भारत-पाक के बीच रिश्तों के नये तराने की शुरुआत

विरासत , अहमदाबाद, मंगलवार , 12-06-2018


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। पूरे देश में चल रही घृणा और नफरत की आंधी में भी प्यार और भाईचारे का दीपक जलाए रखने वालों की कमी नहीं है। प्रेम और सौहार्द में विश्वास करने वाले ऐसे लोगों का मानना है कि एक दिन जीत उनकी ही होगी और देश के माहौल में जहर घोलने वालों को मुंह की खानी पड़ेगी। ऐसा सोचने वालों में केवल भारत के ही नहीं बल्कि पड़ोसी पाकिस्तान के लोग भी शामिल हैं। लिहाजा दोनों तरफ के लोगों ने मिलकर भाईचारे की इस जमीन को और मजबूत करने का संकल्प लिया है। भारत की तरफ से इसकी अगुआई मैगासेसे अवार्ड विजेता संदीप पांडेय कर रहे हैं। 

इसके तहत एक पदयात्रा निकाली जा रही है जो अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से शुरू होकर पाकिस्तान की सीमा पर स्थित नादेरवाई-इलियाबेट तक जाएगी। 19 जून 2018 से शुरू होने वाली ये यात्रा 30 जून को वहां पहुंचेगी। इसमें संदीप पांडेय के अलावा ढेर सारे दूसरे लोग भी शामिल होंगे। भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर इस तरह के प्रयास होते रहे हैं। और इसमें दोनों देश के सामाजिक संगठनों की विशेष भूमिका रही है। 

संदीप पाण्डेय ने आज इस सिलसिले में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सरकारें इस समस्या का हल नहीं निकाल सकती हैं। इसलिए उनकी जनता को आगे आकर रास्ता निकालना होगा। अब वक्त आ गया है कि सरकारें समस्याओं को हल करने के लिए जनता को आगे करें। अगर दोनों देशों की जनता के बीच मेल मिलाप कराया जाये तो उससे सौहार्द्र और बढ़ेगा। इस मौके पर संदीप पांडेय ने कहा कि जिस तरह से श्रीनगर–मुज़फ्फ़राबाद, वाघा–अटारी, मुनाबाओ–खोकरापार से एक दूसरे के देश में जाने के रास्ते हैं।

उसी प्रकार से गुजरात से भी आने जाने का रास्ता बनाया जाये। उन्होंने दोनों देशों के नागरिकों को वीज़ा पासपोर्ट मुहैया कराने की प्रक्रिया को और आसान बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर गुजरात के खावड़ा नाडा-बेट से आने जाने दिया जाये तो दोनों देशों की जनता में मेलजोल और बढ़ेगा। साथ ही कारोबार भी होगा। इसके अलावा सरहदी क्षेत्रों का विकास ऊपर से होगा। पाण्डेय ने दोनों देशों की सरकारों से जेल में बंद मछुवारों को तुरंत छोड़ने की मांग की। 

अंग्रेजों की नीति थी “बांटो और राज करो” इस नीति को कट्टरपंथी धार्मिक संगठनों द्वारा बल मिला। द्वि राष्ट्र नीति के तहत देश बंट गया। बंटवारे के बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते कड़वे बने हुए हैं। कई बार यह कड़वाहट जंग में भी तब्दील हो चुकी है। हालांकि इस कड़वे संबंध को भारत–पाकिस्तान के केवल कुछ राजनैतिक दल और उनके नेता ही बनाए रखना चाहते हैं। जबकि दोनों देशों की जनता तथा कारोबारी शांति चाहते हैं। सच ये है कि आम लोग ऐसा कोई टकराव नहीं चाहते हैं। 

इसके पहले भी संदीप पाण्डेय अपने साथियों के साथ 1999 में पोखरन पीस मार्च कर चुके हैं। उसके बाद 2005 में उन्होंने इंडो-पाक पीस मार्च कर दोनों देश के लोगों के दिलों को जोड़ने का प्रयास किया था। इस मार्च में उनके साथ मेधा पाटेकर, महेश भट्ट जैसे नामी लोग भी साथ थे। अबकी बार उनके साथ संजय तुला, कौशर अली सैय्यद, जयंती पंचाल इत्यादि होंगे। संदीप के सहयात्रियों का कहना था कि उत्तर-कोरिया और दक्षिण कोरिया अगर लंबे समय के टकराव के बाद साथ आ सकते हैं। जर्मनी में दुश्मनी की दीवार गिरायी जा सकती है तो भारत और पाकिस्तान अपने पुराने झगड़े क्यों नहीं भूल सकते हैं। 

कौशर अली सैय्यद का कहना था कि रॉ और आईएसआई के पूर्व प्रमुख एक साथ किताब लिख सकते हैं। सेना के बड़े अधिकारी और नेता एक मेज़ पर बिरयानी खाते हैं। फिर दुश्मनी में केवल दोनों देशों की सेना के जवानों की ही जान क्यों जाती है? 

उन्होंने दोनों देशों के बीच आना-जाना आसन करने के साथ ही आम जनता को एक दूसरे से मिलने की पूरी छूट देने की मांग की। उनका कहना था कि सामाजिक सौहार्द बने और बढ़े इसी लक्ष्य के साथ इस पदयात्रा को आयोजित किया जा रहा है। यात्रा का निम्नलिखित रूट होगा: 

19-6-18   साबरमती आश्रम से कलोल

20-6-18   कलोल  से नंदासन 

21-6-18    नंदासन  से मेहसाणा

22 -6-18   मेहसाणा से सीही 

23-6-18    सीही  से पाटन 

24-6-18    पाटन से रोडा

25-6-18    रोडा से थरा 

26-6-18    थरा से दियोदर 

27-6-18    दियोदर से भाभर 

28 -6-18   भाभर से सुईगाम 

29-6-18    सुईगाम से नादेश्वरी माता 

30-6-18    नादेश्वरी माता से इलियाबेट पाकिस्तान बॉर्डर 

290 किलोमीटर की इस पदयात्रा में बहुत सारे दूसरे नामचीन लोगों के भी भाग लेने की संभावना है। ये यात्रा 30 जून को पाक सीमा पर पहुंचेगी। इस मौके पर बताया जा रहा है कि सीमापार भी उसी तरह से दूसरे लोग जुटेंगे।


      




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