मंदसौर से चंपारण तक निकलेगी किसान यात्रा

आंदोलन , , शनिवार , 17-06-2017


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। देश भर में किसानों की हालत लगातार बदतर होती जा रही है। अभी हाल ही में मध्य प्रदेश  में कर्ज न चुका पाने के कारण कई किसानों ने आत्महत्या कर ली। ऐसी घटनाओं के बाद देश भर में किसानों के मन में आक्रोश व्याप्त है। किसानों के कर्जमाफी की बात अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है। किसान संगठनों ने देश के सभी किसानों की कर्जा माफी और फसल के न्यूनतम समर्थम मूल्य (एसएमपी) को लागत का डेढ़ गुना करने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर देशभर के किसानों में अलख जगाने के लिए मध्यप्रदेश के मंदसौर से छह जुलाई को किसान जनजागृति यात्रा निकाली जाएगी और यह यात्रा दो अक्टूबर को चंपारण किसान आंदोलन की सौवीं वर्षगांठ पर बिहार के चंपारण में समाप्त होगी। यह फैसला कल शुक्रवार को दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में जुटे करीब 130 किसान संगठनों ने सर्वसम्मति से लिया। इसमें जय किसान आन्दोलन भी शामिल है।

मंदसौर में किसानों का प्रदर्शन

किसान यात्रा के लिए बनी समन्वय समिति

इस यात्रा व आन्दोलन की तैयारी के लिए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति का गठन किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में किसानों के संगठन का एकसाथ जुटना किसान एकता की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।  किसान संगठनो की इस तरह एकजुटता लंबे अर्से बाद दिखाई दी है।

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष व जय किसान आन्दोलन के संस्थापक योगेंद्र यादव ने कहा कि, किसान संगठन जिस तरह एक छतरी के नीचे एकत्र हुए हैं। यह उनके लिए ऐतिहासिक मौका है। मंदसौर व महाराष्ट्र के किसानों से उन्हें संघर्ष की प्रेरणा मिली है।

ज्य किसान आंदोलन के राष्ट्रीय सह संयोजक अजीत सिंह यादव कहते हैं कि, देश में हो रहे किसान आंदोलन स्वतः स्फूर्त हैं। दरअसल, किसानों की समस्याएं इतनी बढ़ गईं हैं कि अब वे सड़क पर उतर आए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि इन आंदोलनों को दिशा देने के लिए एक समन्वय समिति बनाई है जो देश के किसानों में अलख जगाएगी। इन समिति में हर संगठन से एक-एक प्रतिनिधि होगा। यह प्रतिनिधि सभा बुनियादी फैसले लेगी।

गांधी की चंपारन यात्रा

किसान संगठन और किसान नेता हुए एक साथ

किसान संगठनों का कहना है कि जन जागृति के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान के तौर पर यात्रा निकाली जाएगी। दो अक्टूबर को यात्रा खत्म होने के बाद अगली रणनीति पर विचार होगा। इस बार किसान किसी दशा में हारेगा नहीं और अपना हक लेकर रहेगा। इसके अलावा रोजमर्रा के फैसले लेने के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाया गया है। जिसके संयोजक वी एम सिंह होंगे। इस ग्रुप में सांसद राजू शेट्टी, पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह, तमिलनाडु के अय्याकन्नू, कर्नाटक के चंद्रशेखर, मध्यप्रदेश के डा. सुनीलम, राजस्थान के रामपाल जाट, कविता कुलकर्णी, पंजाब के दर्शनपाल व स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव शामिल होंगे। दिल्ली से इसकी सेक्रेट्रिएट चलाने की जिम्मेदारी जय किसान आन्दोलन के राष्ट्रीय संयोजक अभीक शाह को सौंपी गई है। इससे पहले अलग-अलग राज्यों से आए किसानों ने अपनी समस्याएं रखी तथा किसानों की एकजुटता पर बल दिया।

प्रधानमंत्री ने पचास फीसदी मुनाफा देने का किया था वादा

सभी ने एक स्वर में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014  में चुनावों के दौरान स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कर किसानों की फसल की कीमत के साथ 50  फीसदी मुनाफा देने का वायदा अपने चुनाव घोषणा पत्र में किया था। लेकिन मोदी सरकार ने वायदा खिलाफी की जिससे देश के किसानों में भारी नाराजगी है। किसानों को लागत का पचास फीसदी बढ़ाकर फसल की कीमत देने और देश भर के किसानों के सभी तरह के कर्जे की माफी, इन दो मुद्दों पर आन्दोलन को आगे बढ़ाने पर आम सहमति बनी है। हालांकि देश के विभिन्न राज्यों में किसानों के अलग-अलग मुद्दे हैं। लेकिन अभी इन दो मुद्दों पर ही फोकस किया जाएगा। इसके लिए प्रधानमंत्री को ज्ञापन भी दिया जाएगा और सरकार अगर चर्चा करेगी तो बातचीत भी करेंगे। इन दो मुद्दों से कम पर कोई बातचीत नहीं होगी।

सांसद और किसान नेता राजू शेट्टी का कहना है कि,हम यात्रा निकालेंगे मंदसौर से जहां किसानों की हत्या हुई। सबको एक करेंगे,गांव-गांव जाकर किसानों को आपस में जोड़ने का काम करेंगे।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी एम सिंह ने कहा कि, ‘‘अगर देश के किसानों को बचाना है तो किसानों में जागरूकता पैदा करनी होगी और एक करना होगा। जन जागृति यात्रा निकालने का यही मकसद है। स्वराज अभियान के जय किसान आन्दोलन ने देश के सभी किसान संगठनों के साझा आन्दोलन में पूरी ताकत से जुटने व देश के सभी किसान संगठनों को एकजुट करने में हर सम्भव पहल करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही जय किसान आन्दोलन किसानों की स्वतंत्र गोलबंदी तेज करने की पुरजोर कोशिश करेगा।             






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