बलात्कार के आरोपी को राष्ट्रवादी कवच

ग्राउंड रिपोर्ट , , शनिवार , 17-02-2018


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प्रदीप सिंह

 

नई दिल्ली/जम्मू। कश्मीर के कठुआ जिले में आठ वर्षीय मुस्लिम बक्करवाल लड़की की यौन उत्पीड़न और हत्या का मामला सांप्रदायिक रंग ले चुका है। बलात्कार के आरेापी किशोर को बचाने के लिए बीजेपी नेता और हिंदू संगठन हाथ में तिरंगा लेकर विरोध-प्रदर्शन आयोजित कर रहे हैं। पुलिस ने बलात्कार के आरोप में जिस किशोर को गिरफ्तार किया है, वह गांव के पूर्व पटवारी का भतीजा है। इसके साथ ही क्राइम ब्रांच ने मामले को गंभीरता से न लेने और लापरवाही बरतने के आरोप में दो पुलिसकर्मियों को भी गिरफ्तार किया है। जम्मू-कश्मीर गठबंधन सरकार में साझेदार बीजेपी नेता इसे सांप्रदायिक रंग देने में जुटे हैं।

हिंदू एकता मंच के बैनर तले विरोध-प्रदर्शन करके गिरफ्तार आरोपियों को रिहा करने और मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। विपक्षी कांग्रेस के नेता भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। हिंदू एकता मंच के अध्यक्ष बीजेपी के राज्य सचिव विजय शर्मा हैं।

धरना-प्रदर्शन की खबर पाते ही राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एक ट्वीट किया, ‘‘कठुआ में बलात्कारी को बखने के लिए विरोध-प्रदर्शन हो रहा है। बलात्कार के आरोपी को बचाने के लिए तिरंगे  का इस्तेमाल करके राष्ट्रीय ध्वज के पवित्रता को भंग किया गया। आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और कानून अपना काम करेगा। ’’

लड़की अपने माता-पिता और दो बड़े भाइयों के साथ अक्टूबर में कारगिल से कठुआ आयी थी। कठुआ के रूसान गांव के जंगलों में स्थित अपने पक्के घर में सर्दियों भर रहने आई थी। इस गांव में दो दर्जन ब्राह्मण परिवार भी रहते हैं। उसके पिता ने 2003 में गांव के ही एक व्यक्ति से दो एकड़ जमीन खरीदी थी और घर बनाया था।

 

10 जनवरी को, उसने जंगल में एक दर्जन खच्चरों को चराने के लिए निकली। जानवरों को लेकर एसके साथ गए अन्य बच्चों का कहना है कि वह जंगल में कुछ खच्चरों के पीछे-पीछे गयी, जंगल में दूर भटक जाने पर वापस नहीं लौटी।

जानवरों को चराने गयी बच्ची के देर शाम तक वापस न आने पर परिजनों की चिंता बढ़ गयी। उसके पिता का कहना है कि अगले सुबह हीरा नगर पुलिस स्टेशन जाने के पहले हमने आस-पास उसे ढूढ़ा। एसएचओ सुरेश गौतम ने उन्हें दो दिन बाद आने के लिए कहा, और 12 जनवरी को प्राथमिकी दर्ज की। बक्करवालों के विरोध प्रदर्शन के बाद गौतम को निलंबित कर दिया गया है।17 जनवरी को, जगदीश लाल जो लड़की के परिवार को जानता था, उसने सूचना दी कि उन्होंने जंगल में लड़की के मृत शरीर को पाया।

लाश बरामद किए जाने के बाद पुलिस ने जासूसी कुत्तों को लेकर जगदीश लाल के जानवर बांधने वाले घर और गांव के पूर्व पटवारी के घर गए। पुलिस ने जगदीश लाल के पुत्र, उसके घरेलू नौकर और पूर्व पटवारी के पंद्रह वर्षीय भतीजे को हिरासत में ले लिया। बाद में पुलिस ने लाल के बेटे और उसके नौकर को छोड़ दिया और पूर्व पटवारी के 15 वर्षीय भतीजे को बाल सुधार गुह भेज दिया।

पूर्व पटवारी ने अपने भतीजे पर अपहरण के आरोप को गलत बताया है। जबकि, पुलिस का दावा है कि लड़के ने स्वीकार किया है कि वह लड़की को अपने चाचा के जानवर बंधने वाले घर में ले गया था। बलात्कार का विरोध करने पर उसने गला घोंट कर हत्या कर दी। पुलिस जांच पर हिंदू और बक्करवाल दोनों असंतोष जता रहे हैं। राज्य सरकार ने पहले मजिस्टे्रट जांच के आदेश दिए फिर इसे क्राइम ब्रांच को सौंप दिया। क्राइम ब्रांच ने किशोर से पूछताझ करने के बाद एसपीओ दीपक खजूरिया और एसपीओ सुरिंदर कुमार को गिरफ्तार कर लिया। हीरा नगर तहसील के रसना, कुटाह और अन्य गांवों के हिंदू ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आरोपियों को बक्करवाला के दबाव में गिरफ्तार किया गया है।

कल शुक्रवार को घग्वाल के परशुराम मंदिर में एक रैली हुई, जिसमें भाजपा के विधायक कुलदीप राज, अन्य पिछड़ा वर्ग विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष रछपाल वर्मा, पूर्व कांग्रेस विधायक गिरधारी लाल और पूर्व कांग्रेस एमएलसी सुभाष चंद्र शामिल थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि आरोपियों को रिहा नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। नेताओं ने कहा कि हम इस घटना की निंदा करते हैं। लेकिन हमारे लोगों को फंसाया नहीं जाना चाहिए। 

बक्करवाल, जो हर सर्दियों में हिंदू प्रभुत्व वाले गांवों में आते हैं। अब उन्हें उन्हें कुओं और तालाबों से पानी लेने से रोका जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बक्करवाल उन्हें उनकी जमीन से भगाना चाहते हैं। इस तरह के ग्रामीणों और बक्करवाल समुदायों के बीच तनाव के कारण  कि ग्रामीणों ने लड़की के शरीर को स्थानीय कब्रिस्तान में दफनाने नहीं दिया। अंततः उसे वहां से 8 किमी दूर कन्नला गांव में दफनाया गया। 

 


   


 

 

  

 

 






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