आप छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी किसान आंदोलन

आंदोलन , , शनिवार , 17-06-2017


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। किसानों के आंदोलन में अब आम आदमी पार्टी भी कूद गयी है। पार्टी ने किसानों के मुद्दों पर राष्ट्रव्यापी संघर्ष छेड़ने का ऐलान किया है। इसके लिए उसने कार्यक्रम को चार चरणों में बांटा है। आखिरी चरण में उसने दिल्ली में एक बड़ी किसान रैली करने का फैसला किया है। ये सारी घोषणाएं और कार्यक्रम शनिवार को पार्टी की ओर से दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित राष्ट्रीय किसान सम्मेलन में की गईं।

चार चरणों में होगा आंदोलन

केजरीवाल की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में देश के 20 राज्यों से प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग की गई। पार्टी ने इसके सबसे प्रमुख मुद्दों में एक किसानों की फसल की लागत में 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर मूल्य तय करने के प्रावधान को तत्काल लागू करने की मांग की है। इस पर दबाव बनाने के लिए उसने राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। इसके तहत पहले चरण में जुलाई और अगस्त के बीच 20 राज्यों में किसान सम्मेलन आयोजित करने की योजना है। जबकि दूसरे चरण में 11 सितंबर से देशव्यापी किसान यात्रा शुरू होगी। तीसरे चरण में 2 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर धरना देने का कार्यक्रम है। सबसे आखिर में चौथे चरण में 26 नवंबर को दिल्ली में किसान रैली का आयोजन किया जाएगा।

केजरीवाल ने उठाया केंद्र पर सवाल

सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी मुखिया अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नीतियां ही समस्याग्रस्त हैं। लिहाजा उस पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने मरने वाले किसानों को शहीद का दर्जा देने की भी मांग की। उन्होंने सवालिया अंदाज में पूछा कि देश में किसान अपने हक के लिए हाथ जोड़े खड़ा है केन्द्र सरकार के सामने। क्या मोदी जी के पास उसे सुनने का वक्त नहीं है? किसी को तो किसानों के लिए लड़ना पड़ेगा। राजनीति में जिस कारण आए थे, उस रास्ते चलते रहेंगे।

श्वेतपत्र जारी करने की मांग

पार्टी के दिल्ली संयोजक गोपाल राय ने इस मौके पर केंद्र सरकार से किसानों के मसले पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसके साथ ही किसानों के मुद्दों को हल करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में किसानों को मिलने वाले मुआवजे को पूरे देश में लागू किया जाए। प्रधानमंत्री किसान फसल बीमा योजना नाकाम हो चुकी है और इसका पूरा लाभ किसानों को मिलने की जगह कंपनियां उठा रही हैं। इस पर तत्काल विचार करने की जरूरत है।  






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