मोदी के 20 वादे : कितने पूरे, कितने अधूरे

पड़ताल , , शुक्रवार , 15-03-2019


modi-amitshah-manifesto-implementation-election

जनचौक ब्यूरो

ये मानी हुई बात है कि नेता का कद उसकी बात से नहीं उसके काम से पता चलता है। पिछले लोकसभा चुनाव में यानी कि 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने काफी बड़े बड़े वादे किए थे। नरेंद्र मोदी की सरकार के पांच साल बीतने के बाद  यही वादे अब उनकी सरकार के दावे बनने चाहिए। आइए देखते हैं कि नरेंद्र मोदी के कितने वादे दावे बन पाए और कितने वादे महज जुमले निकले। 

दावा नंबर 1

2014 में नरेंद्र मोदी का पहला वादा था कि अगर उनकी सरकार बनी तो वे सौ दिन के अंदर अंदर विदेशों में जमा काला धन भारत वापस लेकर आएंगे। लगभग हर चुनावी सभा में नरेंद्र मोदी ने यह जुमला फेंका था। इस जुमले की असलियत यह है कि सरकार बनने के बाद अब जबकि सरकार जाने का वक्त आ चुका है, नरेंद्र मोदी विदेशों में मौजूद कालेधन में से एक रुपया भी भारत लेकर नहीं आ पाए हैं। इस बीच मोदी जी ने अपने नीरव मोदी और मेहुल भाई चौकसी और संदेसरा जैसे गुजराती दोस्तों को देश से हम सबका तीस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा विदेशों में ले जाने दिया है। अलबत्ता मोदी जी को ये जरूर लगा कि हमारी आपकी जेब में जरूर काफी सारा कालाधन छुपा हुआ है। नरेंद्र मोदी समकालीन भारतीय इतिहास के इब्राहीम लोधी कहे जाएंगे या फिर तैमूर लंग या फिर दोनों का मिक्सचर, ये आपने तय करना है, बहरहाल नोटबंदी करके नरेंद्र मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी है।

सैकड़ों लोगों की लाइनों में लगकर जान चली गई और जिस कालेधन के खिलाफ नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी करके जंग छेड़ी थी, वह तो नहीं आया, लेकिन हम सभी की जेब में जितने भी नोट थे, और घर में भी जितने नोट थे, वे सारे के सारे रिजर्व बैंक के पास पहुंच गए, ये खबर भी पिछले दिनों हम सभी देख चुके हैं। आगे समाचार ये है कि नोटबंदी करने के लिए शायद नरेंद्र मोदी को रात में या दिन में किसी वक्त सपना ही आया था, क्योंकि यह तो हमें पहले ही पता है कि नरेंद्र मोदी की कैबिनेट को भी नोटबंदी का नहीं पता था, खुद फाइनेंस मिनिस्टर और होम मिनिस्टर को नहीं पता था। अब आरटीआई में यह बात सामने आई है कि खुद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी नहीं पता था कि प्रधानमंत्री नोटबंदी जैसा कोई हाहाकारी कदम उठाने जा रहे हैं। 

दावा नंबर दो 

2014 के चुनावों में नरेंद्र मोदी जगह जगह घूमकर भाषण दिया करते थे कि अगर उनकी सरकार बनी तो वे आतंकवाद को जड़ से खत्म कर देंगे। आतंकवाद तो खत्म नहीं हुआ, अलबत्ता बीजेपी के कई सदस्य पाकिस्तानी जासूसी संस्था आईएसआई के लिए जासूसी करते पकड़े गए। इनमें से कई तो अभी भी गिरफ्तार हैं। असलियत यह है कि नरेंद्र मोदी की ही सरकार में आतंकवादियों में पहली बार ऐसी हिम्मत हुई कि वे सीधे सेना के बेस कैंप पर हमला करने लगे। उरी से लेकर पुलवामा जैसी आतंकवादी घटनाओं को लोग भूले नहीं हैं। वहीं नागालैंड में वे क्या समझौता करके आए हैं, इसका रहस्य अभी तक पूरे देश के सामने बना हुआ है।

दावा नंबर तीन 

2014 के चुनावों में नरेंद्र मोदी ने जुमला फेंका था कि अगर उनकी सरकार बन गई तो वे कश्मीर से धारा 370 हटा देंगे। कश्मीर से धारा 370 तो हटी नहीं, उल्टे आजादी के बाद पहली बार कश्मीर को किसी प्रधानमंत्री ने इस कदर तबाहो बरबाद कर दिया है कि बहुत सारे कश्मीरी बच्चों को अब अपना भविष्य भारत में कम और जैश ए मोहम्मद में ज्यादा दिखने लगा है। 

दावा नंबर चार 

ये वाला दावा तो अकेले नरेंद्र मोदी ही नहीं बल्कि बीजेपी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और इनके जितने भी संगठन हैं, सभी ने किया था। इन लोगों ने 2014 में वादा किया था कि राम मंदिर बनाएंगे। राम मंदिर बनाने के लिए पिछले दिनों अध्यादेश का भी शिगूफा छोड़ा, लेकिन जब देखा कि अध्यादेश महज वक्ती है तो उसका शिगूफा भी छोड़ना बंद कर दिया। इस शिगूफे का आलम ये रहा कि इलाहाबाद में आयोजित संघ की धर्म संसद में साधू ही नहीं पहुंचे। अंत में इन लोगों ने यह कहना शुरू किया है कि दोबारा सरकार बनवाई तो राम मंदिर बनाया जाएगा। इन शिगूफों के बीच ठोस सत्य यह है कि राम मंदिर अगर बन गया तो बीजेपी के हाथ से हिंदुत्व का मुद्दा निकल जाएगा क्योंकि पूजा हमेशा मंदिर में बैठे भगवान की होती है न कि मंदिर बनवाने वाले की। यही इस देश का इतिहास रहा है और बीजेपी इसे अच्छे से जानती है। तो जो लोग ये समझते हैं कि इस बार भी बीजेपी की सरकार अगर बनी तो राम मंदिर बन जाएगा, वे किसी बड़े धोखे में जी रहे हैं। 

दावा नंबर पांच

2014 में नरेंद्र मोदी जब चुनाव प्रचार कर रहे थे तब कर्नाटक से लेकर मुंबई तक में इन्होंने गोहत्या का मुद्दा उठाया था। नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि वे गो हत्या पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाएंगे। गो हत्या पर तो प्रतिबंध लगा नहीं और आज की तारीख यानी तेरह मार्च की रिपोर्ट यह है कि भारत दुनिया का दूसरे नंबर का बीफ निर्यातक बना हुआ है। यह दुनिया का अट्ठारह फीसद से अधिक बीफ निर्यात करता है। इतने बड़े बिजनेस का मालिक होने के बावजूद नरेंद्र मोदी की सरकार में गाय के नाम पर बेगुनाह इंसान पूरे देश भर में जगह जगह मारे जा रहे हैं और उनकी हत्याएं की जा रही हैं। हत्यारे नरेंद्र मोदी की जै जै कार करते हैं और पुलिस उन्हें पकड़ने से या तो डरती है या फिर पुलिस नरेंद्र मोदी से डरती है।

दावा नंबर छह 

2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने गंगा सफाई का वादा किया था। इसके लिए उन्होंने वाराणसी से चुनाव भी लड़ा था और यह जताया था कि वे गंगा किनारे के सांसद हैं तो गंगा साफ होगी। द वायर की 11 मार्च 2019 की एक्सक्लूसिव खबर है कि पिछले पांच साल में, जबसे नरेंद्र मोदी की सरकार बनी है, पिछले पांच साल से नरेंद्र मोदी ने गंगा सफाई के लिए होने वाली एक भी बैठक में न तो हिस्सा लिया है और न ही उन्होंने इसके लिए कोई बैठक बुलाई है। बाकी गंगा कितनी साफ हुई है और कितनी गंदी पड़ी है, यह किसी से भी नहीं छुपा है। 

दावा नंबर सात 

2014 में नरेंद्र मोदी ने युवाओं से सबसे बड़ा झूठ बोला था। उन्होंने युवाओं से वादा किया था कि हर साल उनकी सरकार दो करोड़ युवाओं को नौकरी देगी। सरकार बनने के पहले साल उन्होंने देश में रोजगार सृजन के लिए कुछ भी नहीं किया। युवाओं को नौकरी मिले, इसके लिए पिछले पांच सालों में उन्होंने एक भी योजना न तो बनाई और न ही लागू की। हालांकि इस बीच उन्होंने स्किल डेवलपमेंट और मेक इन इंडिया जैसी जुमलेबाजी वाली योजना जरूर फेंकी, जो कि सिरे से फेल हो गई। पिछले ही साल जब उन्हें यह पूरी तरह से पता चल गया कि वे युवाओं को नौकरी उपलब्ध करा पाने में पूरी तरह से फेल हो चुके हैं तो उन्होंने युवाओं को पकौड़े तलने की सलाह बिन मांगे ही दे डाली।

जब देखा कि युवा पकौड़े तलने के लिए तैयार नहीं हैं तो फिर वे युवाओं को नाले और नालियों से नाला गैस बनाने को कहने लगे। चुनाव की घोषणा होने से ठीक पहले नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा झूठ बोला कि उनकी सरकार में एमएसएमई यानी कि लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय के तहत तरह तरह के लघु और मध्यम उद्योगों में तकरीबन चौदह फीसद लोगों को नौकरी मिली। पिछले ही साल तमिलनाडु के सीएम ने वहां की विधानसभा में अकेले तमिलनाडु से नोटबंदी के बाद पचास लाख लोगों की नौकरी खत्म होने का आंकड़ा रखा था। यह सभी नौकरियां इसी लघु और मध्यम उद्योगों से खत्म हुईं। इसके अलावा नोटबंदी के चलते देश भर में अगर सबसे ज्यादा किसी की कमर टूटी तो वह इन्हीं लघु और मध्यम उद्योगों के मालिकों और मजदूरों की ही टूटी। 

दावा नंबर आठ 

2014 के चुनावी सभाओं में नरेंद्र मोदी ने जगह जगह जाकर लोगों से वादा किया था कि उनकी सरकार बनी तो वे गैस, डीजल, बिजली और पेट्रोल सस्ता कर देंगे। नरेंद्र मोदी के इस दावे पर हम कोई भी टिप्पणी नहीं करेंगे। इस दावे पर आप सभी कैसी भी टिप्पणी कर सकते हैं क्योंकि पिछले पांच सालों से जिस तरह से सरकार ने इन गैस डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ाए हैं और बढ़ाने के साथ ही साथ जिस तरह के बहाने बनाए हैं, उसके सच्चे भुक्तभोगी आप लोग ही हैं। इसलिए इस दावे पर आप लोग नीचे कमेंट बॉक्स में अपने मन की बात कह सकते हैं। 

दावा नंबर नौ 

2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि देश में जो तकरीबन 17 लाख संविदाकर्मी काम कर रहे हैं, वे उन सभी की नौकरी परमानेंट कर देंगे। हकीकत यह है कि पिछले पांच सालों में केंद्र की मोदी सरकार ने इस मुद्दे पर महज जुमलेबाजी की है। इसी साल बिहार में आशाकर्मियों की सबसे बड़ी हड़ताल परमानेंट करने और अन्य सुविधाओं के लिए हुई थी। ऐसा माना जा रहा है कि पिछले बीस सालों में दुनिया में सबसे अधिक संख्या में अगर महिलाओं ने सबसे बड़ी हड़ताल की है तो वह बिहार में आशा कर्मियों और आंगनवाड़ी कर्मियों की हड़ताल रही है। इसके अलावा देश का ऐसा एक भी जिला नहीं है जहां पर यह लोग हर महीने अपने स्थाईकरण की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने संविदाकर्मियों के स्थाईकरण का जो वादा किया था, वह पूरी तरह से खोखला निकला है। 

दावा नंबर दस 

नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि अगर उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बन गई तो तीन महीने के अंदर शिक्षामित्रों की सारी समस्याओं को न्यायिक तरीके से खत्म कर देंगे। आज असलियत यह है कि तीन महीने में शिक्षामित्रों को समस्याएं तो नहीं खत्म कर पाए लेकिन तीन महीने में इतना जरूर कर दिया कि उत्तर प्रदेश से शिक्षामित्रों को ही खत्म कर दिया गया। वह भी सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेकर। 

दावा नंबर 11

2014 में नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि उनकी सरकार बनी तो गरीबों के कर्ज माफ किए जाएंगे। वैसे कर्जमाफी का दांव सभी सरकारें खेलती रही हैं। अभी कांग्रेस ने भी तीन प्रदेशों का चुनाव इसी कार्ड पर जीता है। लेकिन कर्जमाफी की असलियत यह है कि इसका मजाक बनकर रह गया है। कहीं पर किसी को सत्तर रुपये की कर्जमाफी का सर्टिफिकेट दिया जा रहा है तो कहीं पर किसी का कर्ज माफ होकर कब उसपर दोबारा कर्ज चढ़ा दिया जा रहा है, यह भी नहीं पता चल रहा है। बल्कि नरेंद्र मोदी के इस वादे को याद दिलाने के लिए जंतर मंतर पर बड़े बड़े प्रदर्शन भी हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कर्ज माफी का कोई अता पता नहीं है। गरीबों की कर्ज माफी अभी तक लापता है। 

दावा नंबर बारह

सभी गन्ना किसानों को समयसे भुगतान करने का भी वादा सन 2014 में नरेंद्र मोदी से लेकर राजनाथ सिंह तक लगभग सारी ही सभाओं में किया करते थे। असलियत यह है कि गन्ना किसानों का बकाया चुका पाना तो दूर, नरेंद्र मोदी सरकार और बीजेपी की सभी राज्य सरकारें अभी तक अपनी ही सरकार में खरीदे गन्ने का मूल्य किसानों को नहीं दे पाई हैं। बकाया तो अभी बहुत दूर की बात है। सरकार की इस हरकत से किसान बेहद नाराज हैं और पुलवामा कांड के आसपास उन्होंने बड़ा मार्च भी शुरू किया था, लेकिन पुलवामा की घटना को देखते हुए उन्होंने अपना मार्च टाल दिया था। 

दावा नंबर तेरह 

2014 के चुनावों में बीजेपी का सबसे मुख्य मुद्दा भ्रष्टाचार था। नरेंद्र मोदी ने जगह जगह पर भ्रष्टाचार के मामले पर उस वक्त की सरकार पर हमला किया था। उन्होंने वादा किया था कि वे भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करेंगे। पिछले पांच सालों में नरेंद्र मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अडानी जी को खानें खदानें और जंगल बेच डाले हैं और अंबानी जी की कथा आप सभी जानते ही हैं। राफेल डील में हजारों करोड़ रुपये का घोटाला अब किसी से छिपा नहीं है। सीबीआई से लेकर अदालतों तक में जिस तरह से भ्रष्टाचार ने सबको तोता बना दिया, सभी ने देखा  है।

सीबीआई वाले राकेश अस्थाना के बारे में नई खबर यह है कि नरेंद्र मोदी जिस आगस्ता घोटाले वाले जमूरे को पकड़कर लाए थे, वह अब मोदी जी के ही खासमखास अधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ बयान दे रहा है कि उन्होंने उसे दुबई में कहा था कि भारत आआगे तो तुम्हारी जिंदगी नर्क बना दी जाएगी। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भी 2018 में सौ में से महज 41 नंबर ही दिए हैं। मतलब कि अभी भी तीन चौथाई चीजें भ्रष्टाचार की गंभीर शिकार हैं।

दावा नंबर चौदह 

किसानों की आय दो गुनी करने का वादा नरेंद्र मोदी के काफी जाने माने जुमलों में माना जाता है। 2014 के चुनाव में उन्होंने वादा किया था कि किसानों की आय दोगुनी कर देंगे। किसानों की आय दोगुनी तो हुई नहीं, अलबत्ता कर्ज के बोझ में आत्महत्या कर रहे किसानों को कांग्रेस ने कर्जमाफी का वादा करके अपनी ओर कर लिया है और तीन प्रदेशों में सरकार भी बना ली है। नरेंद्र मोदी की ही सरकार में किसानों ने जंतर मंतर पर अपने मरे हुए किसान भाइयों के कंकाल रखकर अपनी ही पेशाब पी। एक तरह से कह सकते हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों की आय दोगुनी तो नहीं की, लेकिन उन्हें उनका पेशाब जरूर पिला दिया, वह भी देश की राजधानी दिल्ली में, संसद जाने वाली सड़क पर। मुंबई में किसानों ने बहुत बड़ा मार्च किया और मुंबईकरों ने किसानों की आवाज समझी। बताते हैं कि आजाद पार्क में जब किसी ने देखा कि किसानों के पास चप्पल नहीं थे तो पता नहीं कहां से दो चार ठेले चप्पल भरकर लाया और वहीं बिखेर गया। 

लेकिन सरकार ने अभी तक किसानों की आवाज नहीं सुनी है और किसान आंदोलन एक बार फिर से तैयार है। दूसरी ओर किसान छुट्टा सांड़ों और गोवंश से भी परेशान हैं। सरकारी सख्ती होने के चलते वे उन्हें कुछ कर नहीं सकते और ये सब मिलकर उनके खेतों को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में खेती को एक और जानवर चरे जा रहा है। बात अगर किसान फसल बीमा योजना की करें तो अकेले महाराष्ट्र में ही इस वक्त बड़ी संख्या में किसानों को क्लेम का पैसा नहीं मिल रहा है, जबकि सन 1972 के बाद पहली बार महाराष्ट्र में इतना भीषण सूखा पड़ा है कि किसानों को अपने बच्चों को स्कूलों से निकालना पड़ रहा है, घर में खाने को नहीं है और कई जगहों पर तो किसान अब भीख मांग रहे हैं। 

दावा नंबर पंद्रह 

2014 में नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि उनकी सरकार में निर्भया जैसे कांड नहीं होंगे और महिलाओं की सुरक्षा की पूरी गारंटी की जाएगी। नरेंद्र मोदी की ही सरकार में हमने कठुआ रेप कांड जैसे मामले देखे, जिनमें खुद नरेंद्र मोदी के लोग जाकर बलात्कारियों के पक्ष में धरना प्रदर्शन कर रहे थे और जो लोग बलात्कार पीड़ितों का मुकदमा लड़ रहे थे, उन्हें जान से मारने की धमकियां दे रहे थे। फिर उन्नाव रेप कांड भी सामने आया जिसमें बीजेपी के ही एक बाहुबली विधायक कुलदीप सिंह सेंगर फंसे तो ठीक उसी वक्त नरेंद्र मोदी लंदन जाकर बोले कि रेप तो भई रेप होता है।

इसका राजनीतिकरण मत करिए। निर्भया रेप कांड से भारत की राजनीति पर चढ़ने वाले नरेंद्र मोदी ने रेप को लेकर इसी साल फिर से झूठ बोला और कहा कि उनके कार्यकाल में रेपिस्ट को महीने भर के अंदर सजाए मौत मिलने लगी है। अकेले 2016 में रेप की 19 हजार से भी अधिक घटनाएं दर्ज हुईं, लेकिन अभी 2019 चल रहा है और आप खुद सोचिए कि रेप की सजा मिलने की खबरें आपने कितनी देखीं या कितनी पढ़ीं? वहीं महिला आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी ने संसद में भी तब भी कुछ नहीं किया जब संसद का अधिवेशन चल रहा था और बड़ी संख्या में महिलाएं संसद के बाहर अपनी मांग लेकर खड़ी थीं। 

उल्टा यह जरूर हुआ कि नरेंद्र मोदी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और बीजेपी के कई सांसद विधायक हिंदू महिलाओं को दस दस बच्चे पैदा करने की सलाह देने लगे।  रेप के बाद पीड़िता के पुर्नवास के लिए निर्भया कोष बनाया गया था, जिस पर संसदीय समिति कई बार कह चुकी कि भैया, उसका पैसा पीड़ितों के पुर्नवास में लगाओ, उससे मकान न बनवाओ, लेकिन कोष का पैसा भवन निर्माण जैसे कामों में खर्च किया गया। और अधिकतर पैसा तो खर्च ही नहीं हुआ, मजबूरन सुप्रीम कोर्ट को उसमें हस्तक्षेप करके कहना पड़ा कि इस मामले में धन की नहीं बल्कि समुचित कार्ययोजना की कमी है। 

दावा नंबर सोलह 

2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि अगर उनकी सरकार बनी तो वे भ्रष्टाचार निरोधक लोकपाल बिल लेकर आएंगे। उनकी सरकार अब जाने को है, लेकिन अभी तक लोकपाल नहीं आया है। हालत यह है कि संसद में इसे चार साल पहले ही पास कर दिया गया था लेकिन अभी तक नरेंद्र मोदी ने इसे लागू नहीं किया है। कभी लोकपाल का जो तीर नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के लिए तैयार किया था और उसपर चलाया भी था, अब वही तीर कांग्रेस के पास है और कांग्रेस उसे लेकर नरेंद्र मोदी पर हमलावर हो गई है। राहुल गांधी अपनी रैलियों में कह रहे हैं कि अगर लोकपाल आता है तो उसके तहत सबसे पहली जांच नरेंद्र मोदी के खिलाफ राफेल मामले में होगी। वैसे नरेंद्र मोदी लोकपाल तो लागू नहीं कर पाए और उनका ये दावा झूठा निकला, लेकिन उन्होंने एक काम जरूर किया कि उन्होंने लोकपाल खोज समिति बना दी। समिति बनी हुई है और बनी रहेगी।  

दावा नंबर सत्रह 

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में अल्पसंख्यकों से वादा किया कि उनके जीवन स्तर को उंचा उठाने और उद्योग के क्षेत्र में उनके लिए सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी। इसमें कहा गया कि यह दुर्भाग्य की बात है कि आजादी के इतने बरसों बाद भी अल्पसंख्यकों का एक बड़ा समूह, विशेषकर मुस्लिम समुदाय गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा है। आधुनिक भारत समान अवसर वाला होना चाहिए। बीजेपी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि भारत के विकास में सभी समुदायों की समान भागीदारी होनी चाहिए। 

नरेंद्र मोदी की सरकार बनते ही अल्पसंख्यकों पर सुनियोजित तरीके से हमले बढ़े। नरेंद्र मोदी की ही सरकार में हमने मुजफ्फरनगर से लेकर सहारनपुर तक में अल्पसंख्यकों पर तरह तरह के बहानों से बीजेपी और इससे जुड़े संगठनों को हमला करते देखा। मॉब लिंचिंग बीजेपी की सरकार में अल्पसंख्यकों को जान से मारने का सबसे आसान बहाना बनी और मोदी के मंत्री मॉब लिंचिंग करने वालों का माला पहनाकर सम्मान करते हुए भी दिखे। अल्पसंख्यकों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के नाम पर नरेंद्र मोदी तीन तलाक के विरोध में कानून लेकर आए जबकि कानून तो सबसे पहले गलियों में उगे लगभग अनपढ़ और कुछ भी उल्टा सीधा बोलकर मासूम लोगों को बरगलाने वाले मुल्ले मौलवियों पर बनाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इन्हीं मुल्ले मौलवियों से नरेंद्र मोदी गलबहियां करते भी नजर आए, तो वह भी सिर्फ फोटो खिंचाने के लिए। वरना हमने उन्हें टोपी से मना करते हुए भी देखा है।

दावा नंबर अट्ठारह

नरेंद्र मोदी ने 2014 के चुनाव में जगह जगह घूमकर अपने भाषणों में बुलेट ट्रेन लाने का वादा किया था। भारत में बुलेट ट्रेन अभी तक आ ही रही है। बताते हैं कि पहले जापान से चली थी, अब चीन से चल रही है। इस बीच एक हाईस्पीड ट्रेन जरूर दौड़ा दी गई और उसकी स्पीड दिखाने के लिए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने उसकी वीडियो स्पीड बढ़ाकर ट्विटर पर अपलोड कर दी, ताकि लोग उनकी इस जानबूझकर की गई साजिश का हिस्सा बनकर बेवकूफ बन जाएं, लेकिन माननीय पीयूष गोयल साहब, लोग आपकी तरह नहीं हैं। रेलवे में हमने सबसे ज्यादा दुघर्टनाएं नरेंद्र मोदी के शासनकाल में देखीं और रेलवे बजट भी इन्हीं के कार्यकाल में हमेशा के लिए खत्म होते देखा। 

दावा नंबर उन्नीस 

 2014 के घोषणा पत्र में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य गारंटी मिशन सहित नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति तैयार की जाएगी और अस्पतालों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने हर राज्य में एम्स बनाने की भी घोषणा की थी। अभी तक कुछ राज्यों में एम्स बने हैं जो कि पूरी तरह से काम ही नहीं कर रहे हैं। मजबूरन मरीजों को दिल्ली के एम्स में ही चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके अलावा राज्यों के एम्स में भी भीषण भ्रष्टाचार शुरू हो चुका है और बीजेपी के चाहने वालों को मलाईदार पोस्ट दी जा रही हैं। नरेंद्र मोदी सरकार में ही हमने ऋषिकेश एम्स में मरीजों से होने वाली खुलेआम सरकारी लूट का पर्दाफाश देखा और जाना कि कैसे वहां के डायरेक्टर मरीजों से पैसा लूटकर अपनी कोठी बनवा रहे थे। अभी तक मरीजों से लूटा गया पैसा उन्हें वापस नहीं किया गया है और न ही डायरेक्टर पर कोई कार्रवाई की गई है। 

दावा नंबर 20

वैसे तो बीजेपी ने 2014 के चुनावों में जो मैनीफेस्टो जारी किया था उसमें बहुत सारी चीजें थीं और उनमें से एक भी पूरी तो दूर, अधूरी भी पूरी नहीं हुई है, लेकिन आखिर में हम बात करेंगे बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र में सबसे कोने में रखे एक वादे का, जिसका बीजेपी और नरेंद्र मोदी ने पिछले सत्तर सालों में, यानी कि आजादी के बाद सबसे ज्यादा सत्यानाश मारा है। 2014 के चुनावी मैनीफेस्टो में नरेंद्र मोदी ने न्यायिक यानी कि ज्यूडीशियल और पुलिस सुधार पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की बात कही थी।

वाकई पिछले पांच सालों में नरेंद्र मोदी ने इस तरफ सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित भी किया है। सबसे पहले बात न्यायिक सुधारों की करें तो नरेंद्र मोदी के ही शासनकाल में हम सभी पहली बार किसी जज की हत्या के गवाह बने। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज बीएच लोया, जो कि अमित शाह के खिलाफ चल रहे सोहराबुद्दीन फेक एनकाउंटर की सुनवाई कर रहे थे, उनकी संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मैगजीन कारवान ने सबसे पहले खुलासा किया कि यह मौत नहीं, बल्कि हत्या थी और इसके पीछे अमित शाह की सोची समझी साजिश थी। 

अमित शाह ने अपने पक्ष में फैसला करने का पूरा ड्राफ्ट तैयार करके जज लोया के पास साइन करने के लिए भेजा था, जिसपर साइन करने से जज लोया ने इन्कार कर दिया। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह ने उन्हें सौ करोड़ रुपये की रिश्वत भी ऑफर की, और जज लोया ने रिश्वत लेने से भी इन्कार कर दिया। इसके बाद जज लोया की हत्या करा दी गई। मीडिया में जब इससे रिलेटेड रिपोर्ट्स आईं तो आनन फानन में महाराष्ट्र सरकार ने इन्क्वायरी कराई और सुप्रीम कोर्ट में उस इन्क्वायरी की अधूरी रिपोर्ट साजिशन पेश की।

वहीं सुप्रीम कोर्ट में भी नरेंद्र मोदी सरकार ने जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ कैसे डील की, यह पिछले पांच सालों में हम सभी ने देखा। सीबीआई का मसला हो या राफेल डील में हुए घोटाले का मसला, हमने देखा कि कैसे सुप्रीम कोर्ट ने सभी तथ्यों और सबूतों को दरकिनार करते हुए ऐसे फैसले दिए जो कहीं न कहीं नरेंद्र मोदी के पक्ष में गए और जिसके बाद बहस तेज हुई कि क्या देश में इमरजेंसी लागू हो चुकी है जिसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट आजाद नहीं रह गया है?

 इसके अलावा न्यायिक सुधारों की दिशा में अभी तक ज्यूडीशियरी में न तो जजों की व्यापक ट्रेनिंग का इंतजाम हो पाया है और न ही जजों के सेलेक्शन में आरक्षण का और न ही जजों के प्रमोशन में आरक्षण का। इसकी वजह से देश की एक बड़ी आबादी खुद को न्यायपालिका से अलग थलग महसूस कर रही है। वहीं बात पुलिस सुधारों की करें तो हमने देखा कि कैसे उत्तर प्रदेश में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की मोदी भक्तों ने गोली मारकर हत्या कर दी और उसके बावजूद बीजेपी सरकार ने हत्यारे का नाम एफआईआर में भी नहीं डाला। बात अगर पुलिस की सैलरी से लेकर ट्रेनिंग और दूसरी सुविधाओं की करें तो पुलिस आज भी भारत में पीर भिश्ती बावर्ची का ही काम कर रही है जिसके एवज में उसे आजादी के पहले की वे सुविधाएं मिलती हैं, जो अंग्रेज दिया करते थे।









Tagmodi amitshah manifesto implementation election

Leave your comment