सरकार के अहंकार ने ली सानंद की जान!

मुद्दा , देहरादून, शुक्रवार , 12-10-2018


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अंबरीश कुमार

देहरादून। मोदी सरकार के अहंकार ने स्वामी सानंद की जान ले ली। गंगा को बचाने के लिए एक सौ ग्यारह दिन से 'आमरण अनशन ' कर रहे  स्वामी सानंद (प्रोफ़ेसर जीडी अग्रवाल) की मौत कल हिरासत में ही हो गई। पुलिस उन्हें उनके आश्रम से उठाकर ले गई थी। वे अंतिम समय तक सरकार की निगरानी में ही रहे। उन्हें  किस तरह पुलिस ने उठाया था यह फोटो में देखें। वे सत्तासी साल के थे। सौ से ज्यादा दिन से अनशन पर थे और सरकार ने पुलिस के जरिये  उन्हें किस तरह उठवाया यह इन फोटो में दिख रहा है। वे बहुतों के दादा/पिता की उम्र के थे।

उन्होंने अन्न जल त्याग दिया था, गंगा के लिए। वही गंगा जिसके बुलावे पर भाजपा के शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी बनारस गए और चुनाव जीत कर प्रधानमंत्री बन गए। बनारस में वे लोगों को यह कहकर जोड़ते थे कि उन्हें मां गंगा ने बुलाया है। पर उसी गंगा को बचाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे सत्तासी साल के स्वामी सानंद के किसी पत्र का जवाब तक नहीं दिया प्रधानमंत्री ने। 

गंगा सिर्फ नदी नहीं है। यह संस्कृति है। बनारस के आगे तो गंगा का पानी पांच फीसदी भी नहीं बचता। जो नदियां इसमें मिलती हैं वे भी गंगा बन कर कोलकता तक पहुंच जाती हैं। यह हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। इस नदी को नहर और नाले में बदले  जाने के खिलाफ वे आंदोलन कर रहे थे। वे सामान्य साधू संत नहीं थे। वे पर्यावरण बचाने के लिए आंदोलन कर रहे थे। वे शिक्षाविद थे। वे आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग और पर्यावरण विभाग में प्राध्यापक, केंद्रीय  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में प्रथम सचिव और राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय के सलाहकार रह चुके हैं। और क्या उम्र थी उनकी जब सरकार ने उन्हें पुलिस के दरोगा और सिपाहियों को सौंप दिया। 

सत्तासी साल के इस संत से जब संवाद की जरुरत थी तब उन्हें इस सरकार ने थाने के हवाले कर दिया। यह संवेदनशीलता है इस सरकार की। वह सरकार जो गंगा, आस्था और हिंदुत्व की बुनियाद पर खड़ी है।

स्वामी सानंद की मौत पर ज्यादातर आम लोगों की प्रतिक्रिया यही थी कि उन्होंने जान दी नहीं, उनकी जान इस सरकार के अहंकार ने ली है। अनशन तो स्वामी सानंद ने कई बार किया पर सरकार ने संवाद किया और वे अपनी मुहिम में जुटे रहे। यह तो मोदी थे जिन्होंने स्वामी के किसी भी पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। किसी भी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री को उनसे संवाद के लिए नहीं भेजा गया। मुख्यमंत्री तो पड़ोस में थे उन्हें भी बातचीत के लिए नहीं भेजा। भेजा तो थानेदार को सिपाहियों के साथ। जिसने उन्हें जबरन उठाकर ऋषिकेश के एम्स में दाखिल करा दिया। 

स्वामी सानंद के निधन पर दुःख जताते  हुए स्वामी शिवानंद ने  कहा , स्वामी सानंद की मृत्यु नहीं हुई है उन्हें मारा गया है। पर स्वामी का यह बलिदान भाजपा सरकार को भारी पड़ेगा। चारों तरफ से आम लोगों की जो प्रतिक्रिया आ रही है वह मोदी सरकार के लिए शुभ नहीं है। लोग मान रहें हैं कि ये गंगा के नाम पर नाटक करते रहे हैं। इसी नाटक ने  एक संत की जान ले ली।

(अंबरीश कुमार शुक्रवार के संपादक हैं और तकरीबन 26 सालों तक इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े रहे हैं।)

 








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