सोहराबुद्दीन एनकाउंटर:जज ने लगाई सीबीआई को फटकार,पूछा-गवाहों को क्यों नहीं मिल रही है सुरक्षा?

मुद्दा , मुंबई, मंगलवार , 13-02-2018


sohrabuddin-encounter-cbi-bombay-highcourt-witness-judge

जनचौक ब्यूरो

मुंबई। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में बांबे हाईकोर्ट ने सीबीआई को जमकर लताड़ लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि लगातार गवाह अपने बयानों से पलट रहे हैं। ऐसे में एजेंसी ने उनकी सुरक्षा की क्या व्यवस्था की है।

जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने कहा कि “क्या इसी गंभीरता के साथ सीबीआई ट्रायल को संचालित कर रही है”? वो सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन के तीन आवेदनों की सुनवाई कर रही थीं जिसमें उन्होंने गुजरात के पूर्व डीआईजी डीजी वंजारा, राजस्थान आईपीएस आफिसर दिनेश एमएन और गुजरात आईपीएस आफिसर राजकुमार पांडियन की रिहाई का विरोध किया है। इसके साथ ही सीबीआई द्वारा दायर राजस्थान के पुलिस कांस्टेबल दलपत सिंह राठौड़ और गुजरात पुलिस के अफसर एनके अमीन की रिहाई के खिलाफ दायर आवेदन की भी कोर्ट सुनवाई कर रहा है। 

जस्टिस मोहित डेरे ने एजेंसी से पूछा कि “अपने गवाहों को आपने क्या सुरक्षा दी है? गवाहों को सुरक्षा देना आपका कर्तव्य है जिससे वो निडर होकर अपना पक्ष रख सकें। आप चार्जशीट भी फाइल नहीं कर सकते और अपने गवाहों की रक्षा भी नहीं कर सकते।”

इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से आई खबर में बताया है कि अभी तक इस मामले में कुल 30 गवाह पलट चुके हैं। आपको बता दें कि सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी कौशर बी और तुलसीराम प्रजापति मामले में पीड़ित थे और इन सभी का गलत तरीके से एनकाउंटर कर दिया गया था।

उन्होंने कहा कि “उन मामलों में आप क्या कार्रवाई कर रहे हैं जिनमें गवाह पलट गए हैं? झूठी गवाही देने के लिए आपने उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की?” 

सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल सालिसीटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी लेनी है। ये बताते हुए कि जांच एजेंसी मूक दर्शक नहीं बनी रह सकती है। जस्टिस मोहिते डेरे ने कहा कि “ अगर आप का यही व्यवहार है तो इसका मतलब है कि आप केस को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। अपने गवाहों को आपने क्या सुरक्षा दी है? वो पलटते जा रहे हैं। क्या यही गंभीरता है जिसके जरिये आप ट्रायल को संचालित कर रहे हैं?”

उन्होंने कहा कि जो सहयोग उन्हें मिलना चाहिए था वो नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि “मैं चाहती हूं कि मेरे सामने एक बड़ी पिक्चर पेश की जाए न कि केवल टुकड़ों में बयान।”

उन्होंने ये वक्यव्य वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी की बहस सुनने के बाद दिया जो मामले में अमीन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

सीबीआई ने गुजरात एंटी टेर्ररिज्म स्क्वैड (एटीएस) के कांस्टेबल के बयान पर भरोसा किया था जिसने दावा किया था कि कौशर बी के शव को जलाने के समय अमीन मौके पर मौजूद थे। सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी के कथित अपहरण और एनकाउंटर मामले में दो में से एक गवाह के तौर पर पेश किया गया ये गवाह कई बार अपने बयानों से पलट चुका है।

जेठमलानी के मुताबिक कांस्टेबल ने 26 अप्रैल 2007 को सीआईडी के सामने अपना बयान दिया था और फिर उसके बाद 11 मई 2010 को सीबीआई के सामने बिल्कुल ठीक वही बयान दिया। उन्होंने कहा कि “इसमें रत्ती भर भी बदलाव नहीं है। यहां तक कि व्याकरण की दृष्टि से भी नहीं....उसे एक गवाह जरूर बनाया गया था लेकिन बार-बार वो कहता रहा कि उसने बयान नहीं दिया था।”

जेठमलानी ने कहा कि कानून के सामने उसका बयान प्रमाण के तौर पर स्वीकार्य करने योग्य नहीं है क्योंकि ये एक इकबालिया बयान है। उन्होंने कहा कि “ अगर वो इसे स्वीकार करने योग्य बनाना चाहते थे तो उन्हें एक मजिस्ट्रेट के पास ले जाना चाहिए था या फिर उसे माफी दे देनी चाहिए थी या फिर उसे सरकारी गवाह में तब्दील कर देना चाहिए था।....जहां तक अमीन के मामले की बात है तो उससे संबंधित उसके बयान को खारिज कर दिया जाना चाहिए।” 

उन्होंने ये भी कहा कि रुबाबुद्दीन ने कई बार सुनवाई टालने की अपील की। इसके चलते भी केस में देरी हुई। इस पर कोर्ट ने कहा कि “सीबीआई ने अपने आवेदन 2016 में दिए और उसके बाद इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए उसने कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने केवल याचिका दायर कर दी और फिर कुछ नहीं किया। उन्हें इसका जवाब देना है। हमें किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहिए। (मामले की सुनवाई में देरी के लिए।)”

ऐसा कहा जाता है कि सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौशर बी का गुजरात एटीएस ने हैदराबाद से अपहरण कर लिया था जब वो महाराष्ट्र के सांगली के रास्ते में थे। और फिर नवंबर 2005 में एक राज्य प्रायोजित एनकाउंटर में गांधीनगर के पास उनकी हत्या कर दी गयी थी। तुलसी प्रजापति को पुलिस अफसरों द्वारा दिसंबर 2006 में बनासकांठा के चापरी गांव में कथित तौर मार डाला गया था। मामले में बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।   






Leave your comment