ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम: हमें एक नहीं 99 प्रतिशत नागरिकों का भारत चाहिये!

आंदोलन , , रविवार , 03-03-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम (एआईपीएफ) ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आगामी लोकसभा चुनावों में जनता के वास्तविक सवालों को सामने लाने के लिए एक नागरिक घोषणापत्र जारी किया। 2019 के चुनावों में जन अभियान की शुरुआत करने के लिए नागरिक घोषणापत्र जारी करने से पहले अपने वक्तव्य में कविता कृष्णन ने बताया कि 16-17 फरवरी को दिल्ली में एआईपीएफ के पूर्व निर्धारित राष्ट्रीय कार्यक्रम में जनता के घोषणा पत्र को जारी किया जाना था लेकिन पुलवामा में सुरक्षा बलों पर हमले के बाद हमले में मारे गए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। आज जब हम चार्टर को जारी किर रहे हैं तो देश में युद्ध का माहौल बनाया जा रहा है और हमारी वायु सेना का एक पायलट पाकिस्तान की गिरफ्त में है। आज यह बात हर कोई देख सकता है कि युद्धोन्मांद के माहौल को कम करने के बजाय इसी वक्त मेरा बूथ सबसे मजबूत या खेलो इंडिया ऐप जारी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के नेता उन्माद को वोटों में बदलने और इससे चुनावों की तैयारी में लगे हैं। कविता कृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री जवाब दें कि बेरोजगारी- किसानों की आत्महत्या रोकने में अपनी विफलता, मजदूरों के अधिकारों पर हमला, महिला-दलित-अल्पसंख्यकों लगातार भय और असुरक्षा में जीने जैसे हालातों को पैदा करने की जिम्मेदारी को पुलवामा या युद्धोन्मांद के जरिए ढंकने की कोशिश न करें। 

समाजवादी और किसान नेता सुनीलम ने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है इससे दोनों देशों को नुकसान ही होगा। उन्होंने कहा मोदी ने सत्ता में आते ही कॉरपोरेट के लिए काम करना शुरू कर दिया था जिसकी शुरुआत भूमि अधिग्रहण बिल पर अध्यादेश लाकर की गई।

आदिवासी एवं जंगल बचाओ आन्दोलन के नेता जेवियर कुजूर ने कहा कि मोदी सरकार बनने के बाद किसी भी दौर से ज्यादा आदिवासियो पर हमले बड़े हैं यही नहीं केंद्र सरकार की उदासीनता के कारण ही आज तक वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों को उनकी जमीन तो नहीं दी जा रही है उल्टे उन्हें बेदखल करने की साजिशें की जा रही हैं।

वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने युद्धोन्मांद के खिलाफ  सभी समान विचार की ताकतों को खुलकर आगे आने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी सफाईकर्मियों के पैर धोने का नाटक करते हैं वह जाति व्यवस्था को बनाए रखने और मजबूत करने की कोशिश की ही कोशिश है। 

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष एन. साई बाला जी ने कहा कि सरकार और मीडिया द्वारा इस समय युद्धोन्मांद फैलाया जा रहा है जबकि पुलवामा की आतंकी कार्रवाई के लिए लिए खुफिया रिपोर्ट होने और बिना उचित सुरक्षा के सुरक्षा बलों की जान जोखिम में डालने के लिए कौन जिम्मेदार है तय कर, कार्रवाई की जानी चाहिए। 

वक्ताओं के संबोधन के बाद सभी आमंत्रित जनों ने सिटीजन चार्टर को जारी किया और तय किया कि पिछले पांच वर्षों में  देश के संविधान - लोकतंत्र - समाज के विभिन्न तबकों और जनता के बुनियादी सवालों के साथ भाजपा - मोदी सरकार द्वारा किए गए हमलों के खिलाफ और चुनावों में आम जन के वास्तविक प्रश्नों को मुख्य एजेंडा बनाने के लिए पूरे देश में जन अभियान संगठित करेगा।

इसी क्रम में एआईपीएफ ने भारत की जनता के घोषणा पत्र को विभिन्न राज्यों में जारी किया है।  एआईपीएफ राष्ट्रीय परिषद ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव देश के लोकतंत्र के लिए निर्णायक होंगे। देशवासियों के साथ हम सब पर भी एक ऐसी सरकार के चुनाव की जिम्मेदारी रहेगी जिसमें देश के संविधान और धर्मनिरपेक्ष ढांचे को सुरक्षित रखने के साथ ही आम जन के बुनियादी सवालों को भी हल किया जा सके। एआइपीएफ मुहिम चला रहा है कि जनता के इस घोषणापत्र को चुनाव में भाग लेने वाली सभी विपक्षी पार्टियां अपनायें। हमारी आपसे अपील है कि आप भी इस मुहिम का हिस्सा बनें।इस अभियान को किसान आन्दोलन, मजदूर आन्दोलन, छात्र - युवा आन्दोलन, रोजगार अधिकार आन्दोलन, दलित आन्दोलन, महिला आन्दोलन, मानवाधिकार आन्दोलन, तथा अन्य नागरिक आन्दोलनों का समर्थन है। एआईपीएफ चुनावों से पहले इस घोषणापत्र को लेकर जनता के बीच में अभियान चलायेगा और सभी विपक्षी दलों से इस घोषणापत्र को अपनाने की अपील करेगा ताकि चुनाव के बाद जो भी सत्ता में आयें उनकी जबाबदेही तय हो सके।

2019 के चुनाव के लिये भारतीय जनता के घोषणापत्र की मुख्य बात है कि हमें 99 प्रतिशत नागरिकों का भारत चाहिये, सिर्फ 1 प्रतिशत का भारत हर्गिज नहीं। जनता की मांग है कि –

1. राफेल, एनपीए, कर्मचारी चयन आयोग घोटाले, स्टार्ट अप इंडिया, व्यापमं, सृजन, सारधा व अन्य घोटाले के दोषियों को सजा दो। मजबूत लोकपाल की स्थापना करो। भ्रष्टाचार विरोधी कानून को कमजोर करने के प्रावधानों को वापस लो। प्राकृतिक संसाधनों की कारपोरेट द्वारा लूट को समाप्त करो। अमीरों और कारपोरेट द्वारा टैक्स और बैंकों से लिए गये लोन को वापस करने की गारंटी करो। सीआईसी, सीवीसी और दूसरी जांच एजेंसियों की स्वायत्तता की गारंटी करो।

2. चुनावी भ्रष्टाचार को बढ़ाने वाली मोदी सरकार की चुनावी बाण्ड योजना को वापस लो। चुनावी चंदे में पूरी पारदर्शिता लागू करो। “सबसे ज्यादा वोट पाकर चुनाव जीतने” की व्यवस्था की जगह आनुपातिक प्रतिनिधित्व लागू करो। मतपत्रों से चुनाव की व्यवस्था वापस लाओ।

3. देश के 1 प्रतिशत सर्वोच्च अमीरों की कर्ज बंद करो। उन पर टैक्स दर बढ़ाओ, सम्पत्ति कर एवं उत्तराधिकार टैक्स लगाओ।

4. आवश्यक वस्तुओं के दाम घटाओ। सार्वभौम सार्वजनिक वितरण प्रणाली लागू करो और सभी आवश्यक वस्तुओं का वितरण सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत करो। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को आधार से जोड़ना बंद करो। राशन की जगह खातों में पैसा भेजने की प्रक्रिया पर रोक लगाओ।

5. मनरेगा को खेती से जोड़ कर कम से कम 250 दिनों के रोजगार की गारंटी करो। खेत मजदूरों और ग्रामीण कामगारों के लिये 500 रूपये प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी की गारंटी करो। रोजगार गारंटी योजना को शहरी इलाकों में विस्तारित करो।

6. बेरोजगारी को खत्म करो। खाली पड़े 24 लाख सरकारी पदों पर भर्ती करो। सुरक्षित व सम्मानजनक रोजगार की गारंटी करो।

7. हर बच्चे को उसके पड़ोस में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये कॉमन स्कूल व्यवस्था लागू करो। केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा दो। अध्यापकों की भर्ती में 200 प्वाइंट रोस्टर लागू करो। निजी शिक्षण संस्थाओं और कोचिंग सेंटरों पर लगाम लगाओ। आरक्षण पूरी तरह लागू करो। कैम्पस लोकतंत्र की गारंटी करो। संस्थाओं में GSCASH का गठन करो। महिला छात्रावासों में भेदभावपूर्ण नियमों और कर्फ्यू को समाप्त करो। दकियानूसी और घृणा फैलाने वाली पाठ्यपुस्तकों को वापस लेते हुए पाठ्यक्रमों में वैज्ञानिक व तार्किक सोच को बढ़ावा देने वाली सामग्री शामिल करो। कम सीटों के चलते होने वाली होड़ को खत्म करने के लिये उच्च शिक्षा में पर्याप्त सीटों की व्यवस्था करो।

8. सांप्रदायिक घृणा और दलितों के खिलाफ अत्याचार को रोकने में राज्य सरकार की जिम्मेदारी तय करने वाला कानून बनाओ।

9. वन अधिकार, CNT/SPT और PESA कानून कड़ाई से लागू करो और इन कानूनों पर हमला करना बंद करो।

10. विधान सभाओं और संसद में 33 फीसदी महिला आरक्षण कानून पारित करो।

11. आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों की हिफाजत करो। सामाजिक और शैक्षिक स्तर पर उत्पीड़न और भेदभाव का सामना न करने वालों के लिये संविधान संशोधन के द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का प्रावधान वापस लो।

12. कश्मीर और बस्तर के नागरिक इलाकों में सैन्य हस्तक्षेप खत्म करो और कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप कश्मीर समस्या का समाधान करो।

13. नागरिकता संशोधन कानून वापस लो, सभी राज्यों से डिटेंशन कैम्प खत्म करो। NRC को नफरत फैलाने और लोगों को बाहर करने के औजार की तरह इस्तेमाल करना बंद करो।

14. UAPA, NSA, AFSPA, MCOCA और राजद्रोह जैसे दमनकारी कानूनों को समाप्त करो व इन कानूनों के तहत गिरफ्तार किये गये राजनीतिक बंदियों को रिहा करो।

आल इंडिया पीपुल्स फोरम (एआइपीएफ) 

मोदी ने सत्ता में आते ही विपक्षविहीन राजनीति का प्रचार करना शुरु कर दिया था, यहां तक की मीडिया के बड़े हिस्से को भी सरकार की जीहुजूरी करने वाले में तब्दील कर दिया। ऐसी स्थिति में जनता के सवालों-सरोकारों को आवाज देने के लिये 2015 में देशभर के कई प्रबुद्ध नागरिकों, जन संगठनों, सामाजिक आन्दोलनों, ट्रेड यूनियनों और राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर एआइपीएफ का निर्माण किया ताकि भाजपा की साम्प्रदायिक और कारपोरेट-परस्त नीतियों का विरोध किया जा सके। देश के विभिन्न राज्यों ओडिशा, छत्तीसगढ़, बंगाल, उतराखण्ड, दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु, झारखण्ड, बिहार, उत्तर प्रदेश आदि में एआइपीएफ की राज्य इकाईयां गठित हो चुकी हैं। एआइपीएफ जनता के सवालों-सरोकारों के लिये संघर्षरत विभिन्न शक्तियों का मंच है जो आगामी चुनावों में जनता के बुनियादी सवालों को चुनावों के मुख्य एजेंडे के रूप में सामने लाकर फासीवादी ताकतों के खिलाफ जनमानस को तैयार करने के लिए प्रयासरत है हम चुनावों के बाद भी जन संघर्षों की अपनी भूमिका जारी रखेंगे।

हम सबके लिए क्यों खास है 2019 का चुनाव 

आगामी लोकसभा चुनाव देश में अब तक हुये अन्य चुनावों की तरह के सामान्य चुनाव नहीं है।मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज देश में बेरोजगारी के हालात पिछले 45 सालों में सबसे बदतर हो चुके हैं। कृषि संकट चरम पर है, किसानों की बरबादी बदस्तूदर जारी है। छोटे व्यापारियों और उद्योगों को नोटबंदी और जीएसटी के बाद लगातार घाटा झेलना पड़ रहा है। खाद्य और जरूरी वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। संघ परिवार द्वारा महिलाओं की आजादी पर बढ़ते हमले और भाजपा व उसके नेताओं द्वारा जगह-जगह बलात्कारियों व यौन उत्पीाड़कों का बचाव करते देख कर ’बेटी बचाओ’ नारा एक क्रूर मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है।

राजनीति में परिवारवाद का विरोध करने का नाटक करने वाली भाजपा और मोदी के राज में नेता-पुत्रों और कॉरपोरेट घरानों की चांदी कट रही है। अमित शाह का बेटा जय शाह और अजित डोभाल का बेटा विवेक डोभाल विशालकाय घोटालों में लिप्त  हैं। अम्बानी-अडानी आदि को मुनाफा पहुंचाने के लिए बड़े-बड़े घोटालों में खुद प्रधानमंत्री कार्यालय संलिप्त है। मोदी सरकार का कुल जमा यही हासिल है कि उसने हर लोकतांत्रिक संस्था  पर - संसद, राज्यों के अधिकार, सीबीआई, आरबीआई, आईबी, एनएसए, राष्ट्रीय सांख्यि‍कीय आयोग, योजना आयोग, न्यायपालिका, विश्वविद्यालय, विज्ञान, शिक्षा और इतिहास आदि की तमाम संस्थाओं और परिषदों पर हमला बोल दिया है। देश के संविधान और जनता के संवैधानिक अधिकारों पर प्रहार किया है। देश को साम्प्रदायिक आधार पर तोड़ने की कोशिश की है, और साम्प्रदायिक व जातिवादी गिरोहों को देश के अल्पसंख्यकों, दलितों और महिलाओं पर हमला करने की खुली छूट ही नहीं दी है बल्कि उनको उकसाया भी जा रहा है।

मोदी सरकार से देश को बचाना आज का सबसे महत्वसपूर्ण कार्यभार बन गया है। 2019 का चुनाव इसी लिए हम सबके लिए बेहद अहम होंगे, अब ऐसी सरकार को वापस नहीं आना चाहिए। जितनी क्षति यह सरकार देश की संस्थाओं और समाज के ताने-बाने को पहुंचा चुकी है उसकी भरपाई करने और लोकतंत्र को पुर्नबहाल करने व नई ऊर्जा फूंकने का कार्यभार आज देश के सामने है।

सम्पूभर्ण विपक्ष के सामने आज इसी कार्यभार को पूरा करने की ऐतिहासिक चुनौती है। जाहिर है इसके लिए सभी को पिछले घटनाक्रम से सबक लेने होंगे और ऐसी वैचारिक, नीतिगत दिशा अपनानी होगी कि देश का लोकतंत्र मजबूत हो। देश की जनता एवं जनान्दोालन आगामी सरकारों को भी इसी जनपक्षधर दिशा के लिए जवाबदेह ठहरायेंगे। यह चुनाव देश के संविधान, लोकतंत्र, हमारी संस्कृति व मूल्यों को बचाने और जीवन स्तर की बेहतरी के अवसर चुनने की घड़ी है। इसी कड़ी में एआइपीएफ जनता का घोषणा पत्र जारी कर रहा है। घोषणापत्र जारी करने में एआईपीएफ राष्ट्रीय परिषद के सदस्य कविता कृष्णन, किरन शाहीन, लीना डाबिरू, विजय प्रताप, एन डी पंचोली, विद्या भूषण रावत, पुरूषोत्तम शर्मा समाजवादी नेता सुनीलम, वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह, वरिष्ठ पत्रकार और ग्रीन आंदोलन के नेता सुरेश नौटियाल, जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष बालाजी, आदिवासी नेता जेवियर कुजूर, समाजवादी नेता शंभू शरण अग्रवाल, एआईपीएफ संयोजक गिरिजा पाठक सहित विभिन्न गणमान्य लोग उपस्थित थे।   



 

 










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