कर्नाटक बना 2019 के लिए विपक्षी एकता की नई धुरी

राजनीति , , बुधवार , 16-05-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। कर्नाटक में किस पार्टी की सरकार बनेगी और कितने दिन चलेगी यह तो वहां के राज्यपाल वजूभाई वाला ही बता सकते हैं। लेकिन कांग्रेस और जेडी (एस) की एकता ने न सिर्फ कर्नाटक बल्कि पूरे देश में एक राजनीतिक संदेश दिया है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद जिस तरह से कांग्रेस ने आगे बढ़कर बिना शर्त एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में सरकार बनाने का समर्थन दिया, उसके देश भर में राजनीतिक निहितार्थ खोजे जा रहे हैं। कांग्रेस और जेडी एस का चुनाव बाद यह गठबंधन आने वाले दिनों में देश की राजनीति में काफी उलट फेर कर सकता है। 2019 आम चुनाव के मद्देनजर यह पहल पूरे देश में क्षेत्रीय दलों को एक मंच पर लाने का आधार बन सकता है।  

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78 और जेडी (एस) को 38 सीट मिली है। 224 सदस्य वाले विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 112 सदस्यों की जरूरत होती है। सारे दल इस जादुई आंकड़े से दूर हैं। बीजेपी सरकार बनाने का दावा कर चुकी है। लेकिन जरूरी संख्या को पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में कांग्रेस और जेडी (एस) गठबंधन उस जादुई आंकड़े को पूरा कर रहा है। कहा जाता है कि दूध का जला छाछ को भी फूंक-फूंक कर पीता है। यही हाल इस समय कांग्रेस और जेडी (एस) का है। गोवा में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सत्ता से दूर होने का दर्द वह जानती है। जिसके कारण वह कर्नाटक विधान सभा चुनाव परिणाम आने के बाद तुरंत पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा से संपर्क करके समर्थन का ऐलान कर दिया। 

इंडियन एक्सप्रेस अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक न सिर्फ कांग्रेस बल्कि विपक्षी दलों के कई नेता काफी पहले से ही चौकन्ने हो गए थे। दोनों दलों को करीब लाने में ममता बनर्जी, मायावती, सीताराम येचुरी और के चंद्रशेखर राव की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने सबसे पहले एचडी देवगौड़ा से फोन पर बात की। ममता ने बिना देर किए दोनों दलों को एक होने की अपील की। मायावती, येचुरी और चंद्रशेखर राव ने भी देवगौड़ा से एक धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन की अपील की। विपक्षी नेताओं ने इस एकता से अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में क्या फायदे हो सकते हैं, इस पर भी चर्चा की। देवगौड़ा के हां करने के बाद सिंगापुर गए एचडी कुमारस्वामी से संपर्क किया गया। एचडी कुमारस्वामी जब इस खबर को सुने तो उनके आश्चर्य और खुशी को ठिकाना नहीं रहा। आंकड़ों के अनुसार यदि-

कांग्रेस और जेडी (एस) लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ते हैं तो गठबंधन को 22 और बीजेपी को मात्र 6 लोकसभा सीट ही मिलने की संभावना होगी। जबकि 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी कर्नाटक में 17 लोकसभा सीट जीती है। ऐसे में यह गठबंधन कांग्रेस और जेडी (एस) के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। दूसरा, दोनों दलों के मिलकर सरकार न बनाने से दोनों पार्टियों के विधायकों के टूटने की संभावना बनी रहेगी। ऐसे में दोनों दलों ने मिलना ही बेहतर समझा।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और एचडी देवगौड़ा के रिश्ते ठीक नहीं हैं। सिद्दारमैया पहले देवगौड़ा की पार्टी में ही थे। लेकिन दोनों नेता सारे मतभेदों को भुलाकर एक होने की राह पर काफी आगे चल चुके हैं। 

कर्नाटक की इस एकता से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल के अलावा आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल में भी असर हो सकता है। उत्तर प्रदेश में पहले ही सपा और बसपा के गठबंधन का ऐलान हो चुका है। कांग्रेस और रालोद भी देर सबेर इस गठबंधन के अंग होंगे। आन्ध्र में चंद्रबाबू नायडू और तेलंगाना में के चंद्रशेखर राव पहले से ही बीजेपी से नाराज हैं और विपक्षी गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। यही हाल ममता बनर्जी का भी है। तमिलनाडु की राजनीति इस मामले में कुछ अलग है। लेकिन जिस तरह से वहां हाल ही में कमल हासन और  रजनीकांत ने राजनीति में उतरने का ऐलान किया है, ऐसे में राज्य के कुछ दल विपक्षी मंच की तरफ आ सकते हैं। 










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