सफल रहा आशाकर्मियों का राज्यव्यापी रेल रोको, बिहार में कई जगहों पर रेल व्यवस्था रही अस्त-व्यस्त

आंदोलन , पटना, शुक्रवार , 28-12-2018


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जनचौक ब्यूरो

पटना। आशाकर्मियों की हड़ताल के 27 वें दिन संगठन के बिहार में ‘रेल रोको’ आंदोलन से पूरे राज्य में रेल परिचालन चरमरा गया। कई स्थानों पर बिल्कुल सुबह ही आशाकर्मियों ने रेलों की आवाजाही को पूरी तरह ठप्प कर दिया। आशाकर्मियों के इस आंदोलन के समर्थन में भाकपा-माले, एपवा, रसोइया आदि संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। 

भोजपुर में आशाकर्मियों के रेल रोको अभियान में भाकपा-माले की केंद्रीय कमिटी के सदस्य राजू यादव, राज्य कमिटी सदस्य कयामुद्दीन अंसारी सहित एपवा की नेताओं को गिरफ्तार किया गया। बारसोई में माले विधायक महबूब आलम भी रेल रोको अभियान में शरीक हुए। भाकपा-माले ने आशाकर्मियों के प्रति बिहार सरकार के रवैये की तीखी आलोचना की है और कहा है कि सरकार बिहार की जनता के हित में तत्काल वार्ता करे और हड़ताल समाप्त करवाए।

पटना में फुलवारी शरीफ में भाकपा-माले की केंद्रीय कमेटी की सदस्य व बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ की बिहार अध्यक्ष शशि यादव के नेतृत्व में रेल का चक्का जाम किया गया। उन्होंने बताया कि पटना जिले के पांच स्थानों पर रेल रोको कार्यक्रम को सफल बनाया गया।  उनका कहना था कि गुरुवार को पूरे राज्य में 150 से अधिक स्थानों पर महिला आशा के बूते रेल रोको सफल किया गया जो खुद में एक ऐतिहासिक घटना है।

आशाकर्मियों का रेलरोको।

बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ (गोप गुट) अध्यक्ष शशि यादव के अलावा ऐक्टू राज्य सचिव रणविजय कुमार, महासंघ गोप गुट के सम्मानित अध्यक्ष रामबली प्रसाद, बिहार आशा संघ नेता कौशलेंद्र कुमार वर्मा, पूनम, अनिता, संगीता, विभा, अनुराधा आदि नेताओं के नेतृत्व में सैकड़ों आशा कर्मी फुलवारीशरीफ रेलवे पटरी पर उतर गईं। जिसके चलते सुबह 9.30 से 10.45 बजे तक दानापुर-राजगीर पैसेंजर ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक पर सवा घण्टे खड़ी रही। नतीजतन दिल्ली हावड़ा रुट की ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह ठहर गया।

शशि यादव ने नीतीश-मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार हमारी मांगों को शीघ्र नहीं मानती और वार्ता नहीं करती तो राज्य भर की 90 हजार आशा सरकार के किसी भी स्वास्थ्य प्रोग्राम को सफल नहीं होने देंगी। इतनी ही नहीं अगले कदम के तौर पर सरकार के मंत्रियों, विधायकों का बिहार में चलना-फिरना भी दूभर कर दिया जाएगा। पटना साहिब में एपवा की बिहार राज्य अध्यक्ष व बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ की अध्यक्ष सरोज चौबे व राखी मेहता के नेतृत्व में श्रमजीवी एक्सप्रेस को रोका गया। आशाकर्मियों के समर्थन में माले नेता नसीम अंसारी व अनय मेहता भी कार्यक्रम में शामिल हुए। ऐक्टू से संबद्ध आल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन के कार्यकर्ता भी रेल रोको का जगह-जगह हिस्सा बने।

पटना के अलावा पूरे बिहार में सैकड़ों जगहों पर हजारों की संख्या में हड़ताली आशा कार्यकर्ताएं रेल पटरी पर उतर आयीं जिससे पूरे राज्य में रेल परिचालन एक से दो घण्टे के लिये पूरी तरह से ठहर गया। और रेलवे की पूरी व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गयी। जहानाबाद, भभुआ, दरभंगा, पटना के पुनपुन, जमालपुर, मधेपुरा, सिवान, पश्चिम चंपारण, लखीसराय आदि तमाम जगहों पर रेलों की आवाजाही को बाधित किया गया। पटना के बाद सबसे अधिक नीतीश कुमार के गृह जिला नालन्दा में रेलवे परिचालन बाधित रहा।

आशा को 18000 मासिक मजदूरी (मानदेय) व सरकारी कर्मी का दर्जा देने सहित अन्य मांगों को लेकर ‘आशा संयुक्त संघर्ष मंच’ की अगुवाई में 01 दिसंबर से राज्य में लगभग 90 हजार आशा अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। आशा संयुक्त संघर्ष मंच ने नीतीश-मोदी से मांगों पर चुप्पी तोड़ने व मासिक मानदेय सहित अन्य मांगों को पूरा करने की मांग पर आज हड़ताल के 27 वें दिन राज्यव्यापी रेल रोको की पूर्व घोषणा कर रखा था।

 








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