अहमदाबाद पहुंची जीएसटी के खिलाफ आंदोलन की आग

आंदोलन , , रविवार , 16-07-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद/सूरत। जीएसटी की आग सूरत से चलकर अब अहमदाबाद पहुंच गयी है। शनिवार को अहमदाबाद की सड़कों पर हजारों की संख्या में कपड़ा व्यापारियों ने मार्च किया। व्यापार संगठनों के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में ज्यादातर कपड़ा व्यापारी शामिल थे। ये सभी सरकार से किसी भी कीमत पर जीएसटी को वापस लेने की मांग कर रहे थे। कपड़ा व्यपारियों का ये मार्च अहमदाबाद के न्यू क्लॉथ मार्किट से इनकम टैक्स सर्किल तक गया। फिर अहमदाबाद के अलग-अलग कपड़ा व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने कस्टम, एक्साइज और सर्विस टैक्स के मुख्य कमिश्नर अजय जैन और जीएसटी गुजरात संयोजक पीडी वाघेला को अपना ज्ञापन सौंपा। जिसमें इन लोगों ने टेक्सटाइल से तत्काल जीएसटी हटाने की मांग की।

केंद्र सरकार ने नहीं मानी बात

इस मौके पर हुई एक सभा में मस्कती मार्केट क्लॉथ मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरांग भगत ने कहा कि सरकारी अधिकारियों ने हमारे मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने रख कर हल निकालने का वादा किया था। लेकिन सरकार ने हमारी एक बात नहीं मानी। जिसके चलते अहमदाबाद के व्यापारियों को सड़क पर उतरना पड़ा। न्यू क्लॉथ मार्केट मर्चेंट एसोसिएशन के सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी के बाद टेक्सटाइल मार्केट मंदी के दौर से गुज़रने के बाद अब वो धीरे-धीरे रिकवरी की ओर बढ़ रहा था। लेकिन तभी जीएसटी के निर्णय ने टेक्सटाइल इंडस्ट्री की कमर तोड़ दी। भंवरलाल जैन ने कहा कि इस उद्योग में मजदूरों की बड़ी संख्या है जो प्रोसेसिंग, फोल्डिंग, स्टिचिंग और ट्रांसपोर्ट में काम करते हैं। ऐसे में अगर सरकार ने अपने फैसले को वापस नहीं लिया तो इस हिस्से को मजबूरन घर बैठना पड़ जाएगा।

अहमदाबाद में व्यापारियों का प्रदर्शन।

सरकारी प्रोजेक्ट पर तलवार

इसके साथ ही गुजरात कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने भी जीएसटी के विरोध में रैली निकाली। जिसमें तकरीबन 5000 के आस-पास लोग शामिल हुए। रैली में अधिकतर सरकारी प्रोजेक्ट में काम करने वाले कांट्रैक्टर और वर्कर थे। जीसीए अध्यक्ष अरविन्द पटेल ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी बातें नहीं सुनी गईं तो राज्य में चल रहे सभी सरकारी प्रोजेक्ट को रोक दिया जायेगा। आप को बता दें कि गुजरात में पांच हज़ार से अधिक सरकारी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। उनका कहना है कि पहले मात्र 0.6% वर्क कॉन्ट्रैक्ट टैक्स देना पड़ता था अब पब्लिक कंस्ट्रक्शन वर्क पर 18% जीएसटी लगा दिया गया है। पहले उन्हें सर्विस टैक्स से भी छूट थी। उन्होंने बताया कि जीएसटी के चलते उन लोगों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

गुजरात चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष रोहित पटेल ने जनचौक को बताया कि उनके अनुसार सरकार जीएसटी के माध्यम से टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर अधिक कर लगा रही है।

व्यापारियों का प्रदर्शन।

फिर उग्र हो गया सूरत में आंदोलन

उधर, अमरनाथ आतंकी हमले के बाद सूरत कपड़ा व्यपारियों द्वारा चलाया जाने वाले जीएसटी विरोधी आन्दोलन की गति थोड़ी धीमी पड़ गई थी। क्योंकि इस हमले में मारे गए अधिकतर श्रद्धालु सूरत के आस-पास के ही थे। जिस बस पर हमला हुआ था वह सूरत से सटे वलसाड जिले से गई थी। शुक्रवार को पुलिस ने अनशन पर बैठे हितेश सखलेचा को जबरन न्यू सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराकर आन्दोलन को समाप्त करने की कोशिश की। लेकिन इससे आन्दोलन और भड़क उठा। आपको बता दें कि सखलेचा 1 जुलाई से ही जीएसटी के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे थे। बताया जा रहा है सखलेचा को जबरन उठाने से व्यपारी भड़क गए और हजारों की संख्या में पहुंचकर उन्होंने रिंग रोड को जाम कर दिया। पूरा पांच से लेकर छह घंटे तक रिंग रोड बंद रहा।

 

सरकार चाहती है व्यापारियों पर शिकंजा

सूरत कपड़ा उद्द्योग से जुड़े रिजवान उस्मानी ने जनचौक को बताया कि भाजपा सरकार जीएसटी के माध्यम से सूरत के व्यापारियों पर अपना शिकंजा कसना चाहती है। जिस तरह से सीबीआई व अन्य एजेंसियों का सत्ता पक्ष दुरुपयोग करता है उसी प्रकार से इंस्पेक्टर राज के द्वारा व्यपारियों को डराया जायेगा। और फिर व्यापारी सरकार के राजनैतिक कंट्रोल में आ जायेगा। सरकार कहती है कि जीएसटी के माध्यम से सिर्फ एक कर वसूलेगी जो 28% से अधिक नहीं होगा। लेकिन यहां यार्न पर जीएसटी लगाती है उसके बाद प्रोसेसिंग पर कर लगाती है अंत में पक्के कपड़े पर लगाती है जो 28% से अधिक हो जाता है। इसी अन्याय के खिलाफ कपड़ा व्यवसाई सड़क पर हैं।

सूरत के सचिन और पलसाना से प्रति दिन 4 करोड़ मीटर कपड़ा बनता है जिसकी कीमत लगभग 160 करोड़ रुपये होती है।  टेक्सटाइल इंडस्ट्री की हड़ताल के कारण अब तक कई हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इस उद्योग से जुड़े मजदूर यूपी, बिहार, उड़ीसा से आते हैं जो काम-काज बंद होने के कारण अपने गांवों को लौट रहे हैं। इनके मुद्दों पर सरकार के साथ-साथ मुख्य धारा का मीडिया भी भेद-भाव कर रहा है। शनिवार को अहमदाबाद की रैली में जी न्यूज़ और सुधीर चौधरी के खिलाफ कपड़ा व्यापारियों ने नारे लगाये इनका आरोप है जी न्यूज़ सरकार की चापलूसी कर रहा है और कपड़ा उद्योग की हड़ताल पर देश को गुमराह कर रहा है। 

 






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Shujat Alam :: - 07-16-2017
देश का किसान खुशहाल होगा देश खुशहाल होगा, किसान दुःखी होगा तो देश बर्बाद हो जायेगा