जब जिग्नेश ने गाड़ा जमीन पर कब्जे का झंडा

आंदोलन , अहमदाबाद, बुधवार , 19-07-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद/धनेरा। ऊना दलित आन्दोलन की बरसी पर राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच द्वारा निकाली गई आज़ादी कूच यात्रा का वनासकांठा के धनेरा में समापन हो गया। जिग्नेश मेवानी के नेतृत्व में निकाली गई इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दलितों को कागज़ पर दी गई ज़मीनों का हक दिलाना तथा देश में गौ आतंक के खिलाफ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा को कड़ा संदेश देना था। इस मौके पर मेवानी ने कहा कि सरकार अगर जमीनों पर कब्जा नहीं दिलाती है तो पूरे सूबे में इसी तरह की यात्राएं निकाली जाएंगी। 

आजादी कूच यात्रा के बाद सम्मेलन।

कब्जा न मिलने पर होंगी यात्राएं

समापन भाषण में जिग्नेश मेवानी ने गुजरात सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खेती ज़मीन पर होती है न कि कागज़ पर इसलिए सरकार द्वारा भूमिहीन दलितों को कागज़ पर आवंटित ज़मीन का वास्तविक कब्ज़ा दे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार राज्य भर के भूमिहीन-दलितों को कागज़ पर आवंटित ज़मीन का कब्ज़ा नहीं देती है तो राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच राज्य भर में यात्रा निकाल कर दलितों को जागरूक करेगी। मेवानी ने कहा कि 2017 के विधान सभा चुनाव में गाय भाजपा को भष्म कर देगी। उन्होंने कहा कि गाय तुम्हारी माता है गाय तुम रखो हमें तो हमारी ज़मीन दो। 

मेवानी ने भाजपा की केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि दादरी से लेकर वल्लभगढ़ तक गाय के नाम पर हुई मुस्लिमों की हत्या ने लोगों को भीतर से झकझोर दिया है। इस तरह की हत्याओं को दलित नहीं बर्दाश्त नहीं करेगा। अब हम इस देश में कौमवादी, जातिवादी, मनुवादी, हिंदूवादी राजनीति को नहीं चलाएंगे न ही इस प्रकार की घटिया राजनीति से देश के किसान, मजदूर तथा अन्य शोषित समाज का ध्यान भी नहीं भटकने देंगे। मेवानी ने प्रधानमंत्री से पूछा कि 2014 में सरकार के उस वादे का क्या हुआ जिसमें उसने प्रति वर्ष 2 करोड़ रोज़गार देने की बात कही थी। उन्होंने प्रधानमंत्री को गाय का दुम रखने और लोगों को रोजगार देने की मांग की।

मंच पर जिग्नेश के साथ अन्य।

अमीरों की है बीजेपी सरकार 

इस मौके पर मेवानी ने मोदी सरकार को अमीरों की सरकार बताया। उन्होंने कहा कि मुकेश अम्बानी के घर का मासिक लाइट बिल 70 लाख रुपये आता है। जबकि दूसरी तरफ गरीब मजदूरों, किसानों और आदिवासियों के घरों में लाइट नहीं है। रहने को घर नहीं है, पेट भर खाना तक नहीं मिलता ऐसी असमानता नहीं चलेगी। यूपी में योगी प्रशासन द्वारा दलितों को साबुन देने के बाद नहा कर सीएम के सामने आने की घटना पर मेवानी ने कहा कि “हम लोग किसान मजदूर हैं मेहनत करते हैं पसीना आता है जो साफ़ हो जाएगा। आप का मन और चरित्र ही गंदा है उसको कैसे साफ़ करोगे”। मेवानी ने योगी की युवा वाहिनी के नेता द्वारा मुस्लिम महिलाओं के मृत देह को कब्र से निकालकर बलात्कार करने के बयान पर कहा कि यही हिंदुत्व का संस्कार है और ऐसे हिंदुत्व को कभी भी भारत में लागू नहीं होने दिया जाएगा। 

मेवानी ने दलित, अल्पसंख्यक, आदिवासी, किसान, मजदूर की एकता पर जोर देते हुए दलितों की उपजातियों की एकता पर भी जोर दिया। 

12 जुलाई को निकली थी यात्रा

यह यात्रा मेहसाना से 12 जुलाई को निकाली गई थी। गुजरात पुलिस ने 27 जून को यात्रा की अनुमति देकर 8 जुलाई को अनुमति रद्द कर दी थी। 11 जुलाई को अहमदाबाद में सम्मलेन के बाद 12 जुलाई को बिना अनुमति यात्रा निकलने पर जिग्नेश मेवानी, कन्हैया कुमार, रेशमा पटेल सहित दर्जनों लोगों के खिलाफ 143 धारा के तहत मुक़दमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। बावजूद इसके यात्रा रुकी नहीं और तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक यात्रा धनेरा पहुंची। यात्रा में यूपी, दिल्ली, पंजाब, कर्नाटक, महाराष्ट्र आदि राज्यों से बड़ी संख्या में दलित-मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोग शामिल हुए। इसके अलावा देश भर से आए अलग-अलग कला मंचों के कलाकार भी अपने इन्कलाबी गीतों से यात्रियों और जनता का उत्साहवर्धन करते रहे।

मंच पर दूसरों के साथ जिग्नेश।

मंत्री ने बताया जिग्नेश को कांग्रेस का दलाल 

ऊना काण्ड के समय गुजरात सरकार द्वारा कई वादे किये गए थे जिसे पूरा करना तो दूर सरकार ने भेदभाव के तहत दलितों से संवाद भी नहीं किया। मेवानी के इस आरोप के जवाब में कैबिनेट मंत्री आत्माराम ने जनचौक को बताया कि जिसने ये आरोप लगाए हैं उससे पूछना चाहिए कि दलित आन्दोलन चला रहा है या जो भी सरकार विरोधी आन्दोलन चलाये उसमे शामिल हो जाता है। वो यात्रा निकालकर किसानों और अल्पसंख्यकों की बात करता है। इस आज़ादी कूच में दलित कहां आया? आत्माराम ने जिग्नेश को दलित नेता मानने से ही इंकार कर दिया। उनके अनुसार जिग्नेश के पास कोई ज़मीन नहीं है 40 से 50 लोग हैं जिन्हें वह किराए पर लेकर निकलता है। और भीड़ इकठ्ठा करने के लिए अल्पसंख्यकों, किसानों और मजदूरों की बात करता है। उन्होंने जिग्नेश को कांग्रेस का दलाल करार दिया। लेकिन जब ऊना आन्दोलन के समय किये वादों पर आत्माराम से पूछा गया तो उन्होंने दोपहर बाद बात करने की बात कहकर मामले को टाल दिया। उन्होंने कहा कि इसको फाइल में देखना पड़ेगा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने क्या वादे किये थे और कितने वादे पूरे हुए।

जब एक दलित को मिला जमीन पर कब्जा

राष्ट्री दलित अधिकार मंच के सहसंयोजक राकेश महेरिया ने जनचौक को बताया कि जब मंगलवार को आज़ादी कूच धनेरा पहुंचने वाली थी। धनेरा तथा उसके आस-पास के गांवों में दलितों की ज़मीनों को पुलिस ने एक दिन पहले दबंगों से छुड़वाकर उन्हें सौंप दी थी। ज़मीनों के मुद्दे को लेकर सम्मलेन चल ही रहा था कि उसमें भागीदारी करने आए वालेरा गांव के कांति भाई को मिली जमीन पर उनके गांव जाने पर पता चला कि गांव के दबंग दरबारों का उस पर फिर से कब्जा हो गया। इसकी सूचना मिलते जिग्नेश मेवानी ने स्टेज से ही इन दरबार दबंगों के खिलाफ उत्पीड़न एक्ट के तहत वहां मौजूद जनता को साथ लेकर पुलिस स्टेशन में ऍफ़आईआर दर्ज करने की अपील कर डाली। हालात को गंभीर होता देख पुलिस ने सम्मलेन स्थल पर ही एफ़आईआरदर्ज की और राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच ने लावेरा गांव जाकर ज़मीन का कब्ज़ा दोबारा लेकर उस पर नीला झंडा गाड़ दिया।  

 






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