बर्बादी के रास्ते पर है भारत

कड़वा सच , , बृहस्पतिवार , 14-12-2017


india-communalism-scientific-mind-ideology

हिमांशु कुमार

आप किसी साम्प्रदायिक इंसान के विचारों पर ध्यान दीजिये

साम्प्रदायिक इंसान का पहला लक्षण तो यह है कि वह इस मूर्खता में डूबा हुआ होता है कि मेरा मजहब सबसे अच्छा है

आप ध्यान से देखिये कि वह साम्प्रदायिक इंसान औरतों की गुलामी के भी हक़ में होगा

वह मज़हब रवायतों परम्परा महान संस्कृति जैसी सड़ियल बातों का हवाला देकर औरतों के नौकरी करने, घर से बाहर निकलने के खिलाफ बातें करता है

इसी तरह वह साम्प्रदायिक इंसान, मजदूरों को कामचोर कहेगा अमीर सेठों की तारीफें करेगा और कहेगा कि अमीर अपनी मेहनत से अमीर बने हैं

ध्यान दीजिये साम्प्रदायिक इंसान हर प्रगतिशील विचार का विरोधी होता है

असल में आप साम्प्रदायिक ही तब बनते हैं जब आपका दिमाग वैज्ञानिक ढंग से नहीं सोचता

जैसे ही आप वैज्ञानिक ढंग से सोचते हैं आपको समझ में आ जाता है कि मेरा जन्म तो किसी भी मजहब में हो सकता था

इसलिए मैं अपने मजहब को सबसे अच्छा जो समझ रहा हूँ वह तो बेवकूफी है

और एक बार वह वैज्ञानिक ढंग से सोचना शुरू करता है तो फिर उसे यह भी समझ में आ जाता है कि दुनिया का हर इंसान आज़ादी और बराबरी चाहता है

इस तरह वैज्ञानिक ढंग से सोचना शुरू करने वाला औरतों की बराबरी का हिमायती बन जाता है

फिर वह मजदूरों की मेहनत की अमीरों द्वारा लूट और इसमें सरकार द्वारा अमीरों की तरफदारी की बात भी समझ जाता है

तो आप देख सकते हैं कि मूर्खता के तरीके से सोचना आपको हर विषय में मूर्ख बना देता है

और वैज्ञानिक ढंग से सोचना शुरू करते ही आप रोशन दिमाग बन जाते हैं और हर बात में प्रगतिशील बन जाते हैं

अब इस बात के आधार पर आप अपने देश की साम्प्रदायिक राजनीति को समझिये

हर देश में लोग अपनी राजनीति से उम्मीद करते हैं कि वह सभी को बराबरी और इन्साफ दिलायेगी

मजदूर, औरतें और कमज़ोर अल्पसंख्यक समूह सभी राजनीति से अपने हालात बदलने की उम्मीद करते हैं

लेकिन उसी समाज में ताकतवर, अमीर ताकतवर, मर्द और अपने मज़हब के आधार पर ताकतवर बने हुए लोग भी होते हैं

ये ताकतवर लोग राजनीति को बराबरी और समानता की तरफ नहीं जाने देना चाहते

इसलिए ये ताकतवर लोग जनता को बांटने वाली राजनीति की चाल खेलते हैं

ऐसा सारी दुनिया में किया जाता है

कहीं काले और गोरों के बीच नफरत फैला दी जाती है

कहीं शिया सुन्नी कहीं अलग-अलग कबीलों के बीच में मारकाट

इस तरह राजनीति हमेशा ताकतवर अमीर के हाथों में बनी रहती है

भारत में भी जो सवर्ण और परम्परागत तौर पर अमीर थे उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना करी

और इन्होंने भारत में साम्प्रदायिकता के आधार पर जनता के दिमागों में ज़हर फैलाना शुरू किया

और आज यह सत्ता पर बैठ गये हैं

इस साम्प्रदायिक राजनीति का नुकसान यह होता है कि यह जनता को मूर्खता और पिछड़ेपन में धकेल देती है

इस्लाम के नाम पर भी ऐसा ही किया जा रहा है

भारत में हिंदुत्व के नाम पर ऐसा ही हो रहा है

इस तरह की राजनीति की वजह से मजदूरों, औरतों और विद्यार्थियों की हालत बहुत खराब हो जाती है

चूंकि नफरत पर टिकी ऐसी राजनीति नौजवानों में ताकतवर होने का नकली दीवानापन पैदा कर देती है

जैसे हिटलर ने जर्मनी में और मुसोलिनी ने इटली में किया था और अपने देश को दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने का पागलपन पैदा किया और करोड़ से ज्यादा विरोधियों, बुद्धिजीवियों, यहूदियों की हत्या कर दी

आज कल आप देखते हैं कि समाज में बलात्कार बहुत बढ़ रहे हैं

बलात्कार भी तभी बढ़ते हैं जब समाज में ताकतवर होना एक अच्छी बात मानी जाने लगती है

तब पूरी राजनीति, पूरी सरकार, पूरी पुलिस, पूरा समाज ताकतवर के पक्ष में हो जाता है

तो आप देखते हैं कि बलात्कारी हत्यारे को पुलिस बचाती है समाज सरकार उसके पक्ष में मुकदमे लड़ती है

अंकित गर्ग, कल्लूरी कश्मीर में नार्थ ईस्ट में बलात्कारी सिपाहियों को बचाने के लिए सरकार ही मुकदमें लड़ रही है

एक साम्प्रदायिक समाज गरीबी, झगड़ों और हिंसा में फंस कर नष्ट हो जाता है

भारत उस बर्बादी के रास्ते पर है।

(हिमांशु कुमार गांधीवादी कार्यकर्ता हैं और आजकल हिमाचल प्रदेश में रहते हैं।) 






Leave your comment











Satishkumar :: - 12-14-2017
Sach h yahi sab to ho raha h samajh m per kisi ko bhi koi chinta nahi h sab apni takat badane m lage h