मुगल, मुसलमान और पाकिस्तान फुस्स! अब ईवीएम पर भरोसा

ख़बरों के बीच , , मंगलवार , 12-12-2017


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महेंद्र मिश्र

गुजरात चुनाव की तस्वीर अब बिल्कुल साफ हो गयी है। ये चुनाव बीजेपी के हाथ से निकलता हुआ दिख रहा है। पहले चरण की वोटिंग हो या नेताओं की चुनावी सभाएं सब यही संकेत कर रहे हैं। कल गांधीनगर में हार्दिक पटेल की भारी सभा और उसका फेसबुक पर रिकार्ड 50 हजार लोगों द्वारा देखा जाना और उसी समय पीएम मोदी की सभा में संख्या की कमी और फेसबुक पर महज तीन हजार लोगों का सुनना हालात को और साफ कर देता है। संसद को ठप कराना। 50 केंद्रीय मंत्रियों, 12 मुख्यमंत्रियों और अनगिनत सांसदों और विधायकों का चुनाव में लगाया जाना भी किसी काम नहीं आया। अपने पद और उसकी गरिमा को ताक पर रखकर बोल गए झूठ और गलत बयानों से रही सही प्रतिष्ठा भी जाती रही। आखिर में पीएम मोदी अपनी दया की भीख के सहारे अब चुनावी मैदान में जिंदा हैं। कल अहमदाबाद के कलोल की सभा में उनकी आंख से आंसू भर नहीं गिरे बाकी उन्होंने हर तरह का ‘विलाप’ कर डाला। 

बहुत लोगों को प्रधानमंत्री के इस स्तर रहित रवैये से अचरज हो सकता है। लेकिन इनको करीब से देखने और जानने वालों के लिए ये कोई नयी बात नहीं है। उनके साथ काम कर चुके और कभी अमित शाह के मेंटर और राजनीतिक गुरू रहे यतिन ओजा ने जनचौक से बातचीत में कुछ ऐसे ही खुलासे किए हैं जिसको सबको जानना चाहिए। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। यहां तक कि ये हत्या और एनकाउंटर तक करा सकते हैं। उनका कहना था कि हिंदू-मुसलमान इनका सबसे प्रिय विषय रहा है। एक उदाहरण के जरिये उन्होंने बताया कि नरहरि अमीन के कांग्रेस में रहते उनके एक चुनाव में अचानक हिंदू बस्तियों में सैकड़ों की तादाद में टोपी और दाढ़ी रखे मुसलमान कांग्रेस के पक्ष में वोट मांगते दिखने लगे। नरहरि अमीन ने इसके बारे में यतिन ओजा से बात की। क्योंकि प्रचार करने वालों को अमीन ने नहीं लगाया था। फिर ओजा ने कहा कि उनमें से 25-30 लोगों को उनके पास ले आइये असलियत सामने आ जाएगी। नरहरि अमीन ने जब इस काम को किया तो पता चला कि वो सारे हिंदू थे जो दाढ़ी रखकर और टोपी लगाकर प्रचार कर रहे थे। और इसी जोड़ी द्वारा भेजे गए थे। इसके जरिये जोड़ी का मकसद कुछ और नहीं बल्कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराना था।

यतिन ओजा ने प्रधानमंत्री मोदी के संदर्भ में कुछ ऐसे खुलासे किए हैं जिन्हें यहां लिखना उनके पद की मर्यादा के खिलाफ जा सकता है। लेकिन आप उनको साथ में दिए गए वीडियो में देख और सुन जरूर सकते हैं। 

https://www.youtube.com/watch?v=tWxgEjEchhY

इन बातों से समझा जा सकता है कि मोदी-शाह अपने राजनैतिक हितों को साधने के लिए किस हद तक जा सकते हैं। और ऐसे समय में जबकि उनकी पूरी प्रतिष्ठा, वजूद और साख दांव पर लगी हो तब उसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। अनायास नहीं उन्होंने कांग्रेस से निष्कासित नेता मणिशंकर अय्यर के नीच संबंधी बयान को मुद्दा बनाया। इससे भी आगे बढ़कर मोदी ने अय्यर के घर पर हुई पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और दूसरे राजनयिकों समेत भारत के सर्वोच्च पदों पर बैठ चुके लोगों की मौजूदगी पर न केवल सवाल उठाया बल्कि उसे देश और अपने खिलाफ षड्यंत्र तक बाता डाला।

लेकिन मोदी जी एक बात नहीं समझ रहे हैं। या फिर समझना नहीं चाहते। या इसके अलावा उनके पास कोई दूसरा चारा नहीं है। गुजरात में रहते पिछले 12 सालों तक उन्होंने सूबे की जनता को मुसलमान और पाकिस्तान का भूत दिखाया है। गोधरा से लेकर 2002 के दंगे देख चुकी जनता के लिए अब किन्हीं आरोपों के जबानी भाषण से विचलित नहीं किया जा सकता है। इस बीच उसने मोदी और शाह के हर रंग देखे हैं। हमसे आपसे या फिर किसी बाहरी से ज्यादा वो मोदी-शाह की जोड़ी को जानती है। यही वजह है कि लाख कोशिशों के बाद भी किसी चीज का उस पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। 

मोदी जी को एक चीज समझनी चाहिए। जब सामाजिक शक्तियों का संतुलन और रुख बदलता है तो उसके तूफान में बड़ी से बड़ी शख्सियतें भी तिनका साबित होती हैं। सामाजिक शक्तियां पक्ष में हों तो बूढ़े जेपी भी जवान हो जाते हैं और आपातकाल के खिलाफ लोहा लेने के लिए तैयार हो जाते हैं। लेकिन अगर विपरीत हों तो मोदी जैसा अजेय लगने वाला शख्स भी अपने ही घर में दया की भीख मांगने लगता है। इसलिए मौजूदा गुजरात एक दिन में नहीं बना है और न ही मोदी की ये हालत एक दिन में हुई है। मौजूदा चलायमान तस्वीर मोदी के 12 और बीजेपी के 22 सालों के सूबे के सामाजिक-राजनीतिक पर्दे पर चले चलचित्र का उपसंहार है। जिसमें जनता आखिरी तौर पर न्याय करने के लिए उतरी है। क्योंकि उसे पिछले 12 सालों में कुछ नहीं मिला सिवाय जुमलों और जहालत के। अगर किसी को मिला है तो वो टाटा, अदानी और अंबानी हैं। मोदी के शासन की कहानी जनता के लुटने, पिटने और उससे छिनने की कभी न खत्म होने वाली दास्तान है। 

https://www.youtube.com/watch?v=tWxgEjEchhY

चुनावों की पलटती बाजी की बात अब बीजेपी खेमे के भीतर भी मानी जाने लगी है। टेलीग्राफ को अहमदाबाद से रिपोर्ट कर चुके एक पत्रकार की बात पर भरोसा किया जाए तो कई बीजेपी नेता इस बात को अब खुलकर कहने लगे हैं। और इसके लिए सीधे अमित शाह और मोदी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। ऐसे में जबकि मुसलमान, मुगल, अलाउद्दीन और पाकिस्तान काम नहीं आया तो मोदी-शाह को अब सिर्फ और सिर्फ ईवीएम पर भरोसा है। ये बात अब बिल्कुल साफ हो चुकी है कि हवा और जनता का रुख बीजेपी के खिलाफ है। और उसके हिसाब से पार्टी कतई चुनाव नहीं जीतने जा रही है। बावजूद इसके अगर बीजेपी की सरकार बनती है तो वो ईवीएम सरकार होगी न कि जनता की सरकार। 






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