बनावटी फकीर ने नहीं सुनी एक सच्चे फकीर की पुकार

खरी-खरी , , शुक्रवार , 12-10-2018


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उपेंद्र चौधरी

चित्रकूट का एक छोटा सा कमरा, उस कमरे में लगा मामूली बिस्तर, खाना बनाने के लिए एक स्टोव, छोटे-छोटे सामान से बेतरतीब अटी-पड़ी एक अटैची और कमरे की दीवार पर बनी खूंटी पर टंगे दो-चार जोड़ी कपड़े। कैलिफॉर्निया विश्वविद्यालय से इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट की उपाधि और आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग और पर्यावरण विभाग का एक निष्ठावान अध्यापक। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पहले सचिव और राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय के सलाहकार।

शुरुआती नाम जीडी अग्रवाल और संन्यास लेने के बाद स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद। भूगर्भ जल विज्ञान के महापंडित, जल पर्यावरण के प्रति एक समर्पित संत। अपनी समझ के बूते अलवर समेत देश के अनेक क्षेत्रों के ‘डार्क ज़ोन’ को फिर से ‘व्हाइट ज़ोन’ में रुपांतरित करने वाला एक इंजीनियर-पर्यावरण खांटी संन्यासी।

गंगा की अविरल धारा को लेकर प्रतिबद्धता इस क़दर थी कि उन्होंने ख़ुद को गंगा का बेटा बताया था। इसके लिए 'गंगापुत्र' पिछले 111 दिनों से अनशन पर थे। ‘नमामी गंगे’ का उद्घोष करने वाले राजनीतिक 'गंगापुत्र' ने इस असली 'गंगापुत्र' के चार ख़तों का जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझा। उन चार ख़तों में बार-बार दुहरायी गयी मांगों में थीं;  नदियों को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए उनका पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखा जाना; नदियों के किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाया जाना और इसके लिए एक असरदार क़ानून बनाया जाना।

मगर सूट-बूट पहने फ़कीर ने इस तत्वज्ञानी संत की भरपूर उपेक्षा की। 'स्वच्छ भारत' के नारों के शोर के बीच गहरी समझ-बूझ के पवित्र आह्वान और अटूट अनशन ने आख़िरकार अपना दम तोड़ दिया। 68 साल के प्रधानसेवक की कड़ी मेहनत की मीडिया गाथा के सामने 86 बरस के इस अविरल धारा के सारथी के प्राण पखेरू बिना अन्न-जल के छूट गये। समझने की ज़रूरत है कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की सचाई आख़िर कहां है- मामूली कुर्ता-पायजामे से सूट-बूट के साथ मंहगे-मंहगे उड़ान का शोर करते राजनीतिक नारों में या सूट-बूट त्यागकर मामूली वस्त्र अख़्तियार करने वाली उन्नत चेतना में ?

(उपेंद्र चौधरी पेशे से पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)








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Govind Sharma :: - 10-12-2018
सन्यासी जी को श्रद्धांजलि ! जब सन्यासी जी के पास power थी तब तो कुछ कर न सके power जाने के बाद आमरण अनसन ये दिखावा शिर्फ India मे ही हो सकता है ! सस्ती लोकप्रियता पाने का आसान तरीका ! जिसके लिए आमरण अनसन रखा स्वामी जी उसी विभाग मे सचिव और सलाहकार रहे अगर गंगा पुत्र थे तो उस समय ये काम करना चाहिए था ताकि बिना अन्न जल के प्राण तो नहीं त्यागने पड़ते और मोदी विरोधियों को भी कोसने का मौका नहीं मिलता जो बिना अपनी बुद्धि विवेक के कुछ भी बोलते रहते हैं ! ऐवें कुछ भी ! बोलने लिखने की आजादी भी है तो कुछ भी बोल दो कुछ भी लिख दो ! बहुत खूब....... जियो !