उन्नाव गैंगरेप पीड़िता का आरोप, कहा-विधायक सेंगर को बचा रही है सीबीआई

मुद्दा , लखनऊ, सोमवार , 09-07-2018


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जनचौक ब्यूरो

लखनऊ। उन्नाव गैंग रेप कांड की पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों ने सीबीआई पर अपने पिता की हत्या के मामले में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बचाने का आरोप लगाया है।

बांगरमऊ के विधायक, उनके भाई अतुल और उनके चार गुर्गों पर पिछले साल जून महीने में महिला के साथ बलात्कार का आरोप लगा था। इसके साथ ही केस को वापस लेने से इनकार करने पर पीड़िता के पिता की एमएलए के भाई और उसके गुर्गों ने इसी साल के अप्रैल महीने में बेरहमी से पिटाई की थी। 

महिला के चाचा ने रविवार को उन्नाव स्थित अपने घर पर रिपोर्टरों को बताया कि “लखनऊ कोर्ट में सीबीआई द्वारा पेश की गयी चार्जशीट इस बात का सबूत है कि केंद्रीय एजेंसी नेता को बचाना चाहती है।”

शिकायतकर्ता के चाचा ने कहा कि “मैंने व्यक्तिगत तौर पर उन्हें आडियो फूटेज दिया था जिसमें कुलदीप ने मुझे बताया था कि गैंगरेप मामले की पैरवी नहीं बंद करने पर मेरे भाई को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा।”

“मीडिया रिपोर्टों में कुछ वरिष्ठ पुलिस अफसरों ने इस बात को स्वीकार किया है कि कुलदीप ने उन्हें बुलाया या फिर उनसे मुलाकात की और मेरे भाई को उस समय गिरफ्तार करने का दबाव डाला जब वो पुरी तरह से घायल थे। मुझे इस बात की पूरी आशंका है कि सीबीआई ने विधायक के खिलाफ सबूतों को नष्ट कर दिया है।”

महिला ने कहा कि “हम लोगों ने इसलिए सीबीआई जांच की मांग की थी क्योंकि हमें इस बात का डर था कि राज्य की पुलिस दबाव में काम करेगी। लेकिन हमारे पास इस बात को पुष्ट करने वाली रिपोर्ट है कि पुलिस ने उस प्रमाण को सीबीआई के हवाले कर दिया है जिसमें विधायक के मेरे पिता की हत्या में शामिल होने का सबूत है।”

सीबीआई के एक सूत्र ने इस बात का दावा किया कि हत्या में कुलदीप की भूमिका की अभी भी जांच हो रही है। “दि टेलीग्राफ” के हवाले से आई एक रिपोर्ट में उसने कहा है कि “हम दूसरी चार्जशीट के दायर होने से इनकार नहीं कर सकते हैं।” चाहे जिस रूप में सही गैंगरेप की चार्जशीट में उसका नाम आएगा।

इस साल की 3 अप्रैल को अतुल और सेंगर के गुंडों ने पीड़िता के पिता की उनके गांव में एक पेड़ से बांधकर बुरी तरीके से पिटाई की थी। उसके बाद पुलिस ने आर्म्स एक्ट के एक झूठे केस में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। बाद में सच्चाई सामने आने के बाद इस मसले में दो इंस्पेक्टरों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

पीड़ित महिला और उसकी मां 8 अप्रैल को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के बाहर खुद को जलाकर मार डालने की कोशिश की थीं। उसके बाद से ही पूरा मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो गया। उसके दूसरे ही दिन पीड़िता के पिता की उन्नाव जेल में मौत हो गयी। पोस्टमार्टम में पुराने के साथ-साथ कई ताजे घाव के भी सबूत मिले। जिससे इस बात का पता चला कि उनकी जेल के भीतर भी पिटाई की गयी थी।

अभी तक ये बात नहीं साफ हो पायी है कि सीबीआई कस्टडी के दौरान उनके उत्पीड़न की भी जांच कर रही है या नहीं। हालांकि चार्जशीट में अभी तक किसी पुलिसकर्मी का नाम नहीं आया है।  




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