसी तरह का पैटर्न जी न्यूज समेत दक्षिण पंथी वेब पोर्टलों इंडिया डॉट काम और पोस्टकार्ड डॉट काम का रहा।

फिर उसके बाद तो मानों बाढ़ आ गयी। और दूसरे न्यूज चैनलों ने भी इस फेक क्लिप को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया। खास कर रीजनल न्यूज चैनलों में जैसे इसके लिए होड़ मच गयी। इसमें हिंदी के दैनिक भास्कर और जनसत्ता से लेकर एबीपी आनंद और बंगाली में 24 घंटा और कन्नड़ में कन्नड़ प्रभा शामिल थे।

 

 






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