बाबरी विध्वंस की बरसी पर देश-भर में कार्यक्रम, वामपंथी दलों ने निकाला संविधान बचाओ-धर्मनिरपेक्षता बचाओ मार्च

आंदोलन , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 06-12-2018


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चरण सिंह

नई दिल्ली। बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 26वीं बरसी पर पूरे देश में जुलूस, प्रदर्शन और धरनों का आयोजन किया गया। वामपंथी दलों की ओर से संयुक्त रूप से संविधान बचाओ, धर्मनिरपेक्षता बचाओ मार्च के तहत देश के कई शहरों में रैलियां निकाली। इसके साथ समाजवादी और दूसरे लोकतांत्रिक दलों के लोगों ने भी अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें इन दलों के कार्यकर्ताओं के साथ ही सैकड़ों नागरिकों ने हिस्सा लिया। 

मुख्य आयोजन दिल्ली में हुआ। जिसमें इन दलों के नेताओं ने मंडी हाउस से जुलूस निकालकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। इस मौके पर एक सभा भी हुई। 

सभा को संबोधित करते हुए सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि बाबरी मस्जिद पर हमला देश के संविधान पर हमला था। और ये हमला उस दिन किया गया था जब बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर का निर्माण दिवस था। उन्होंने कहा कि बीजेपी सांप्रदायिक राजनीति का बहुत घिनौना खेल खेल रही है उससे न केवल संविधान और लोकतंत्र बल्कि पूरा देश ही संकट में फंस गया है। उन्होंने कहा कि पांच सालों में जनता के लिए मोदी सरकार ने एक भी काम नहीं किया लेकिन अब जब चुनाव आ रहे हैं तो वो नफरत और घृणा की राजनीति फैलाकर उसे जीतने की कोशिश में जुट गए हैं।

सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज का दिन शर्म का दिन है लेकिन उसके साथ ही संकल्प का भी दिन है। हमें इस बात का संकल्प लेना चाहिए कि 6 दिसंबर 1992 को जो हुआ था वो देश में कभी भी न दोहराया जाए। उन्होंने मौजूदा निजाम देश से संविधान और लोकतंत्र को खत्म करना चाहता है लेकिन हमें मिलजुल कर उसकी इस साजिश को नाकाम करना होगा। इस मौके पर सीपीआई, फारवर्ड ब्लाक समेत कई दूसरे दलों के नेताओं ने भी अपनी बात रखी।

इसके साथ ही लोक राज संगठन, जमात ए इस्लामी हिंद, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, सीपीआई (एमएल) न्यू प्रोलेतेरियन, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया, सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, जन संघर्ष मंच हरियाणा, सिख फोरम, यूनाइटेड मुस्लिम्स फ्रंट, सिटिजंस फॉर डेमोक्रेसी, यूनाइट अगेंस्ट हेट, निर्माण मजदूर पंचायत संगम, लोक पक्ष, हिन्द मज़दूर सभा (गाजियाबाद), मजदूर एकता कमेटी, मुस्लिम मजलिस-ए-मुषावरत (दिल्ली), पुरोगामी महिला संगठन, नौजवान भारत सभा, हिन्द नौजवान एकता सभा, एनसीएचआरओ, एपीसीआर, स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाइजेशन और पीयूसीएल की ओर से भी मार्च निकालकर सभा की गयी। 

वक्तओं ने कहा कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस पूरी सोची-समझी रणनीति के साथ किया गया था। केंद्र में शासन कर रही कांग्रेस पार्टी और विपक्ष की भाजपा, दोनों ने देशभर में सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने में एक-दूसरे की पूरी मदद की थी। भाजपा ने देश भर में मस्जिद के विध्वंस के लिए खुलेआम अभियान चलाया था। बाबरी मस्जिद के विध्वंस का मकसद था सभी मुसलमान लोगों को जलील करना। 

बीते 26 वर्षों के दौरान, अराजकता और हिंसा बहुत बढ़ गयी है। मुसलमान लोगों को लगातार सांप्रदायिक हमलों का निशाना बनाया गया है। सभी मुसलमानों को “आतंकवादी” और “पाकिस्तानी एजेंट” बताया जाता है। बेकसूर नौजवानों को पोटा और यूएपीए जैसे कानूनों के तहत सालों-सालों जेल में बंद रखा जाता है और प्रताड़ित किया जाता है। अनेक लोग फर्ज़ी मुठभेड़ों में मारे गये हैं। ”गौ रक्षा” के नाम पर लोगों पर हमले किये जा रहे हैं।

वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक सोच रखने वाले लोगों के सामने खतरनाक स्थिति पैदा हो गयी है। राजनीति का संप्रदायीकरण और अपराधीकरण तथा राजकीय आतंकवाद का इस्तेमाल हमारे शासकों का पसंदीदा तरीका बन गया है। भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों ने यह साफ-साफ दिखा दिया है कि वे सत्ता में आने और सत्ता में टिके रहने के लिये कुछ भी करने को तैयार हैं, यहां तक कि सांप्रदायिक जनसंहार से भी उन्हें परहेज नहीं है। 

बाबरी मस्जिद के मामले को सिर्फ एक भूमि विवाद नहीं माना जा सकता है। इसमें मूल सवाल यह है कि आने वाली पीढ़ियों के लिये हम कैसा हिन्दोस्तान बनायेंगे? हिन्दोस्तान के लोगों ने हमेशा ही यह माना है कि सभी की खुशहाली और सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का फर्ज़ है। आज त्रासदी यह है कि वर्तमान राज्य इस फर्ज़ को पूरा करने में नाकामयाब रहा है।

वर्तमान राज्य ने हमेशा ही यह सुनिश्चित करने का काम किया है कि बड़े-बड़े इजारेदार पूंजीवादी घराने के लोग लूटकर जल्दी से अपनी दौलत बढ़ा सकें। चुनावी प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सरकार चलाने की ज़िम्मेदारी सिर्फ उन पार्टियों को दी जाये जिन्हें बड़े-बड़े इजारेदार पूंजीवादी घरानों का समर्थन प्राप्त हो। ये पार्टियां धर्म, जाति, इलाका या भाषा के आधार पर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करती हैं और लोगों को आपस में भिड़ाती हैं, ताकि लोग एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिये संघर्ष न कर सकें।

वक्ताओं ने आह्वान किया कि “आइये, हम अपनी एकता को मजबूत करें और इस वसूल के साथ आगे बढ़ें कि” एक पर हमला, सब पर हमला” है। हमें सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंकवाद के पीड़ितों को “राष्ट्र-विरोधी” और “आतंकवादी” करार देने की शासकों और कॉरपोरेट मीडिया की सभी कोशिशों का डटकर विरोध करना होगा”।

सहभागी संगठनों ने यह मांग की कि 26 वर्ष पहले बाबरी मस्जिद के विध्वंस को आयोजित करने वालों और सांप्रदायिक कत्लेआम भड़काने वालों को पकड़कर कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाये। उन्होंने लोगों से अपील की कि सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंकवाद के खिलाफ़ व इंसाफ के लिये संघर्ष में सभी एकजुट हों। “आइये, लोगों की एकता को तोड़ने के शासकों के प्रयासों को नाकाम करें! आइये, हम लोगों के हाथों में राज्य सत्ता के लिये संघर्ष को आगे बढ़ायें!”

वक्ताओं में लोक राज संगठन के अध्यक्ष एस राघवन, इंतजार नईम जमात ए इस्लामी हिन्द, प्रकाश राव हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, एसक्यूआर इलियास वेलफेयर पार्टी आफ इंडिया, का. शिवमंगल सिद्धांतकर सीपीआई (एमएल), न्यू प्रोलितरियत, इसके अलावा मौलाना मेंहदी हसन कासमी, पूनम, संतोष केके सिंह, अब्दुल राशिद, ईश्वर भाई चरण सिंह शामिल थे।










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Umesh chandola :: - 12-06-2018
सरकारी कम्युनिस्ट पार्टीयो ने जुझारू आर्थिक संघर्ष भी न करने की जैसे कसम खा ली है। ये ही एकता के शत्रु हैं।

Md Asif :: - 12-06-2018
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