पांच साल और 15 घोटाले

मुद्दा , नई दिल्ली, मंगलवार , 26-03-2019


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जनचौक ब्यूरो

स्मृति ईरानी सांसद निधि घोटाला 

स्मृति ईरानी पर आरोप है कि उन्होंने राज्यसभा की सांसद और केंद्रीय मंत्री के पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार किया। उनका भ्रष्टाचार सबसे पहले गुजरात के एक आईएएस ने पकड़ा। फिर कैग ने भी इस घोटाले को पकड़ा और पिछले साल यानी कि 2018 में कैग ने अपनी रिपोर्ट नंबर चार में स्मृति ईरानी के काले कारनामे उजागर किए। कैग के मुताबिक, बिना किसी निविदा प्रक्रिया के एमपीएलएडी फंड यानी सांसद निधि से करीब 6 करोड़ का भुगतान किया गया, जिसमें 84,53,000 का फर्जी भुगतान शामिल है। दरअसल स्मृति ईरानी ने सांसद बनने के बाद गुजरात के आणंद जिले के माघरोल गांव गोद लिया था। स्मृति ईरानी ने फोन करके ‘शारदा मजदूर कामदार सहकारी मंडली’ नामक सहकारी संस्था को क्रियान्वयन का कॉन्ट्रैक्ट दिलवाया। बहरहाल, स्मृति ईरानी के इस घोटाले पर गुजरात हाईकोर्ट भी सख्त हो गया है. कार्यवाहक चीफ जस्टिस ए एस दवे और जस्टिस बीरेन वैष्णव की पीठ ने मामले में सरकार की ओर से अब तक की गई जांच की स्थिति के बारे में भी जानकारी मांगी है।

पीयूष गोयल शेयर घोटाला

मोदी सरकार के प्रभावशाली मंत्री पीयूष गोयल ने भी घोटाला किया है। पियूष गोयल ने दस रुपये कीमत के शेयर 9,950 रुपये में ऐसी कंपनी को बेचे, जो ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी रही है. ऐसा तब हुआ जब वह ऊर्जा मंत्री थे। कांग्रेस ने पीयूष गोयल पर आरोप लगाया कि ऊर्जा मंत्री रहते कंपनियों, शेयर और अघोषित संपत्ति की जानकारी भी गोयल ने छुपाई और अपने पद का दुरुपयोग किया।

अडानी पॉवर घोटाला 

कोयला और बिजली उपकरण में ओवर प्राइसिंग के जरिए अडानी समूह ने 50 हजार करोड़ का घोटाला किया है। डीआरआई  यानी राजस्व खुफिया निदेशालय की 97 पन्नों की रिपोर्ट में अडानी से जुड़े ग्रुप अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड के भी नाम हैं। डीआरआई ने अडानी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दरअसल चीन और दक्षिण कोरिया से उपकरण सीधे आते हैं, लेकिन जो इनवॉइस होते हैं वो संयुक्त अरब अमीरात के रास्ते आते है, जहां बिल में बदलाव करके कीमत ज्यादा दिखाई जाती है। फिर इन उपकरणों की कीमत जनता से अधिक बिजली रेट लगाकर वसूली जाती है। बिजली पर दो रुपया टैक्स प्रति यूनिट अडानी टैक्स के तौर पर लग रहा है। इसके अलावा डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने कोयला आयात के मामले में भी अडानी का 29 हजार करोड़ रुपये का घोटाला खोज निकाला है। दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका इस घोटाले की एसआईटी जांच की मांग कर रही है।

व्यापम घोटाला 

एसआईटी के आंकड़े बताते हैं कि व्यापम घोटाले में अब तक 40 संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं तो कांग्रेस का कहना है कि अब तक कुल 46 लोग इस घोटाले में मारे गए हैं। मारे गए लोगों में पत्रकार अक्षय सिंह भी शामिल हैं। मध्य प्रदेश व्यापम यानी व्यावसायिक परीक्षा मंडल घोटाले का रहस्य गहराता जा रहा है। घोटाले को उजागर करनेवाले गवाहों और आरोपियों की संदिग्ध हालात में एक के बाद एक मौत हो रही है। ये घोटाला 2013 में तब सामने आया, जब आरोप लगे कि प्री मेडिकल टेस्ट - पीएमटी की मेरिट लिस्ट में 300 से ज्यादा फर्जी उम्मीदवारों के नाम हैं। बाद में घोटाले की जब परतें खुलीं तो पता चला कि सिर्फ मेडिकल एडमिशन ही नहीं, शिक्षकों से लेकर कई सरकारी नौकरियों में बहाली का भी फर्जीवाड़ा चल रहा है। शुरुआती जांच के बाद इस घोटाले से जुड़े कई बड़े नाम सामने आए, जिनमें मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव, राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री बीजेपी के लक्ष्मीकांत शर्मा, घोटाले का सूत्रधार डॉक्टर जगदीश सागर और राज्य में पीएमटी एक्जाम इंचार्ज सी के मिश्रा शामिल थे। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अभी तक करीब 2000 लोगों को गिरफ्तार किया है।

नीरव मोदी घोटाला 

2011 से नीरव मोदी को पीएनबी से बिना किसी गारंटी के गैरकानूनी तरीके से बिना बैंक के सॉफ्टवेयर में एंट्री किए लेटर ऑफ अंटरटेकिंग (एलओयू) जारी होते गए और जनवरी 2016 तक यह बात पीएनबी के किसी भी अधिकारी या आरबीआई की जानकारी में नहीं आई। हर साल बैंकों में होने वाले ऑडिट और उसके बाद जारी होने वाली ऑडिट रिपोर्ट भी इस फर्जीवाड़े को नहीं पकड़ पाई। बात एक या दो एलओयू की नहीं बल्कि 150 एलओयू जारी होने की है। नीरव मोदी के साथ साथ कई और कारोबारियों ने इसी तरह से घोटाला किया जिसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडनवीस ने उनकी मदद की।

इसके तहत 20 हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया गया। जनवरी 2018 में यह घोटाला सामने आया और मोदी जी ने छोटे मोदी यानी नीरव मोदी को आराम से देश छोड़कर जाने दिया। मामला सिर्फ नीरव मोदी का ही नहीं है, नरेंद्र मोदी की सरकार ने विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी समेत 31 कारोबारियों को हमारा पैसा लेकर विदेश भागने दिया है। इनमें प्रमुख हैं- आशीष जोबनपुत्र, पुष्पेश कुमार वैद्य, संजय कालरा, वर्षा कालरा और आरती कालरा, सौमित जेना, विजय कुमार रेवा भाई पटेल, सुनील रमेश रूपाणी, पुष्पेश कुमार वैद्य, सुरेंद्र सिंह, अंगद सिंह, हरसाहिब सिंह, हरलीन कौर, अशीष जोबनपुत्र, जतीन मेहता, नीरव मोदी, नीशल मोदी, अमी नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, चेतन जयंतीलाल संदेशरा, दीप्ति चेतन संदेशरा, नितिन जयंतीलाल संदेशरा, सभ्य सेठ, नीलेश पारिख, उमेश पारिख, सन्नी कालरा, आरती कालरा, संजय कालरा, वर्षा कालरा, हेमंत गांधी, ईश्वर भाई भट, एमजी चंद्रशेखर, चेरिया वी. सुधीर, नौशा कादीजथ और चेरिया वी. सादिक। 

हेमा मालिनी जमीन घोटाला 

नरेंद्र मोदी की बीजेपी से ही सांसद रहीं हेमा मालिनी पर भी जमीन के मामले में घोटाला करने के आरोप लगे हैं। हेमा मालिनी को उनके डांस स्कूल के लिए करोड़ों रुपये की कीमती सरकारी जमीन महज 70 हजार रुपये में दी गई। हेमा मालिनी मथुरा से बीजेपी की सांसद हैं और उन्हें महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने अंधेरी-ओशिवरा जैसे महंगे इलाके में सिर्फ 35 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से 2000 वर्ग मीटर जमीन नाट्यविहार कला केंद्र के नाम से बनने वाले डांस स्कूल के लिए आवंटित की है। फिल्म अभिनेत्री और बीजेपी सांसद हेमा मालिनी को उनके डांस स्कूल के लिए करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन महज 70 हजार रुपये में देने के बाद मचे बवाल के बाद महाराष्‍ट्र सरकार ने 1984 के उस गवर्नमेंट रेजॉलूशन (जीआर) को रद्द कर दिया है जिसके तहत हेमा मालिनी सहित कई लोगों को सस्‍ते दर पर जमीन मुहैया कराई गई थी. ऐसा होने के बाद अब किसी को सस्‍ते में जमीन नहीं मिल पाएगी।

चिक्की घोटाला 

महाराष्ट्र सरकार में ग्रामीण और बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे को जो पैसा आदिवासी बच्चों के स्कूल के लिए चिक्की, कालीन, बर्तन, किताबें, नोटबुक्स, वॉटर फिल्टर और दूसरे सामान खरीदने के लिए मिला था, उसकी वे चिक्की खरीद कर खा गईं। बीजेपी की इस फायरब्रांड नेता पर आरोप है कि इसने बच्चों के लिए जो सामान खरीदने थे, उसमें 206 करोड़ रुपए का घोटाला किया। पंकजा मुंडे ने यह घोटाला ठेका नियमों को नजरअंदाज करके किया। आरोप है कि पंकजा मुंडे के डिपार्टमेंट ने कुछ खास ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए एक ही दिन 13 फरवरी को 24 सरकारी आदेश जारी कर दिए।

जबकि महाराष्ट्र सरकार का नियम है कि 3 लाख रुपए से अधिक कीमत के हर सामान की खरीदी सिर्फ ई-टेंडर के जरिए होनी चाहिए। लेकिन नवी मुंबई की जगतगुरु कंपनी, नासिक की एवरेस्ट कंपनी, सिंधु दुर्ग जिले की सूर्यकांता सहकारी महिला संस्था, साई हाईटेक और नीतिराज इंजीनियर्स को करोड़ों का काम बिना ई-टेंडर के दिए जाने की बात सामने आई और उसकी खरीद में गड़बड़ी भी पाई गई। पंकजा मुंडे के ऊपर ये भी आरोप है कि उन्होंने अपनी पसंद की कंपनियों से बच्चों के खाने का सामान खरीदा। जो खरीदारी हुई उसका कोई टेंडर भी नहीं भरा गया था। 

जय शाह पुत्र अमित शाह का घोटाला 

नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के एक साल के अंदर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी का कारोबार 16,000 गुना बढ़ गया. एक साल में जय शाह वल्द अमित शाह की कंपनी की इनकम 50,000 रुपये से बढ़कर 80 करोड़ रुपये हो गई। ये बात रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) में दाखिल किए गए दस्तावेजों से सामने आई. इस घोटाले के लिए औने पौने दाम पर सरकार से जमीन भी हासिल की गई। कंपनी की बैलेंस शीटों और आरओसी से हासिल की गई वार्षिक रिपोर्टों से ये बात उजागर होती है कि 2013 और 2014 के मार्च में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्षों में शाह की टेंपल एंटरप्राइज़ प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कोई ख़ास उल्लेखनीय कारोबार नहीं कर रही थी और इन वर्षों में कंपनी को क्रमशः 6,230 और 1,724 रुपये का घाटा हुआ. 2014-15 में कंपनी ने महज 50,000 के राजस्व पर 18,728 रुपये का लाभ दिखाया. 2015-16 में कंपनी का टर्नओवर आसमान में छलांग लगाते हुए बढ़कर 80.5 करोड़ रुपये को छू गया. 

एनपीए घोटाला 

अपने चाहने वालों को लोन देकर नरेंद्र मोदी ने पांच लाख करोड़ रुपये से भी अधिक का एनपीए घोटाला किया है। यह किसी और की नहीं बल्कि खुद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट है कि 30 जून 2014 से लेकर दिसंबर 2017 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एनपीए बढ़कर सीधे सीधे तीन गुना हो चुका है। रिजर्व बैंक ने बताया कि 30 जून 2014 तक कुल एनपीए 2 लाख 24 हजार 542 करोड़ रुपये था और जिसे नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2017 तक बढ़ाकर 7 लाख 23 हजार 513 करोड़ रुपये कर दिया। इतने बड़े पैसे कहां गए, इसका कुछ कुछ पता चला है। बीजेपी के कई नेताओं के रिश्तेदार और जानने वाले पनामा पेपर्स से लेकर कई और बड़ी चोरियों में पकड़े गए हैं जिनमें उन्होंने भारी मात्रा में पैसे इधर से उधर किए थे। उधर नरेंद्र मोदी के दाहिने हाथ कहे जाने वाले अजित डोभाल के दोनों पुत्र ऑलरेडी टैक्स हैवेन में इसी का धंधा कर रहे हैं। 

चावल घोटाला 

छत्तीसगढ़ में रमन सिंह की सरकार ने भी 36 हज़ार करोड़ रुपये का चावल घोटाला किया है। धान का कटोरा कहा जाने वाले छत्तीसगढ़ में रमन सिंह और उनके घर वालों ने मिलकर जो घोटाला किया है, वहां के विधानसभा चुनावों में ये एक मेन मुद्दा भी बना। अब इस घोटाले में जांच के आदेश हो चुके हैं। यह घोटाला तब पकड़ में आया जब छत्तीसगढ़ के एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने 12 फरवरी 2015 को राज्य में नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के 28 ठिकानों पर एक साथ छापा मार कर करोड़ों रुपये बरामद किये थे. आरोप है कि इस छत्तीसगढ़ के छत्तीस हजार करोड़ी इस चावल घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने आरोपियों से एक डायरी भी बरामद की थी, जिसमें 'सीएम मैडम' समेत तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के कई परिजनों के नाम कथित रुप से रिश्वत पाने वालों के तौर पर दर्ज़ थे।

आरोप है कि इस कथित डायरी के 107 पन्नों में विस्तार से सारा कथित लेन-देन दर्ज़ था लेकिन एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने इस डायरी के केवल 6 पन्नों का सुविधानुसार उपयोग किया। एंटी करप्शन ब्यूरो के तत्कालीन मुखिया मुकेश गुप्ता ने सार्वजनिक तौर पर इस मामले को लेकर स्वीकार किया था कि इस घोटाले के तार जहां तक पहुंचे हैं, वहां जांच कर पाना उनके लिये संभव नहीं है। आरोप है कि धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में राइस मिलरों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और इसके बदले करोड़ों रुपये की रिश्वतखोरी की गई। इसी तरह नागरिक आपूर्ति निगम के ट्रांसपोर्टेशन में भी भारी घोटाला किया गया। इस मामले में 27 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ किया गया था।

पेट्रोलियम और गैस घोटाला 

मामला केजी बेसिन का है जहां पर नरेंद्र मोदी ने अपने यार दोस्तों से साठगांठ करके गुजरात सरकार और बैंकों के 19,576 करोड़ रुपये डुबो दिए। नरेंद्र मोदी ने गुजरात मॉडल के नाम पर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया और सरकारी निगम को नुकसान पहुंचाया। मोदी ने 2005 में घोषणा की थी कि जीएसपीसी को केजी बेसिन में 2,20,000 करोड़ रुपये के मूल्य का 20 हजार अरब घन फीट गैस का भंडार मिला है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग ने काफी दिन तक खोजबीन की, लेकिन आज सन 2019 तक कैग को उस केजी बेसिन में अभी तक कोई गैस नहीं मिली, अलबत्ता मोदी जी इस बीच नाला गैस बनाने की तरकीब निकाल लाए। इसी जीएसपीसी से जुड़ा एक और मामला है जिसमें नरेंद्र मोदी पर आरोप है कि उन्होंने 10651 करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा के नाम पर खर्च किए लेकिन ये पैसे उन्होंने कहां खर्च किए हैं, न तो उन्होंने इसका हिसाब दिया और न ही इन पैसों का जिक्र कॉरपोरेशन के एकाउंट में करने दिया। कैग ने केजी बेसिन का जो ऑडिट किया, उसके मुताबिक जीएसपीसी 64 ‘गैस ब्लॉक्स’ की मालिक थी।

जीएसपीसी ने इन 64 गैस ब्लॉक्स में से 45 गैस ब्लॉक्स को सरेंडर कर दिया, जिससे 2,992.72 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह सरेंडर एक खास पूंजीपति को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया। बगैर किसी टेंडर के जीएसपीसी ने दो ‘ज्वाइंट वेंचर पार्टनर’ बना लिए. ये थे- ‘जियो ग्लोबल रिसोर्सेस’ और ‘जुब्लिएंट ऑफशोर ड्रिलिंग प्राइवेट लिमिटेड’. एक अंबानी की कंपनी तो दूसरी बिरला की कंपनी। दोनों कंपनियों को अलग-अलग 10-10 प्रतिशत हिस्सा दिया गया। कमाल की बात यह है कि जियो ग्लोबल रिसोर्सेस को 10 प्रतिशत हिस्सा मुफ्त में दिया गया, जबकि मोदी जी के मुताबिक जीएसपीसी के पास 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का गैस भंडार था. इतना ही नहीं, जीएसपीसी ने इन दोनों प्राइवेट कंपनियों की ओर से 2,319.43 करोड़ रुपये का खर्च भी किया, जिसकी एक फूटी कौड़ी भी इन कंपनियों ने सरकार को वापस नहीं दी. 2,319.43 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान सरकारी खजाने को हुआ. जीएसपीसी ने कई ऑयल व गैस ब्लॉक्स में एक और कंपनी गुजरात नेचुरल रिसोर्सेस लिमिटेड (जीएनआरएल) से भी ज्वाइंट वेंचर किया. जीएनआरएल उस समय के गुजरात के पेट्रोलियम मंत्री, सौरभ पटेल व उनके परिवार की कंपनी है। मोदी जी की नाक के नीचे उनके मंत्री अपने विभाग की सरकारी कंपनी से ज्वाइंट वेंचर कर रहे थे। जीएनआरएल का नाम ‘पनामा पेपर्स’ में नामित दो कंपनियों से जुड़ा है, जिन्हें जीएनआरएल की सब्सिडियरी बताया जाता है. जीएसपीसी से जुड़े सब अधिकारी भारत सरकार में सर्वोच्च पदों पर आसीन हैं।

जब गुजरात का 20,000 करोड़ जीएसपीसी में डूब रहा था, उसी समय नरेंद्र मोदी ने उर्जित पटेल को जीएसपीसी का ‘इंडिपेंडेंट डायरेक्टर’ व ‘चेयरमैन, ऑडिट कमिटी’ नियुक्त कर रखा था। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें आरबीआई का गवर्नर नियुक्त किया गया। इसी प्रकार डीजे पांड्यन, जो जीएसपीसी के चीफ एक्ज़िक्यूटिव आफिसर थे, मोदी जी ने उन्हें अक्टूबर, 2014 में गुजरात का चीफ सेक्रेटरी बनाया और फरवरी, 2016 में वे एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के वाइस प्रेसिडेंट बन गए। जीएसपीसी के पूर्व एमडी तपन रे भी जून, 2015 में डायरेक्टर जनरल, एनआईसी, अगस्त, 2015 में भारत सरकार के कंपनी सचिव और अक्टूबर, 2015 में सेबी के डायरेक्टर बन गए. जीएसपीसी के 2014 से 2016 तक मैनेजिंग डायरेक्टर रहे अतानू चक्रवर्ती को भी फरवरी, 2016 में मोदी ने भारत सरकार में डायरेक्टर जनरल, हाईड्रोकार्बन नियुक्त कर दिया. 4 अगस्त, 2017 को वित्तीय तौर से 20,000 करोड़ डुबोने के बाद जीएसपीसी के 80 प्रतिशत शेयर को भारत सरकार की नवरत्न कंपनी ‘ओएनजीसी’ द्वारा 7,738 करोड़ में खरीद लिया गया. हालांकि 2005 से आज तक जीएसपीसी के केजी बेसिन ब्लॉक से कोई गैस नहीं मिल पाई, फिर भी ओएनजीसी ने इसे क्यों खरीदा?  

टेलीकॉम घोटाला

नरेंद्र मोदी की सरकार में भारत का टेलीकॉम सेक्टर पूरी तरह से बैठ चुका है। कारण- एक खास पूंजीपति को पूरा का पूरा टेलीकॉम सेक्टर सौंपने की नरेंद्र मोदी ने साजिश की है। टेलीकॉम घोटाले पर नंबर एक पर तो रिलायंस वाला मामला है ही, लेकिन सबसे पहले हमारे अपने बीएसएनएल की बात। बीएसएनएल इम्प्लाइज यूनियन का आरोप है कि नरेंद्र मोदी सरकार बीएसएनएल को बेचने की साजिश रच रही है और इसी के चलते लगातार बीएसएनएल को कमजोर किया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि फोर जी कनेक्शन, जिससे कि आप भी अभी अपना इंटरनेट चला रहे हैं, उसे बेचने का लाइसेंस मोदी जी ने बीएसएनएल को दिया ही नहीं। फोर जी कनेक्शन का सबसे बड़ा लाइसेंस रिलायंस को दिया गया, फिर एयरटेल, वोडाफोन जैसी कंपनियों को दिया गया। इतना ही नहीं, पूरे देश भर में बीएसएनएल के कर्मचारी इस मांग को लेकर हड़ताल पर भी बैठे कि बीएसएनएल को फोर जी का लाइसेंस दिया जाए, फिर भी नरेंद्र मोदी के कान में जूं तक नहीं रेंगी।

बीएसएनएल को नुकसान पहुंचाते हुए नरेंद्र मोदी ने प्रत्यक्ष तौर पर रिलायंस को 4800 करोड़ रुपये का एम्पायर खड़ा करने दिया, जो कि सीधे सीधे इस सरकारी कंपनी का हो सकता था। अभी मुकेश अंबानी जियो के से हर तीसरे महीने पांच सौ से सात सौ करोड़ रुपये कमा रहे हैं। यानी कि सालाना ढाई हजार करोड़ रुपये से ज्यादा। इस पैसे में सबसे बड़ा हिस्सा बीएसएनएल का ही है जिसका कि पूरे देश में सबसे बड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर है। टेलीकॉम सेक्टर में रिलायंस को तकरीबन सत्तर हजार करोड़ रुपयों की छूट अलग अलग बहानों से नरेंद्र मोदी ने दिलवाई है और इसकी वजह से पूरे देश भर का टेलीकॉम सेक्टर बैठ चुका है। इसके अलावा नरेंद्र मोदी ने छह टेलीकॉम कंपनियों पर अधिकारियों से जुर्माना न लगाने को कहा जिसकी वजह से 45 हजार करोड़ रुपये का घोटाला अकेले टेलीकॉम सेक्टर में और भी हुआ।

किसान फसल बीमा योजना घोटाला 

नरेंद्र मोदी ने किसानों की फसल का बीमा करने के नाम पर राफेल से भी बड़ा घोटाला किया है, लेकिन चूंकि मामला किसानों से जुड़ा हुआ है, इसलिए शहरी लोगों का ध्यान इस तरफ गया ही नहीं। किसान फसल बीमा योजना में अकेले रिलायंस ने महाराष्ट्र से कुल 173 करोड़ रुपये लिए लेकिन किसानों को सिर्फ 30 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इस तरह से अकेले रिलायंस को सिर्फ महाराष्ट्र से 143 करोड़ रुपये का मुनाफा नरेंद्र मोदी ने कमवाया। इसमें से किसानों ने रिलायंस को 19 दशमलव 2 करोड़ रुपये दिए थे और केंद्र और राज्य सरकार ने हमारे पैसों से 77-77 करोड़ रुपये दिए थे। ये हमारे ही पैसे हैं क्योंकि सरकार के पास पैसों के पेड़ नहीं होते। किसान बीमा योजना के नाम पर बीमा कंपनियों को नरेंद्र मोदी ने 65 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा दे दिए हैं और ये सारी रकम कागजों पर दर्ज है। 

राफेल घोटाला

राफेल घोटाला भारत के रक्षा क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है। डिफेंस में इतना बड़ा घोटाला भारतीय इतिहास में कहीं नहीं मिलता। यह घोटाला करके नरेंद्र मोदी वाकई इतिहास पुरुष बन चुके हैं। राफेल घोटाले में सबसे पहला आरोप है कि नरेंद्र मोदी ने अपने दोस्त अनिल अंबानी को अवैध तरीके से ठेका दिलवाया। 31 हजार करोड़ रुपये का यह ठेका असल में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को मिलना था, जिसे लड़ाकू हवाई जहाज बनाने का पुराना एक्सपीरियंस है और यह कंपनी देश की सबसे सम्मानित सरकारी कंपनियों में से एक है।

इसके बावजूद नरेंद्र मोदी ने खुद राफेल वालों से बोलकर यह ठेका अपने दोस्त अनिल अंबानी को दिलाया। इसके अलावा राफेल डील में कुल 126 लड़ाकू हवाई जहाज मिलने थे जिन्हें नरेंद्र मोदी ने घटाकर 36 कर दिया। मामला सुप्रीम कोर्ट में गया और ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी ने  सुप्रीम कोर्ट पर भी अवैध तरीके से दबाव डाला। लेकिन इसके बाद द हिंदू समाचार पत्र ने एक के बाद एक करके मामले की कलई खोलकर रख दी तो सरकार ने कहा कि कागजात चोरी हो गए हैं और वो चोरी द हिंदू अखबार ने की है। 

नोटबंदी घोटाला

नोटबंदी करके नरेंद्र मोदी भारतीय इतिहास के सबसे बड़े घोटाला पुरुष बन चुके हैं। नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के पीछे तर्क दिया कि इससे कालेधन पर रोक लगेगी। बहरहाल नोटबंदी से इतना जरूर हुआ कि करोड़ों लोगों की नौकरी छिन गई, सैकड़ों लोगों की जान लाइन में लगे लगे निकल गई। नरेंद्र मोदी का नोटबंदी घोटाला इतना बड़ा है कि इसने सीधे सीधे भारत की जीडीपी को तगड़ा नुकसान पहुंचाया। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि नोटबंदी से जीडीपी को सवा दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसे लेकर दुनिया के 108 अर्थशास्त्रियों ने पर्चा भी लिखा, जिसे नरेंद्र मोदी के प्रख्यात अर्थशास्त्री अरुण जेटली ने कहा कि वे अर्थशास्त्री ही फर्जी हैं। नोटबंदी का घोटाला ऐसे समझा जा सकता है कि इसके जरिए नरेंद्र मोदी ने हमसे आपसे वो सारे पैसे जमा करा लिए जो हमने बड़ी मुश्किलों से कमा रखे थे और उसे लेकर रिलायंस और अडानी से लेकर नीरव मोदी और नितिन संदेसरा तक को बांट दिए। इन सभी लोगों को नोटबंदी के बाद नरेंद्र मोदी एक लाख करोड़ रुपये से भी अधिक अलग अलग एकाउंट में दे दिए हैं। 

 








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