भारतबंद:13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम और आदिवासियों को वनभूमि से बेदखली के खिलाफ

आंदोलन , , मंगलवार , 05-03-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम और आदिवासियों को वनभूमि से बेदखल करने के आदेश के खिलाफ आज भारत बंद था।  बंद का आह्वान जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन, संविधान बचाओ संघर्ष समिति, भाकपा-माले और कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने किया था। बंद का असर पूरे देश और राजधानी दिल्ली में देखने को मिला। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को 21 राज्यों के 11.8 लाख वनवासियों और आदिवासियों को वनभूमि से बेदखल करने का आदेश सुनाया था। लेकिन बाद में निर्देश पर रोक लगा दी गई। आदिवासी समूह की मांग है कि केंद्र उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए अध्या देश लाए।m

दिल्ली में मंडी हाउस से लेकर जंतर-मंतर तक कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं मार्च किया। बंद का असर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग था। बिहार में संविधान बचाओ संघर्ष समिति द्वारा मंगलवार को आहूत भारत बंद का आरजेडी और वाम दलों का भी समर्थन था। राज्य में बंद जातीय जनगणना कराने के बाद आबादी के अनुसार आरक्षण लागू करने समेत कई मुद्दों को लेकर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदिवासियों और वनवासियों को उनके आवास से बेदखल करने के फैसले से राहत देने के हालिया आदेश के बावजूद आदिवासी समूहों ने अपने आज 5 मार्च को भारत बंद के फैसले पर कायम रहने का निर्णय किया था। 

बिहार में 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ भारत बंद के समर्थन में भाकपा-माले के कार्यकर्ता सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया।लोगों ने 13 प्वायंट रोस्टर प्रणाली को वापस लेने, 200 प्वायंट रोस्टर प्रणाली पर अध्यादेश लाने, गैर संवैधानिक आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को रद्द करने, आदिवासियों के विस्थापन पर रोक तथा गरीबों-गृहविहीनों के राजिस्टर बनाने की मांग की। भाकपा-माले कार्यकर्ताओं ने बिहार के विभिन्न इलाकों में रेलवे के परिचालन को बाधित किया। बंद समर्थकों ने राष्ट्रीय व राजकीय पथों पर यातायात परिचालन बाधित कर जगह-जगह प्रदर्शन किए। इसी आंदोलन से जुड़कर खेग्रामस ने दलितों-गरीबों के वास-आवास पर किए जा रहे हमले के खिलाफ सभी दलित-गरीबों व गृहविहीनों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रजिस्टर बनाने की मांग पर भारत बंद के समर्थन में जिला व प्रखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए। प्रदर्शन के दौरान खेग्रामस कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों से संबंधित और देश के राष्टपति के नाम संबोधित ज्ञापन स्थानीय अधिकारियों को सौंपा।

माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि दलितों व पिछड़े समुदाय को प्राप्त आरक्षण पर केंद की मोदी सरकार लगातार हमला कर रही है ओैर उसे समाप्त करने पर तुली है और दूसरी ओर उसने संविधान विरोधी आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का झुनझुना लाया है। दलितों व पिछड़ों के आरक्षण में कटौती और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को 10 प्रतिशत का प्रावधान संविधान विरोधी कदम है। 13 प्वायंट रोस्टर प्रणाली लागू होने से विश्वविद्यालयों में दलित व पिछड़े वर्गों के छात्रों की रही सही संभावना भी खत्म हो जाएगी। एक भी आरक्षित वर्ग के छात्र शिक्षक के रूप में बहाल नहीं हो सकेंगे। केंद्र सरकार को तत्काल इस पर अध्यादेश लाना चाहिए।

खेग्रामस महासचिव धीरेन्द्र झा ने कहा कि न केवल दलित व पिछड़े समुदाय के आरक्षण में कटौती की जा रही है, बल्कि उन्हे पूरे देश में वास की जमीन से विस्थापित किया जा रहा है। बिहार में तो खासकर बरसो से बरस से बसे गरीबों को भी बेदखल किया जा रहा है। बिहार में लाखों गरीबों को या तो उजाड़ दिया गया है अथवा उजाड़ने की नोटिस दी गई है। आजादी के इतने सालों बाद भी हाउसिंग राइट मौलिक अधिकार का दर्जा प्राप्त नहीं कर सका है। आज इसके खिलाफ पूरे राज्य में खेग्रामस के बैनर से लाखों गरीबों ने जिला व प्रखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। सरकार जंगलों में आदिवासियों को उजाड़ रही है और बिहार में दलित-गरीबों को मोदी की इस कारपोरेटपरस्ती को पूरा भारत देख रहा है और आने वाले दिनों में सबक सिखायेगा।








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