ऊना कांड की बरसी पर आज़ादी कूच, मेहसाना से धनेरा तक पदयात्रा

आंदोलन , , मंगलवार , 04-07-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। ऊना दलित आन्दोलन के नेता जिग्नेश मेवानी ऊना कांड की पहली बरसी पर आज़ादी कूच के नाम से उत्तर गुजरात की पदयात्रा करने जा रहे हैं। यह पदयात्रा 12 जुलाई को मेहसाना से शुरू होगी और 18 जुलाई को धनेरा पहुंचेगी। इसमें आदिवासियों के हक में काम करने वाले रोमेल सुथारिया, जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार, शहला रशीद के साथ अन्य विश्वविद्यालयों के छात्र भी शामिल होंगे। इनके अलावा देशभर से अम्बेडकरवादी मेहसाना में एकत्रित होकर संघ और भाजपा के खिलाफ बिगुल फूकेंगे।

आज़ादी कूच का पोस्टर। फोटो : जनचौक

11 जुलाई को सरसपुर में सम्मेलन

यात्रा 12 जुलाई को मेहसाना के सोमनाथ चौक से दोपहर के 12 बजे प्रस्थान करेगी। इससे पहले 11 जुलाई को जिग्नेश मेवानी के राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच ने अहमदाबाद के सरसपुर में एक दिवसीय सम्मलेन रखा है।

जिग्नेश मेवानी ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि दलित समाज के साथ हुए अन्याय व अत्याचार के खिलाफ गुजरात सरकार ने वादों के सिवाय कुछ नहीं किया है। उनके मुताबिक मोदी सरकार हिन्दू राष्ट्र बनाने की ओर बढ़ रही है, इसी कारण दूसरे धर्म के लोगों के खिलाफ वातावरण बनाया जा रहा है। देश में फैले गौ-आतंक ने संविधान की धज्जियाँ उड़ा दी हैं जो एक चिंता का विषय है। दलित समाज इस राष्ट्र को कभी भी हिन्दू राष्ट्र नहीं बनने देगा ये देश मनु स्मृति से नहीं बाबा साहेब के संविधान से चलेगा।

ईसा मसीह का भी मुद्दा उठा

इस मौके पर आदिवासियों के हक में काम करने वाले रोमेल सुथारिया ने कहा कि गुजरात सरकार तुरंत 9वीं कक्षा की हिंदी पुस्तक को वापस ले जिसमें ईसा मसीह के लिए अपशब्द का इस्तेमाल किया गया है। इस पुस्तक को गुजरात स्टेट टेक्स्ट-बुक बोर्ड ने छापा है। 16वां पाठ जिसमे लेखक आनंद शंकर माधवन कहते हैं “इस संबंध में हैवान ईसा का एक कथन सदा स्मरणीय है” इस गलती को गुजरात सरकार ने टाइपिंग मिस्टेक कहा है परन्तु किताब को वापस लेने से इंकार कर दिया है। रोमेल ने लोगों से इसे धर्म से न जोड़कर संविधान के लिए इस मुद्दे पर सभी को साथ आने की अपील की है। जिग्नेश ने भी कहा कि यह गलती नहीं बल्कि जानबूझ कर ऐसा किया गया है। सरकार गलती करने वाले के खिलाफ 298 के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करे और तुरंत हिंदी की किताब वापस लेकर गलती को सुधारकर नई किताब मुहैया कराये।

आज़ादी कूच का यात्रा मार्ग। फोटो : जनचौक

गौ आतंक के खिलाफ पदयात्रा

जिग्नेश मेवानी ने जनचौक को बताया पिछले वर्ष की पदयात्रा ऊना अत्याचार के खिलाफ की गई थी, इस बार देश में गौ आतंक के बढ़ रहे मामलों के खिलाफ है। हमारी सरकार से मांग है कि धर्म और जाति के नाम पर किसी को न मारा जाये। यदि कोई ऐसा करता है तो उससे सरकार और पुलिस सख्ती से निपटे। सरकार भीड़ तंत्र द्वारा हो रही हत्याओं को रोकने के लिए कानून बनाये। उन्होंने कहा कि  ऊना आन्दोलन के समय गुजरात सरकार ने बहुत से वायदे किये थे लेकिन वायदे सिर्फ वायदे रह गए। दलितों को वैकल्पिक रोज़गार नहीं दिया गया, स्पेशल कोर्ट नहीं बनाए गए, दो आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। उन्होंने कहा कि दलितों की आर्थिक परिस्थिति दिन ब दिन ख़राब होती जा रही है इसीलिए हम लोगों ने धार्मिक और जातिगत उन्माद के अलावा आर्थिक मुद्दों को भी सामने रखा है। सरकार दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को उनकी ज़मीन और बेरोजगारों को रोज़गार दे। इसके लए आज़ादी कूच पद यात्रा का स्लोगन “गाय नु पूछ्डू तमे राखो आमने अमरी जमीन आपो” होगा।

18 जुलाई को समापन

आज़ादी कूच पदयात्रा का 18 जुलाई को बनासकांठा के धनेरा में महासम्मलेन के साथ समापन होगा। 12 जुलाई को शुरुआत के समय मेहसाना की सभा में पाटीदार नेता रेशमा पटेल और चिराग पटेल भी शामिल होंगे। इस कूच में दलितों के साथ पाटीदार, आदिवासी और मुस्लिम भी शामिल होंगे। 

इस पदयात्रा को लेकर गुजरात भाजपा सरकार अभी बहुत संभल कर काम कर रही है। समझा जा रहा है कि सरकार अवरोध पैदा कर चुनावी वर्ष में किसी प्रकार का खतरा मोल नहीं लेना चाहती है। 






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