चुनाव परिदृश्य साफ होने में समय लगेगा

साप्ताहिकी , , शुक्रवार , 15-03-2019


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चंद्रप्रकाश झा

17 वीं लोक सभा के चुनाव का परिदृश्य साफ तौर पर उभरने में अभी और समय लगेगा। वैसे तो निर्वाचन आयोग ने 9 मार्च की शाम नई दिल्ली के विज्ञान भवन में बुलाई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आम चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी जिसके तहत सभी सीटों के चुनावी परिणाम 23 मई को सामने आ जायेंगे। लेकिन इस चुनाव के लिए विभिन्न दलों के बीच गठबंधन और तालमेल ही नहीं उन सबके प्रत्याशियों की तस्वीर भी साफ होने में समय लगना स्वाभाविक है। ऐसा होने का एक बड़ा कारण देश के  29 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों की कुल मिलाकर 543 सीटों पर सात चरणों में 11 अप्रैल से 19 मई तक कराये जाने वाले मतदान की दीर्घ अवधि तो है ही। दूसरा बड़ा कारण उस मतदान के लिए उन चरणों की सम्बद्ध सीटों के लिए जारी की जाने वाली पृथक औपचारिक चुनाव अधिसूचना के दिन से नामांकन दाखिल करने, उनकी जांच और नामांकन पत्र वापस लेने की लम्बी प्रक्रिया भी है।

मौजूदा 16 वीं लोक सभा की पहली बैठक 3 जून 2014 को हुई थी। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार पांच वर्ष का उसका निर्धारित कार्यकाल तीन जून 2019 को स्वतः समाप्त हो जाएगा। 16 वीं लोक सभा में कुल मिलाकर 1615 घंटे कामकाज हुए जो पिछली लोकसभा में 2689 घंटे के कामकाज से 40 प्रतिशत कम है। लोकसभा में साधारण बहुमत के लिए 272 सदस्यों का समर्थन चाहिए। 16 वीं लोक सभा के चुनाव में भाजपा को 282 सीटें और उसके एनडीए गठबंधन को 336 सीटें मिली थी।

विधान सभा चुनाव

लोक सभा के साथ ही चार राज्यों - आंध्र प्रदेश , ओड़ीसा , सिक्किम और अरुणांचल प्रदेश की विधान सभा के भी नए चुनाव कराये जाएंगे। निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा कारणों से जम्मू -कश्मीर विधान सभा के नए चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है,  जो अभी भंग है। वहाँ की सभी 6 लोकसभा सीटों के लिए मतदान  पांच चरणों में 11 अप्रैल , 18 अप्रैल , 23, अप्रैल ,  29 अप्रैल और 6 मई को वोटिंग होगी। उन सबके नतीजे 23 मई को ही आएंगे।

अभी लोक सभा में अध्यक्ष और आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो मनोनीत सदस्यों को मिलाकर सदस्यों की कुल संख्या 545 है। 17 वीं लोक सभा की जिन 543 सीटों के लिए चुनाव होंगे उनमें से 13 सात केंद्र शासित प्रदेशों (कोष्ठक में सीटों की संख्या के साथ)  दिल्ली (सात) , अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह (एक), चंडीगढ़ (एक ), दादरा एवं नगर हवेली (एक), दमन एवं  दीव (एक), लक्षद्वीप (एक) और पुदुच्चेरी (एक) से हैं।  शेष 530 सीटें 29 राज्यों आन्ध्र प्रदेश (25), अरुणाचल प्रदेश (दो ),  असम (14 ) ,  बिहार(40),  छत्तीसगढ़ (11 ), गोवा ( दो ),  गुजरात ( 26 ) हरियाणा ( 10 ) ,  हिमाचल प्रदेश ( चार ) जम्मू - कश्मीर ( छह ),  झारखंड ( 14 ) , कर्नाटक( 28 ) , केरल( 20 ) , मध्य प्रदेश ( 29)  , महाराष्ट्र - 48 , मणिपुर -दो ,  मेघालय ( दो  ) , नागालैंड ( एक ) , उड़ीसा (  21 )  ,   पंजाब ( 13 ) , राजस्थान ( 25 ) , सिक्किम (एक ) , तमिल नाडु ( 39 )  , त्रिपुरा (दो  ),  उत्तराखंड (पांच ),  उत्तर प्रदेश (  80 ) पश्चिम बंगाल  (42 )और तेलंगाना ( 17) की हैं।

चुनाव कार्यक्रम

2004 के लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भी रविवार को ही किया गया था।  पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एसवाई कुरैशी ने चुनाव की तारीखों को लेकर ट्वीट किया कि  2004 में कार्यक्रम  29 फरवरी, 2009 में कार्यक्रम  2 मार्च और 2014 में 5 मार्च को कार्यक्रम  जारी हुई थी. नई लोक सभा का गठन 2004 में 1 जून , 2009 में  30मई  और  2014 में 3 जून को हुआ था।  इसलिए  2019 में नई लोक सभा का गठन  2 जून तक हो जाना चाहिए।  2004 के चुनाव 20 अप्रैल से 10 मई के बीच चार चरण में , 2009 के चुनाव 16 अप्रैल से 13 मई के बीच 5 चरण में और 2014 के चुनाव 7 अप्रैल से 12 मई के बीच 9 चरण में हुए थे।  कुरैशी के मुताबिक  2004 में 1 जून, 2009 में 30 मई और  2014 में 3 जून को लोकसभा का कार्यकाल खत्म हुआ था।

इस बार 2 जून को लोकसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। कुरैशी ने माना है कि इस बार थोड़ी देरी हुई है लेकिन अब भी वक़्त बचा हुआ है। विपक्ष का कहना है कि यह देरी इसलिए की गयी ताकि सरकार आचार संहिता लागू होने से पहले कुछ घोषणा कर सके। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इस आरोप से इनकार कर दिया है। कांग्रेस के अहमद पटेल ने आरोप लगाया कि सरकार ने आखिरी मिनट तक सरकारी पैसों का उपयोग अपने प्रचार के लिए करने की कोशिश की।

एनडीए

लोक सभा के 2014 में हुए पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) में शामिल 18 दलों ने 525 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किये थे। वह इनमें से 336 पर जीतने में सफल रही। भाजपा के 428 प्रत्याशियों में से 282 , शिव सेना के 20 में से 18 , तेलुगु देशम पार्टी ( टीडीपी ) के 30 में से 16 , अकाली दल के 10 में से चार , लोकजनशक्ति पार्टी के सात में से छह आरएलएसपी के 4 में से 3 , अपना दल के 2 में से 2 , पीएमके के 9 में से 1 , एआईएनआरसी के 1 में से 1 , नगा पीपुल्स फ्रंट के 2 में से 1 , एनपीपी के 7 में से 1 और स्वाभिमानी पक्ष के 2 उम्मीदवारों में से एक जीते।  लेकिन इस गठबंधन में शामिल 6 पार्टियां , हरियाणा जनहित कांग्रेस , राष्ट्रीय समाज पक्ष , केरला कांग्रेस नेशनलिस्ट , आरपीआई आठवले , डीएमडीके और एमडीएमके के कुल 27 प्रत्याशियों में से कोई नहीं जीत सका  . 11 दल -   मिज़ो नेशनल फ्रंट , नार्थ ईस्ट रीजनल फ्रंट , रिवोल्यूशनेरी सोशलिस्ट पार्टी ( बोल्शेविक ) , गोमांतक पार्टी , आई जे के ,  गोरखा जनमुक्ति मोर्चा , जन सेना , न्यू जस्टिस पार्टी , केडीएमके , झोराम नेशनलिस्ट पार्टी और मिज़ो पीपुल्स कॉन्फ्रेंस 2014 में चुनाव नहीं लड़े थे पर एनडीए के साथ थे।

चुनाव के बाद कई और दल  एनडीए में शामिल हो गए। बाद में    उपरोक्त कुल 29 दलों में से 16 - हरियाणा जनहित कांग्रेस , तमिलनाडु की एमडीएमके , डीएमडीके और  पीएमके , आंध्र प्रदेश की जन सेना , केरल की रिवोल्यूशनेरी सोशलिस्ट पार्टी ( बोल्शेविक ) , जनाधिपत्या राष्ट्रीय सभा , महाराष्ट्र के स्वाभिमानी पक्ष , बिहार के हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा , नागालैंड पीपुल्स फ्रंट  , कर्नाटक की केपीजेपी , आरएलएसपी ,  गोरखा जनमुक्ति मोर्चा , टीडीपी , जम्मू -कश्मीर की पीडीपी , असम गण परिषद् एनडीए से अलग हो गए। 2019 के लोक सभा चुनाव के ऐन पहले कुछ दल फिर एनडीए में लौट आये है जिनमें असम गण परिषद् प्रमुख है। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ अन्ना द्रमुक भी औपचारिक रूप से एनडीए में शामिल हो चुकी है। भाजपा का दावा है कि अभी एनडीए में 42 दल शामिल हैं जिनमें बिहार की जेडी  ( यू ) ,  पीएमके , एआईएनआर कांग्रेस  , बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट , नागालैंड पीपुल्स फ्रंट  , नेशनल पीपुल्स पार्टी , मिज़ो नेशनल फ्रंट , केएमडीके , सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट , गोवा फॉरवार्ड पार्टी , सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी आदि भी हैं। कांग्रेस को 44 सीटें ही मिली थीं।

(चंद्रप्रकाश झा वरिष्ठ पत्रकार हैं और न्यूज़ एजेंसी यूएनआई में कई वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं।)








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