समाज को आईना दिखाती हापुड़ गैंगरेप पीड़िता

मुद्दा , , शुक्रवार , 17-05-2019


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चरण सिंह

जब कोई महिला इसलिए अपने को जला ले कि कम से कम उसके साथ अब कोई रेप तो नहीं करेगा। इससे कोई भी समझ सकता है कि उसकी मन:स्थिति क्या होगी। ये समाज के दिये घाव ही होते हैं जिससे कोई व्यक्ति इस हद तक गुजरने को मजबूर हो जाए। यह है असली चेहरा हमारे समाज का। हम कितना भी महिला सशक्तिकरण की बात करें, महिलाओं के सम्मान का कितना भी दावा करें या फिर उनकी बराबरी का ढिंढोरा पीटते रहें। लेकिन इससे जमीनी हकीकत बदल नहीं जाएगी। उसकी सचाई यही है कि समाज का बड़ा तबका आज भी महिलाओं को अपने पैर की जूती समझता है। हवश मिटाने की मशीन समझता है। हापुड़ में गैंगरेप की शिकार महिला की बातों से तो यही लग रहा है। जब अपनों ने भी उसको नहीं बख्शा तो फिर बाहरी लोगों से क्या गिला। 

विडंबना देखिए कि देश की राजधानी से सटे हापुड़ जैसे जागरूक शहर में 14 वर्ष की उम्र में ही उसकी शादी कर दी गई और कोई विरोध नहीं हुआ। एक बच्चा होने के बाद उसे छोड़ दिया जाता है तब भी कोई विरोध नहीं हुआ। मां के मरने की वजह से उसके पिता और चाची ने उसे 10 हजार रुपये में बेच दिया।  तब भी कहीं से कोई आवाज नहीं उठी। एनसीआर में सैकड़ों एनजीओ महिलाओं की समस्याओं पर काम करने का ढिंढोरा पीटते मिल जाएंगे। 24x7 काम करने वाला मीडिया है। सोशल मीडिया के वीर छोटी से छोटी बात पर भी पोस्ट करते हैं। लेकिन किसी को इस महिला के साथ हो रहा अत्याचार नहीं दिखाई दिया।

कांग्रेस ने भी अब प्रधानमंत्री से इस पीड़िता के साथ हुए अत्याचार का जवाब देने को कहा है। हापुड़ में भी कांग्रेस समेत लगभग सभी दलों का संगठन है। किसी को उसके साथ होने वाला अत्याचार नहीं दिखाई दिया। जब महिला मरणासन्न स्थिति में है तो सभी उसकी सुध लेने पहुंच गए हैं। 

जिस बाप पर अपने बच्चे की परवरिश और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी होती है उसी बाप ने पढ़ने लिखने की उम्र में उसको जानवरों की तरह घर से बाहर कर दिया। जब उससे एक बच्चा पैदा हो गया तो अपनी गलती सुधारने के बजाय उसे 10 हजार रुपये में बेच दिया। खरीदार ने उससे शादी करने के नाम पर सहानुभूति बटोर कर उससे एक और बच्चा पैदा कर दिया। और फिर अपना कर्ज चुकाने के लिए उसने उसे लोगों के पास भेजने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। उसके दबाव में न आने पर उसके साथ 14 लोगों ने रेप किया। फिर उसके पति के कहने पर उसको चुप करा दिया गया। 

अपने तो उसके साथ अत्याचार ही करते रहे पर उसे एक अजनबी का सहारा मिला। उसने उसे ढांढस बंधाया और उसका साथ दिया। थोड़ा साहस बांधकर वह हापुड़ पुलिस थाने में अपनी गुहार लेकर गई। पर उसकी वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के कार्यालय में भी सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन वहां भी बात नहीं बनी। हापुड़ के माहौल से परेशान होकर वह अपने इस अजनबी दोस्त के साथ मुरादाबाद चली गई। वहां भी दरिंदों ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। अंत में उसने अपने का आग लगाकर खत्म करने का प्रयास किया। किसी तरह से उसे बचा लिया गया। अब वह 80 फीसद जली अवस्था में दिल्ली के एक अस्पताल में जिंदगी के लिए जद्दोजहद कर रही है। 

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के प्रयास से हापुड़ थाने में मुकदमा दर्ज तो करा दिया गया है। लेकिन पुलिस पर अंगुली तो उठ चुकी है। ऐसा नहीं कि यह अकेली कहानी है।

देश में न जाने कितनी महिलाओं को इस तरह के हालात से गुजरना पड़ता है। इस तरह की वारदात के लिए हम कितना भी शासन और प्रशासन को दोष दें लेकिन ऐसे मामलों में समाज और सबसे अधिक जिम्मेदार अपने ही होते हैं। विशेष रूप से वे जिन पर हम लोग विश्वास करके चलते हैं। जिनसे अपनी सुरक्षा की उम्मीद करते हैं।

इस महिला के साथ भी ऐसा ही हुआ। समाज में अभी भी अच्छे लोग भी हैं। इसका प्रमाण उस अजनबी व्यक्ति ने दिया, जिसने सब कुछ जानते हुए उस पीड़िता के साथ हमदर्दी दिखाई। तमाम धमकियों के बावजूद उसकी मदद की।

देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कितने भी कानून बन गये हों। कितना भी बड़ा तंत्र बन गया हो। कितने संगठन इस क्षेत्र में सक्रिय हों। पर गरीब और बेबस महिलाओं के साथ क्या क्या होता है, यह बात इस पीड़िता के साथ हुई हैवानियत से समझ में आ जाती है। हापुड़ गैंग पीड़िता का मामला निर्भया कांड से कहीं कम नहीं है। 

पुलिस का क्या रवैया है। यह भी इस मामले में देखने को मिल रहा है। महिला का कहना है कि अपने साथ हुए रेप के बारे में उसने हापुड़ एसएचओ से शिकायत की पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नबंर(1076) पर भी कॉल किया लेकिन उसे नहीं सुना गया।

बताया जा रहा है कि दूसरे पति के साथ ही गांव वालों का भी यह कहना है कि उसके आरोप मनगढ़ंत हैं। उन लोगों का कहना है कि शादी के बाद से ही महिला की छोटी-छोटी बातों पर पुलिस को बुला लेने की आदत रही है। महिला ने ऐसे आरोप इसलिए लगाए हैं क्योंकि उसके पास कहीं और जाने का चारा नहीं है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि कोई महिला इस तरह की होगी तो वह अपने आप को जलाने का प्रयास क्यों करेगी। वह भी दूसरे शहर मुरादाबाद में जाकर।

दरअसल समाज में देखा जा रहा है कि अपने लोग ही महिलाओं के साथ अत्याचार कर रहे हैं। आप यौन शौषण के मामले देख लीजिए। उत्पीड़न के देख लीजिए। या फिर अत्याचार के। अधिकतर मामलों में वे ही लोग दोषी होते हैं जो किसी न किसी रूप में उनसे परिचित होते हैं। 

कहा जाता है कि महिलाएं बस घर में ही सुरक्षित हैं। ऐसे मामलों को देखकर तो ऐसा लगता है कि बाहर से ज्यादा महिलाएं घर में असुरक्षित हैं। जब घर में आकर ही पति की सहमति से कोई उसकी पत्नी के साथ रेप करे तो उसे क्या कहा जाएगा ? या फिर महिला का पति ही उसे किसी के साथ संबंध बनाने के लिए दबाव डाले तो फिर उसकी अस्मत कौन बचाएगा?

(चरण सिंह पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)








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