एक भयंकर त्रासदी थी नोटबंदी: राहुल गांधी

मुद्दा , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 08-11-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। नवंबर 8 का दिन हमेशा भारत के इतिहास में एक बदनुमा दाग के रुप में याद किया जाएगा। दो वर्ष पूर्व आज ही के दिन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र पर नोटबंदी के रुप में एक तानाशाही भरा निर्णय थोप दिया था। उस दिन रात के 8 बजे उन्होंने टेलीविजन पर आकर एक-तरफा घोषणा की, जिस पर हम सब जानते हैं कि उनके आर्थिक सलाहकारों की भी सहमति नहीं थी। नोटबंदी की उस एक घोषणा के साथ मोदी ने भारत की 86 प्रतिशत प्रचलित मुद्रा को परिचलन से बाहर कर दिया, जिससे सारी अर्थव्यवस्था चरमरा कर बैठ गई। ये बातें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कही हैं। 

पार्टी की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि नोटबंदी एक भयंकर त्रासदी थी। भारत ने पहले भी अनेक त्रासदियों का सामना किया है, अनेक बार ईर्ष्या ग्रस्त बाहरी दुश्मनों ने देश को आघात पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन नोटबंदी की त्रासदी अपने आप में एक अकेली घटना थी - एक ऐसा आत्मघाती कदम था, जिसने लाखों जिंदगियों को बर्बाद कर दिया और भारत में हजारों छोटे व्यापारों को नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का सबसे बड़ा कुप्रभाव भारत के सबसे गरीब लोगों पर पड़ा जिन्हें अपनी छोटी-छोटी जमा राशियों को बदलवाने के लिए कई-कई दिनों तक कतारों खड़े रहना पड़ा।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 120 से अधिक लोग कतारों में खड़े होकर मौत के मुंह में समा गए, हमें यह नहीं भूलना चाहिए। लाखों छोटे और मंझोले व्यवसाय बर्बाद हो गए तथा अनौपचारिक क्षेत्र तो पूरी तरह से तबाह ही हो गया।

उनका कहना था कि वर्ष 2016 के बाद से दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों द्वारा नोटबंदी के आघातपूर्ण परिणामों के विश्लेषण से ये साबित हुआ कि ये एक ऐसा आत्मघाती कदम था जो अपने किसी भी उद्घोषित उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सका। नोटबंदी को लेकर सरकार के तथाकथित उद्देश्यों की सूची में लगातार वृद्धि होती रही।

गांधी ने कहा कि नोटबंदी के घोषित लक्ष्यों में नकली नोटों की समस्या से निपटना, आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई, कालेधन को स्थायी रुप से समाप्त करना, लोगों की निजी बचत को बढ़ाना और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने जैसे तमाम दावे सरकार की ओर से किए गए, लेकिन दो साल के बाद भी सरकार इन सभी उद्देश्यों पर पूरी तरह विफल रही। कुल मिलाकर इस सारी प्रक्रिया का परिणाम सिर्फ विनाश रहा।

कांग्रेस अध्यक्ष का कहना था कि मोदी के नोटबंदी के निर्णय के कारण भारत में कम से कम 15 लाख लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी और अर्थव्यवस्था में हमारे सकल घरेलू उत्पाद में एक प्रतिशत की कमी आई।

उन्होंने सरकार के मौजूदा रवैये पर तगड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इस ऐतिहासिक भूल की दूसरी बरसी पर हमारे अयोग्य वित्त मंत्री सहित सरकार के सभी स्पिन डॉक्टर इस अक्षम्य और नोटबंदी के आपराधिक निर्णय को सही ठहराने का हर असंभव प्रयास कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि सरकार जितना भी छिपाने का प्रयास करे, अंतत: देश को ये पता चल जाएगा कि नोटबंदी मात्र एक दोषपूर्ण और गलत तरीके से कार्यान्वित आर्थिक नीति ही नहीं, अपितु एक सुनियोजित आपराधिक वित्तीय घोटाला भी था।

 

नोटबंदी की पूरी सच्चाई अभी तक बाहर नहीं आई है। भारत के लोग तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक इसकी पूरी सच्चाई सामने नहीं जाती।  








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