आईजी कल्लूरी की नियुक्ति के खिलाफ पत्रकार कमल शुक्ला अनशन पर

आंदोलन , , मंगलवार , 22-01-2019


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तामेश्वर सिन्हा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की नयी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के फैसले के खिलाफ वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला आमरण अनशन पर बैठ गए हैं।  उन्होंने ये अनशन आतंक का पर्याय रहे आईजी एसपीएस कल्लूरी को सरकार द्वारा फिर से प्रतिष्ठित पद दिए जाने के फैसले के खिलाफ किया है।

कमल का कहना है कि अपने कार्यकाल के दौरान कल्लूरी ने न केवल छत्तीसगढ़ की छवि को देश-दुनिया में धूमिल करने का काम किया है बल्कि निर्दोष आदिवासियों को नक्सली बताकर बड़े स्तर पर उनकी हत्याएं करायी है। और जो बचे उन्हें जेलों के हवाले कर दिया गया। विडंबना ये है कि जिसे बीजेपी सरकार ने बस्तर से हटाकर पुलिस मुख्यालय भेजा था कांग्रेस की सरकार ने उसे फिर से लाने का काम किया है। सत्ता परिवर्तन के बाद बदलाव की बयार में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने उसे “ईओडब्ल्यू और एसीबी” जैसे महत्वपूर्ण पद पर कल्लूरी की नियुक्ति की है। कमल ने सवालिया अंदाज में पूछा कि आखिर उसे किस मजबूरी अथवा ईमानदारी की सौगात भूपेश बघेल ने दिया है ! बस्तर के नागरिकों समेत सभी मानवाधिकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार इस फैसले से हतप्रभ हैं।

बूढ़ापारा धरना स्थल पर अनशन पर बैठे कमल की मांग आईजी कल्लूरी को बर्खास्त कर जेल भेजे जाने की है। साथ वो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भी इस्तीफा चाहते हैं। उनका कहना है कि जब तक उनका अनशन चलेगा वो मौन धारण किए रहेंगे। 

कमल के साथ दूसरे पत्रकार।

पत्रकार कमल शुक्ला ने कहा कि 15 सालों से जमीं रमन सिंह की भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने में प्रदेश के तमाम बुद्धिजीवियों ने कांग्रेस का साथ दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी भूल गए हैं कि कल्लूरी आदिवासियों पर अत्याचार का पर्याय है। बावजूद इसके भूपेश बघेल ने उसे महत्वपूर्ण पद से नवाज दिया। चुनाव के समय कांग्रेस के पक्ष में माहौल यह बना था कि आदिवासी नरसंहार के दोषियों के ऊपर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन उल्टा कांग्रेस सरकार ने उन्हें आर्थिक अपराध ब्यूरो का मुखिया बना दिया। भूपेश बघेल जिसे जेल भेजने की बात करते थे उन्हें आज अपना खास बना रहे हैं। उनकी ऐसी क्या मजबूरी है उसे उन्हें सूबे के लोगों को बताना चाहिए। 

जिस आताताई पुलिस अधिकारी के आतंक और दहशत को लेकर बस्तर सहित समूचे प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को सत्तारूढ़ किया उसके मुखिया ने बस्तर के साथ ही प्रदेश भर के पत्रकारों से भी वादाखिलाफी की है। चुनाव से पूर्व कांग्रेस के दिग्गजों ने प्रदेश के पत्रकारों, मानवाधिकार एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को यह विश्वास दिलाया था कि, कांग्रेस के सत्ता में आते ही दुर्दांत पुलिस अधिकारी कल्लूरी के खिलाफ जांच कमेटी बनाई जाएगी और उसे जेल भेजा जाएगा तथा प्रदेश में “पत्रकार सुरक्षा कानून” लागू किया जाएगा।  जिसे विधानसभा के पहले सत्र में ही लाया जाएगा, ऐसा न करके आईजी कल्लूरी को ईओडब्ल्यू और एसीबी जैसे महत्वपूर्ण पद देकर बस्तर और प्रदेश के पत्रकारों के साथ विश्वासघात किया गया है।

उनके समर्थन में सहयोगी पत्रकार साथी दिनेश सोनी, गोपाल पाठक, विश्वनाथ राजू, विद्यानंद ठाकुर जी धरना स्थल पर उपस्थित थे।

रायपुर से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।








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?????? ???????? :: - 01-22-2019
प्रमोद पत्रकार कमल जी के प्रतिरोध का में पूरी तरह समर्थन करता हूं और उम्मीद करता हूं कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी शीघ्र ही उनकी मांगों को स्वीकार कर एसआरपी कल्लूरी के खिलाफ जांच बैठाएं और निर्दोष आदिवासियों को जो जेलों में अभी भी पड़े हैं उन्हें मुक्त करें.