संघ के चंगुल में फंसे रहने पर मिलेगी गरीबी, भूख और दंगा

विमर्श , , सोमवार , 25-03-2019


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हिमांशु कुमार

आरएसएस हिंदुत्व की बात करता है

यह कौन सा धर्म है ?

भारत के किसी धर्म ग्रंथ में हिन्दू शब्द नहीं है

अगर आप संघ के कार्यकर्ताओं के सामने यह तर्क देते हैं

तो वे तुरंत कहते हैं कि नहीं हमारा धर्म सनातन धर्म है

ठीक है तो इसी पर चर्चा कर लेते हैं

सनातन का अर्थ है जो हमेशा से चला आ रहा है

तो भारत में हमेशा से क्या चला आ रहा है ?

भारत में क्या सिर्फ ब्राह्मण ग्रन्थ और ब्राह्मणों द्वारा दिया गया वैदिक ज्ञान ही सनातन है?

क्या भारत में जैन दर्शन सनातन का हिस्सा नहीं है ?

अगर है तो जैन दर्शन में तो ईश्वर का ज़िक्र नहीं है

इसी तरह क्या बौद्ध विचार सनातन का हिस्सा नहीं है ?

अगर बौद्ध दर्शन सनातन का हिस्सा है तो बौद्ध दर्शन ना तो ईश्वर को मानता है ना आत्मा को

इसी तरह कपिल मुनि का सांख्य दर्शन भी ईश्वर को नहीं मानता

भारत में वैदिक दर्शन के अलावा सांख्य न्याय वैशेशिका मीमांसा योग आदि भी हैं

इसके अलावा चार्वाक का नास्तिक विचार भी है जो ईश्वर आत्मा और पुनर्जन्म को भी नहीं मानते

इसके अलावा आदिवासियों की अपनी मान्यताएं हैं

अलग समुदायों की अलग मान्यताएं हैं

लेकिन संघ इस सब के बारे में चुप्पी लगा लेता है और राम मन्दिर निर्माण को हिन्दू धर्म का मुख्य लक्ष्य बताता है

जबकि भारत की किसी भी विचार धारा में मूर्ति पूजा का कोई ज़िक्र नहीं है

भारत में मूर्ति पूजा बुद्ध की मूर्तियों की पूजा के बाद शुरू हुई

बहुत सारे मन्दिर तो बौद्ध मन्दिरों को तोड़ कर बनाए गये हैं और बुद्ध की मूर्ति को ही मुकुट पहना कर विष्णु बना दिया गया है

लेकिन संघ को सच्चाई और इतिहास से कोई लेना-देना नहीं है

संघ को तो दंगा फसाद करके सत्ता पर बड़ी जातियों और अमीरों के कब्ज़े को बनाए रखना है

इसलिए संघ सनातन को हिन्दू में बदल देता है और उसका मुख्य लक्ष्य बाबरी मस्जिद तोड़ने को बनाता है

याद रखिये संघ की रुचि राम मन्दिर निर्माण में भी नहीं है

संघ की रुचि हिन्दुओं को मुसलमानों के खिलाफ भड़काने में है

इसलिए वह मस्जिद तोड़ने में तो रुचि लेता है

लेकिन मन्दिर निर्माण को लम्बा खींचता है ताकि समाज में नफरत का महौल ही मुख्य राजनैतिक मुद्दा बना रहे

और जायज़ मज़दूरी का सवाल या फसल की वाजिब कीमत या ज़ात का सवाल या औरतों की बराबरी के सवाल कभी भारत की राजनीति के केन्द्रीय मुद्दे ना बन सकें

याद रखिये भारत की बदहाली तब तक बनी रहेगी जब तक भारत की राजनीति ऊपर दिए गये मुद्दों पर नहीं चलाई जायेगी

यह काम भारत के नौजवानों को करना है

लेकिन भारत के नौजवानों को तो हनुमान की जाति पता करने पाकिस्तान को व्हाट्सएप द्वारा सबक सिखाने और आस पास के गरीब मुसलमानों को पीटने के काम में लगा दिया गया है

भारत के नौजवान अगर अपनी बदहाली को बदलने के लिए नहीं जागते और संघ के चंगुल में ही फंसे रहेंगे

तो भारत और लम्बे समय तक भूख, गरीबी और दंगे फसादों में ही फंसा रहेगा 

 

 

 

(हिमांशु कुमार गांधीवादी कार्यकर्ता हैं और आजकल हिमाचल प्रदेश में रहते हैं।) 








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