क्या अब जिन्ना हाउस को जमींदोज करने की तैयारी है?

विशेष , मुंबई, सोमवार , 14-08-2017


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लोकमित्र गौतम

शायद आपको अयोध्या से निकले और पूरे देश में गूंजे इस स्लोगन की याद हो- ‘बस एक धक्का और दो..’ जी हां, बाबरी मस्जिद ध्वंस की ही बात हो रही है। लगता है जल्दी ही यह नारा फिर सुनाई देगा। लेकिन अयोध्या में नहीं, वहां से 1600 किलोमीटर दूर देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में। दक्षिण मुंबई के बेहद पॉश मालाबार हिल इलाके में स्थित,पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना की कोठी, जो एक जमाने तक साउथ कोर्ट के रूप में भी मशहूर रही है, को इन दिनों शिवसेना और भाजपा के कार्यकर्ता जमीदोज़ होते देखना चाहते हैं। हालांकि अभी तक ये बात दोनों पार्टियां खुलकर पार्टी स्तर से नहीं कर रही हैं बल्कि इन पार्टियों के सांसद, विधायक, स्थानीय कार्पोरेटर और कार्यकर्ता व्यक्तिगत रूप से ही ज्यादा कहा रहे हैं।

जिन्ना के आवास पर गांधी।

लेकिन जिस तरह पिछले एक हफ्ते से पुलिस का पहरा जिन्ना हाउस के इर्द-गिर्द बढ़ा है। उससे लगता है मामला गंभीर है। इन दिनों जिन्ना हाउस के इर्द-गिर्द तक न आम लोगों को और न ही मीडिया वालों को जाने दिया जा रहा है। जिन्ना हाउस की सुरक्षा में तैनात एक पुलिस जवान ऑफ़ द रिकार्ड बताता है कि साब ख़ुफ़िया खबर है कि 14 अगस्त को कुछ उपद्रवी लोग जिन्ना हाउस पर धावा बोल सकते हैं। इसीलिये पुलिस एलर्ट है। जरूर पुष्ट ख़ुफ़िया खबर ही होगी ; क्योंकि पहले जहां हैंगिंग गार्डेन देखने आने वाले तमाम लोग या बालकेश्वर जाने वाले लोग, हर दिन इधर भी टहल हुए चले आते थे और जिन्ना हाउस की पृष्ठभूमि में खूब सेल्फी खींचा करते थे, वहीं अब 200-300 मीटर दूर से भी पुलिस किसी को मकान की फोटो नहीं लेने दे रही। लोगों को मकान के इर्द-गिर्द भी नहीं फटकने दिया जा रहा है।

वास्तव में शिवसेना सांसद राहुल शेवाले ने लोकसभा में इसी साल 31 मार्च 2017 को कहा था, ‘इसी जिन्ना हाउस में भारत के विभाजन की 'साजिश' रची गयी थी इसलिए इसे ध्वस्त कर दिया जाना चाहिए।’ दरअसल संसद में  शत्रु संपत्ति अधिनियम को 11 मार्च 2017 को मंजूरी मिलने के बाद से मुंबई स्थित जिन्ना हाउस अब सरकार के नियंत्रण में आ गया है। इसलिए शिवसेना के सांसद राहुल शेवाले तथा तमाम कार्यकर्ता जिन्ना के इस घर को गिराकर उसके स्थान पर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए स्मारक बनवाना चाहते हैं। शिवसेना वालों की ही तरह कुछ महीनों पहले महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा ने भी जिन्ना हाउस को ध्वस्त किए जाने की मांग की थी। उन्होंने विधानसभा में कहा कि आजादी से पहले भारत के तीन टुकड़े करने का षड्यंत्र जिन्ना हाउस में ही रचा गया था इसलिए अब इसे ध्वस्त कर यहां सांकृतिक बना दिया जाना चाहिए।

जिन्न हाउस के बाहर पुलिस।

प्रभात लोढ़ा साल 1995 से लगातार इसी मालाबार इलाके से विधायक बनते आ रहे हैं। प्रभात लोढ़ा मुंबई शहर की एक बड़ी रीयल एस्टेट डेवलपर कंपनी के प्रवर्तक (प्रमोटर) भी हैं। इस समय भी उनकी कंपनी के शहर में 3 दर्ज़न से ज्यादा विभिन्न रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट चल रहे हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि ढाई एकड़ ज़मीन पर बने जिन्ना हाउस पर उनकी कंपनी की वर्षों से नजर थी, लेकिन जब उन्हें यह नहीं मिल सका तो लोढ़ा साहब चाहते हैं कि 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 2,603 करोड़ रुपये) की अनुमानित कीमत वाला यह मकान ध्वस्त कर दिया जाए। लोढ़ा कई बार कह चुके हैं कि शत्रु संपत्ति कानून संसद में पास हो जाने के बाद अब षड्यंत्र का इतिहास ढोती इस इमारत का देश में क्या काम ?

जिन्ना हाउस के ध्वंस की यह गूंज पाकिस्तान तक में सुनाई दी है जिस पर पिछले दिनों पाकिस्तान के नेता और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान भड़क गए हैं। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के चेयरमैन इमरान खान ने शिवसेना राहुल शेवाले और भाजपा के विधायक प्रभात मंगल लोढ़ा की निंदा करते हुए कहा कि मकान को ढहाने से इतिहास को नहीं मिटाया जा सकता। इमरान खान ने ट्वीट कर कहा, 'भारतीय सांसद जिन्ना हाउस को ढहाने की मांग कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण और परेशान करने वाला है।' जबकि लोकसभा में शून्य काल के दौरान शिवसेना सांसद राहुल शेवाले द्वारा उठाया गया यह मुद्दा लंबे समय तक सोशल मीडिया पर 'डेमोलिश जिन्ना हाउस' के नाम से ट्रेंड करता रहा है।

मुंबई स्थित जिन्ना हाउस।

अगर इस कीमती मकान की ऐतिहासिकता की बात करें तो यह वाकई महत्पूर्ण दस्तावेज है। दक्षिणी मुबंई के मालाबार हिल इलाके में मौजूद यह आलीशान यानी बंगला जिन्ना हाउस समंदर किनारे स्थित है। तब इसके निर्माण में इतालवी संगमरमर और अखरोट की लकड़ी का इस्तेमाल किया गया था। इंग्लैंड से लौटने के बाद जिन्ना ने इसे 1936 में बनवाया था। यह समय वह था जब गोलमेज सम्मेलन निरर्थक साबित हो चुका था और पाकिस्तान की अवधारणा मजबूत होने लगी थी। सवाल है तब जिन्ना ने मुंबई में इतना ख़ूबसूरत घर क्यों बनवाया जिसकी तब लागत 2 लाख आयी थी। क्या जिन्ना को तब तक नहीं लगता था कि पाकिस्तान बनेगा? ..और क्या वह अपनी जिंदगी के आख़िरी दिन हिन्दुस्तान में ही चैन से बिताना चाहते थे ? मकान बनने की टाइमिंग पाकिस्तान को लेकर जिन्ना की साफ़-साफ़ दुविधा का ब्यान करती है।

हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि 1936 में मुस्लिम लीग का पूरा नियंत्रण जिन्ना के हाथ में आ गया था। बहरहाल जिन्ना इस घर में मुल्क के बंटवारे तक रहे। इसके बाद वे कराची चले गए। जिन्ना ने अपनी निगरानी में अपने इस साउथ कोर्ट मकान का निर्माण का काम पूरा करवाया था। यूरोपीय शैली की इस इमारत की डिजाइन ब्रितानी वास्तुकार क्लॉड बेटली ने तैयार की थी। साउथ कोर्ट की ऐतिहासिक अहमियत का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यह गांधी और नेहरू के साथ जिन्ना की दर्जनों लंबी बातचीत का गवाह रहा है। लेकिन इसे ध्वस्त करके कुछ लोग इतिहास को सुपुर्द-ए-ख़ाक करने की कोशिश कर रहे हैं।

 

 






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