सरकारी कंपनी की कभी आधी रही रिलायंस ने दी टर्नओवर में इंडियन ऑयल को मात

रवीश की बात , , बुधवार , 22-05-2019


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रवीश कुमार

चीन की ह्यूवेई (Huawei) कंपनी को लेकर दुनिया भर में विवाद हो रहा है। मोबाइल हैंडसेट और टेलिकाम उद्योग के लिए ज़रूरी समान बनाने के मामले में यह कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी हो गई है। अमरीका ने इस कंपनी पर बैन लगा दिया है। अमरीकी कंपनियां ह्यूवेई के साथ कारोबार नहीं कर सकती हैं। गूगल ने ह्यूवेई से अपना नाता तोड़ लिया है। गूगल एन्ड्रायड आपरेटिंग सिस्टम और गूगल प्ले स्टोर उपलब्ध कराती है। दुनिया भर के स्मार्ट फोन में 90 प्रतिशत एन्ड्रायड हैं। 2018 में ह्युवेई ने 20 करोड़ मोबाइल हैंडसेट बेचा है। इन उपभोक्ताओं पर बड़ा असर पड़ सकता है।

अमरीका ने राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण चीन की इस कंपनी को बैन किया है। भारत में भी सवाल उठ रहा है कि क्या ह्यूवेई को यहां कारोबार करने की इजाज़त दी जानी चाहिए। जहां कहीं भी टेलिकाम कंपनी अपना नेटवर्क बनाती है उसमें ज्यादातर उपकरण ह्यूवेई के बनाए होते हैं। इससे नाता तोड़ने पर यह होगा कि जो नेटवर्क लगा है उसका रख-रखाव कैसे होगा, इसे लेकर बहस हो रही है। टेलिकाम कंपनियों के लिए नया ढांचा तैयार करना मुश्किल होगा। क्योंकि ह्यूवेई के बहुत से उपकरण इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी राइट्स से संरक्षित हैं। 5 जी का ढांचा तैयार करने के लिए भारत और अन्य देशों के नीति-निर्माता ह्यूवेई पर निर्भर हो चुके हैं। नोकिया और एरिक्सन भी ऐसे उपकरण सप्लाई करते हैं मगर काफी महंगे हैं और छोटी कंपनी हैं।

अमरीकी रक्षा प्रतिष्ठानों का मानना है कि ह्यूवेई का चीन की सेना के साथ गहरा ताल्लुक है। आशंका है कि इसके उपकरणों के ज़रिए चीन की सेना पर्दे के पीछे से बहुत सारा डेटा जमा कर लेगी। किसी खास मौके पर संवेदनशील डेटा का इस्तेमाल चीन अपने पक्ष में कर लेगा। विवाद की स्थिति में दुश्मन देश के नेटवर्क में तबाही मचा देगा। अमरीका की छह सुरक्षा एजेंसियों ने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि उपभोक्ता ह्यूवेई के बनाए मोबाइल हैंडसेट का इस्तेमाल न करें। चीनी ब्रांड के इस्तेमाल से बचें। एक तर्क यह भी है कि अमरीका ह्यूवेई पर बैन के बहाने व्यापार युद्ध में चीन पर दबाव बना रहा है। लेकिन इस कंपनी को लेकर ब्रिटेन और रूस में भी खलबली मची हुई है।

मैंने यह जानकारी बिजनेस स्टैंडर्ड के संपादकीय से ली है जिसने ह्यूवेई के भारत में आपरेशन की वकालत की है। लिखा है कि भारत के नीति नि र्माता सुनिश्चित करें कि अमरीकी बैन का भारत में 5 जी के ढांचे के विस्तार पर असर न पड़े। अखबार ने यह भी लिखा है कि 5 जी की सुरक्षा को लेकर समझौता भी नहीं किया जा सकता है। ह्यूवेई से उन सवालों के बारे में जवाब मांगा जाना चाहिए जिसे लेकर अमरीका में विवाद हो रहा है।

इस साल मार्च में 2 करोड़ 20 लाख टेलिफोन उपभोक्ता कम हो गए। बिजनेस स्टैंडर्ड ने लिखा है कि आपरेटर ही अपने उन उपभोक्ताओं को हटा रहे हैं जिनसे बहुत कम राजस्व मिलता है। दूसरी तरफ मुकेश अंबानी के जियो के उपभोक्ता बढ़ते जा रहे हैं। मार्च महीने में उसके करीब एक करोड़ उपभोक्ता बढ़ गए।

पंजाब नेशनल बैंक तीन बैंकों का अधिग्रहण करने जा रहा है। ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स, आंध्र बैंक और इलाहाबाद बैंक। यह अधिग्रहण अगले तीन महीनों में हो सकता है। इसे देखते हुए इन बैंकों के शेयर में भी गिरावट दर्ज की गई है।

रिलायंस इंडस्ट्री ने राजस्व के मामले में इंडियन ऑयल कारपोरेशन को पीछे छोड़ दिया है। मार्च 31 की समाप्ति पर इंडियन ऑयल कारपोरेशन का टर्नओवर 6 लाख 17 हज़ार करोड़ का रहा और रिलायंस इंडस्ट्री का 6 लाख 23 हज़ार करोड़ का हो गया। दस साल पहले रिलायंस इंडस्ट्री IOC का आधा भी नहीं थी। इन दस सालों में अलग-अलग सेक्टर में विस्तार किया। पिछले साल तक IOC सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी थी जो ONGC से पिछड़ गई। ऑयल रिफाइनिंग, पेट्रो केमिकल और गैस का कारोबार करने वाली IOC का कुल मुनाफा 23.6 प्रतिशत घट गया है।

(ये लेख वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है।)


 










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