कश्मीर, मणिपुर, बस्तर और गांवों पर कायम है शहरों का साम्राज्य

ज़रा सोचिए... , , बुधवार , 10-01-2018


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हिमांशु कुमार

(गांधीवादी कार्यकर्ता हिमांशु कुमार को फेसबुक ने उनकी बस्तर से जुड़ी एक पोस्ट के चलते तीन दिनों तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। प्रतिबंध हटने के बाद हिमांशु कुमार ने पहली पोस्ट उसी विषय से जुड़ी डाली है। इसके जरिये कहा जा सकता है कि उन्होंने गांधीवादी तरीके से अपना प्रतिकार किया है। पेश है हिमांशु कुमार की वो पोस्ट-संपादक) 

हम जो देश भक्त लोग हैं उनके लिये मणिपुर तो भारत है,

पर मणिपुर के लोग देशद्रोही हैं,

हम जो देश भक्त लोग हैं उनके लिये कश्मीर तो भारत है,

पर कश्मीर के लोग देशद्रोही हैं,

हम जो देश भक्त लोग हैं उनके लिये बस्तर तो भारत है,

पर आदिवासी देशद्रोही हैं,

हमें कश्मीर की ज़मीन चाहिये,

पर कश्मीरी नहीं चाहिये,

हमें बस्तर के खनिज चाहिये,

पर आदिवासी नहीं चाहिये,

हमें पूर्वोत्तर की ज़मीन चाहिये,

पर वहाँ के लोग नहीं चाहिये,

अंग्रेजों को भी भारत की ज़मीन चाहिये थी,

भारत के लोगों से उन्हें कोई प्रेम नहीं था,

जब अँगरेज़ किसी दूसरे की ज़मीनों को कब्ज़ा करते थे,

तो उसे अंग्रेजों का साम्राज्य कहा जाता था,

अमेरिका भी जब दूसरे देशों पर कब्ज़ा करता है तो उसे,

अमेरिका का साम्राज्य कहा जाता है,

जब हम शहरों में रहने वाले अमीर लोग और हमारी सरकार,

कश्मीर, मणिपुर और बस्तर और देश के गाँवों पर पर कब्ज़ा करते हैं,

तब कश्मीर, मणिपुर और बस्तर और गाँव,

हमारा साम्राज्य कहलाता है

अँगरेज़ सेना के दम पर कब्ज़ा करते थे,

प्रेम से नहीं,

अमेरिका भी सेना के दम पर कब्ज़ा करता है,

प्रेम से नहीं,

भारत भी,

कश्मीर, मणिपुर और बस्तर और गाँव पर,

सेना और पुलिस के दम पर कब्ज़ा करता है,

प्रेम से नहीं

अँगरेज़ फौज़ें निहत्थे भारतीयों को मारती थीं,

अँगरेजी फौज़ें भारतीय औरतों से बलात्कार करतीं थीं,

अमेरिकी फौजी निहत्थे दुश्मनों को मारते हैं,

अमेरिकी फौजी दुश्मन औरतों से बलात्कार करते हैं,

हमारे फौजी और पुलिस भी निहत्थे मणिपुरियों, कश्मीरियों और आदिवासियों को मारते हैं,

हमारे फौजी और पुलिस वाले भी औरतों से बलात्कार करते हैं,

अँगरेज़ भी साम्राज्यवादी थे,

अमरीकी भी साम्राज्यवादी हैं,

भारत के अमीरों की सरकार भी साम्राज्यवादी है,

आजादी आयी लेकिन भारत के कुछ 

अमीर हाथों में सिमट गई,

असली आजादी की लड़ाई जिंदाबाद,

इसीलिये हमें लम्बे समय तक संघर्ष करने की जरूरत बताते हुए चिर युवा भगत सिंह ने दो नारे दिये हैं

साम्राज्यवाद मुर्दाबाद

इन्कलाब जिंदाबाद,

(हिमांशु कुमार गांधीवादी कार्यकर्ता हैं और आजकल हिमाचल प्रदेश में रहते हैं।)






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