विवादों से पुराना नाता है गोरखपुर डीएम राजीव रौतेला का

पड़ताल , गोरखपुर, शुक्रवार , 16-03-2018


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मनोज कुमार सिंह

गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव की मतगणना के दौरान मीडिया को अपडेट न देने और 10 राउंड की मतगणना होने के बावजूद उसके परिणामों को जारी न करने पर आरोपों से घिरे गोरखपुर के डीएम राजीव रौतेला का विवादों से पुराना नाता है। वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहद करीबी हैं, इसलिए हाईकोर्ट द्वारा उनके विरूद्ध कार्रवाई करने के आदेश के बावजूद अब तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनको उत्तराखंड कैडर भेजे जाने का आदेश हो चुका है, तब भी प्रदेश सरकार ने उन्हें वहां भेजने के बजाय गोरखपुर का डीएम बनाए रखा है। 

 

ज़्यादातर रंगीन गागल लगाए रखने वाले राजीव रौतेला उत्तरखंड के रहने वाले हैं। वह पहाड़ी क्षत्रिय हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहाड़ी क्षत्रिय हैं। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही उन्हें गोरखपुर का डीएम बनाया गया। गोरखपुर में उनके तैनात होते ही यह चर्चा होने लगी कि वह मुख्यमंत्री के गांव के आस-पास के हैं और दूर की रिश्तेदारी में भी हैं। एक बार उन्हें गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री को मामा कहते हुए पैर छूते देखा गया था जिसकी बहुत चर्चा हुई थी हालांकि इन खबरों की पुष्टि नहीं की जा सकती है। 

राजीव रौतेला पीसीएस अधिकारी थे जिन्हें आईएएस संवर्ग मिला। सपा सरकार में वह अलीगढ़ के डीएम थे। तब वह शहीदों पर दिए गए गए बयान के कारण खूब विवाद में आए। वह वर्ष 2016 में रामपुर के भी जिलाधिकारी रहे और यहां पर जिलाधिकारी रहते हुए बालू खनन के बारे में हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए बालू खनन का पट्टा देने की शिकायत हुई जिस पर हाईकोर्ट ने सात दिसम्बर, 2017 को उन्हें सस्पेंड करने का आदेश दिया लेकिन आज तक उस पर अमल नहीं हो सका है। 

 

यह मामला इस प्रकार है। रामपुर निवासी मकसूद ने वर्ष 2015 में हाईकोर्ट इलाहाबाद में जनहित याचिका दायर कर रामपुर निवासी गुलाम हुसैन उर्फ नन्हे पर सरकारी मशीनरी से मिलीभगत कर कोसी नदी से अवैध बालू खनन करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की गुहार लगाई। सुनवाई में हाईकोर्ट ने पाया कि गुलाम हुसैन के पास माइनिंग लाइसेंस नहीं है और उसने जरूरी इन्वायरमेंटल क्लीयरेंस (पर्यावरण मंज़ूरी) भी नहीं प्राप्त किया है। हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चन्द्रचूड़ ने 24 अगस्त 2015 को डीएम रामपुर को एक महीने में अवैध खनन बंद कराने, खनन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और खनन से हुए नुकसान की वसूली करने का आदेश दिया। उन्होंने रामपुर जिला प्रशासन और पुलिस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि वह अवैध खनन पर मूकदर्शक बना हुआ है। 

याचिकाकर्ता मकसूद ने वर्ष 2017 में दूसरी याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया कि अवैध खनन रोकने के लिए सरकारी मशीनरी ने कोई कार्रवाई नहीं की और अवैध खनन जारी है। इस पर हाईकोर्ट ने डीएम रामपुर को अदालत में तलब किया। छह दिसम्बर और सात दिसम्बर को हुई सुनवाई में जब हाइकोर्ट ने पूछा कि 24 अगस्त, 2015 के आदेश के बावजूद माइनिंग कैसे हो रही है तो बताया गया कि 16 जुलाई, 2016 को रामपुर के जिलाधिकारी राजीव रौतेला ने गुलाम हुसैन के माइनिंग लाइसेंस को तीन वर्ष के लिए रिन्यूल (नवीनीकरण) किया था। हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए माइनिंग लाइसेंस को रिन्यूल की डीएम की कार्यवाही को गैरजिम्मेदार और हाईकोर्ट के पूर्व आदेश का अनुपालन न करने का रास्ता खोजने वाला बताया। 

 

हाईकोर्ट ने रामपुर के जिलाधिकारी रहे राकेश कुमार सिंह और राजीव रौतेला को निलम्बित करने और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया। राजीव रौतेला इस समय गोरखपुर और राकेश कुमार सिंह कानपुर देहात के डीएम हैं।

 

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह जांच करा कर 24 अगस्त 2015 के आदेश का पालन न होने के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की पहचान करें और प्रदेश सरकार इस जांच के आधार पर सम्बन्धित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करे। इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तिथि 16 जनवरी निर्धारित की गई जिसमें मुख्य सचिव को कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा गया।  

 

लेकिन प्रदेश सरकार ने दोनों अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की। दो फरवरी 2018 को इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी भोसले और मनोज कुमार गुप्ता की पीठ ने राजीव रौतेला और राकेश कुमार सिंह को निलम्बित करने और अन्य अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश का पालन न होने पर नाराजगी जतायी। हाईकोर्ट ने इस सम्बन्ध में मुख्य सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताया और आदेश का अनुपालन करने को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

इसके बावजूद राजीव रौतेला पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसका कारण उनका मुख्यमंत्री का चहेता होना बताया जा रहा है। 

 

10 अगस्त को बीआरडी मेडिकल कालेज में हुई ऑक्सीजन त्रासदी में 34 बच्चों की मौत होने के मामले में भी डीएम की भूमिका पर सवाल उठे। लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कम्पनी पुष्पा सेल्स ने भुगतान न होने के बारे में लिखे पत्रों में से कई पत्र डीएम राजीव रौतेला को भी भेजे थे लेकिन इस मामले में उन पर कोई जिम्मेदारी निर्धारित नहीं हुई। उनसे कभी नहीं पूछा गया कि जब बीआरडी मेडिकल कालेज प्रशासन ने पुष्पा सेल्स के भुगतान के मामले में कोई कार्रवाई नहीं की तो उन्होंने क्या कदम उठाए। यही नहीं इस मामले में गिरफ्तार किए गए बीआरडी मेडिकल कालेज के एनएचएम के नोडल अधिकारी डॉ. कफील खान ने मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजे गए पत्र में ऑक्सीजन सिलेण्डर की व्यवस्था करने के लिए उनको भी फोने किए जाने का जिक्र किया है। सवाल उठता है कि डॉ. कफील खान ने डीएम को फोन कर सहयोग मांगा था और उन्हें डॉ. कफील के प्रयास की जानकारी थी तब इस प्रकरण में डॉ. कफील को दोषी क्यों बनाया गया? 

डीएम राजीव रौतेला से सवाल-जवाब किया जाना तो दूर रहा वह इस मामले की खुद जांच भी कराते रहे। उन्होंने एक जांच समिति गठित की जिसके आधार पर बीआरडी मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्रा, एनस्थीसिया के एचओडी डॉ सतीश कुमार, पूर्व प्राचार्य की पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ल, पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी व बीआरडी मेडिकल कालेज के चार कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई। उन्हें गिरफ्तार किया गया और जेल भेजा गया। 

गोरखपुर लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही सपा ने उन्हें हटाए जाने की मांग की थी और उनके रहते निष्पक्ष चुनाव न होने की आशंका व्यक्त की थी। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने गोरखपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीएम के रहते चुनाव में गड़बड़ी की आशंका व्यक्त की थी। 

मतदान प्रतिशत बढ़ाने को लेकर उनके द्वारा किए गए प्रयास भी चर्चा में रहे। मतदाता जगारूकता अभियान के लिए उन्होंने रामगढ़ ताल में नौकायन का आयोजन किया। यह आयोजन अव्यवस्था का शिकार रहा और एक नाव जिसमें मदरसा की शिक्षिकाएं बैठीं थीं, टूट गई और शिक्षिकाएं डूबते-डूबते बचीं। 

मतदान के दिन 100 से ज्यादा ईवीएम के खराब होने और उनके ठीक होने या बदले जाने में कई-कई घंटे लगने पर चुनाव व्यवस्था को लेकर पर सवाल उठा। सपा प्रत्याशी ने तो आरोप लगाया कि जान बूझकर ईवीएम बदलने या ठीक करने में समय लगाया गया ताकि उनके वोटर मतदान न कर सकें। उनका यह भी सवाल था कि आखिर गोरखपुर शहर के ईवीएम क्यों नहीं खराब हुए। ग्रामीण क्षेत्रों में ही क्यों ईवीएम खराब हुए। 

मतदान प्रतिशत को लेकर जिला प्रशासन द्वारा जब दो बार प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई तो सबके मन में शंका होने लगी कि आखिर गोरखपुर में मतदान प्रतिशत में बार-बार क्यों बदलाव हो रहा है। शाम पांच बजे गोरखपुर लोकसभा में 43 फीसदी मतदान प्रतिशत की जानकारी दी गई। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी यह मत प्रतिशत बताया गया था लेकिन कुछ ही देर बाद जिला निर्वाचन अधिकारी राजीव रौतेला के हवाले से बताया गया कि 47.45 फीसदी मतदान हुआ। एक दिन बाद कहा कि स्क्रूटनी के बाद मतदान प्रतिशत 0.5 फीसदी और बढ़ गया है और फाइनल मतदान प्रतिशत 47.95 है। 

मतदान प्रतिशत बार-बार बदलने पर सपा ने सवाल उठाया और सपा प्रत्याशी ने तो इसकी लिखित शिकायत करते हुए साजिश की भी आशंका व्यक्त कर दी। मतगणना के दौरान मीडिया को बाहर करने और अपडेट जारी न करने पर तो खासा हंगामा हो गया। विधानसभा और विधान परिषद से लेकर लोकसभा तक में यह मामला उठ गया। 

राजीव रौतेला को केन्द्र सरकार के कार्मिक विभाग ने उतराखंड कैडर में भेजने का आदेश दे रखा है लेकिन प्रदेश सरकार ने अभी फाइल रोक रखी है। चर्चा है कि गोरखपुर लोकसभा चुनाव के कारण ही उन्हें न तो उत्तराखंड कैडर में स्थानान्तरित किया गया और न हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई हुई। 

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और गोरखपुर न्यूज़ लाइन के संपादक हैं। उनका यह लेख ‘द कारवां’ से साभार लिया गया है। इसमें कुछ अन्य जानकारियां सीधे लेखक से बातचीत के आधार पर जोड़ी गई हैं।)






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rajeev :: - 03-16-2018
prashnik sevao md jaativaadi log bhare pade hury hai, kamobesh pure desh me yahi halat hai, sashan or prasashan ki jugalbandi se system ko capture kiya jata hai. is prkaar ke afsar loktantra ke liye khatra hai isliye ese afsaro ko trminate kiya jana jaruri ho jata hai, adhiktar state pcs ke officer bhai bateejawad or jaativad me jayda dube rehte hai, rajeev routela jese aaropi adhikariyo ko 10 sal jail hona chahiye,, kyoki jab IAS jesi sevao ke adhikari jinpar savidhan sammat karya karne ki jimmewari hoti hai, ese officer ko jail me dalakr ssharm karavas ki saza dekar court ko desh ke samne ek mishal kayam karni chahiye taaki phir se desh me koi rajeev routela janm na le sake,, shame on rajeev toutela